Noida: सुपरटेक निदेशक आरके अरोड़ा पर एक और FIR दर्ज हुआ है। ग्रेनो के प्रोजेक्ट में फ्लैट देने को लेकर धोखाधड़ी करने के आरोप में सेक्टर 58 थाना पुलिस ने अरोड़ा समेत 14 के खिलाफ केस दर्ज जांच शुरू कर दी है।
14 साल पहले की थी फ्लैट की बुकिंग
सेक्टर 58 पुलिस को दी शिकायत में ग्रेटर नोएडा के बीटा टू स्थित गोल्फ विस्टा अपार्टमेंट निवासी संजीव कुमार ने आरोप लगाया है कि बिल्डर से 2010 में दो बेडरूम का फ्लैट 16 लाख रुपये में देने सौदा हुआ था। जिसके लिए उसने 12 लाख रुपये भी जमा करा दिए थे। लेकिन 14 वर्ष बाद भी उन्हें फ्लैट नहीं मिला।
दूसरे को फ्लैट कर दिया अलॉट
आरोप है कि बिल्डर की ओर से निर्धारित धनराशि से 12 लाख रुपये अधिक मांग रहे हैं। विरोध करने पर आरोपियों ने शिकायतकर्ता से मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी है। संजीव ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसने जिस फ्लैट की बुकिंग थी उसे किसी और अलॉट कर दिया।
संजीव की शिकायत पर पुलिस ने सुपरटेक बिल्डर लिमिटेड के निदेशक आरके अरोड़ा, मोहित अरोड़ा, जीएल खेड़ा, राज मंगल, रामानुज शर्मा और अनुज कुमार शर्मा समेत छह अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया है। सेक्टर 58 थाना प्रभारी ने बताया कि जल्द ही आरोपियों से पूछताछ कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Noida: उत्तर प्रदेश के जिले नोएडा में भले ही अब रजिस्ट्री का काम शुरू हो गया है. लेकिन इसका निरीक्षण लेने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ 10 के बीच किसी भी दिन नोएडा आ सकते है. कहा जा रहा है कि यहां आकर सीएम सबसे पहले पूरे मामले की समीक्षा करेंगे. ऐसे में खबर ये है कि सीएम के आने से पहले काफी हद तक रजिस्ट्री का काम पूरा हो जाए या फिर उनके सामने ही बड़े स्तर पर रजिस्ट्री कराई जाएगी.
जानें पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, नोएडा के सेक्टर-77 स्थित एक्स्प्रेस जेनिथ सोसाइटी में रहने वाले बायर्स काफी लंबे समय से फ्लैट की राजिस्ट्री की मांग कर रहे हैं. ये मामला डीएम तक भी जा चुका है. इसपर उन्होंने बैठक भी ली थी. लेकिन जब कोई निर्णय नहीं निकला तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले का रुख किया और रजिस्ट्री कैंप लगाने के निर्देश जारी किए.
फ्लैट रजिस्ट्री कैंप
इसी कड़ी में सेक्टर-77 में फ्लैटों की रजिस्ट्री का काम गुरुवार से शुरु हो गया है. पहले दिन 50 बायर्स को फ्लैट रजिस्ट्री की फाइल भी मिल चुकी है. रजिस्ट्री के काम को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश प्राधिकरण के चेयरमैन ने दिए हैं. पैकेज साइन कर चुके बिल्डरों को बकाया चुकाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. वहीं, पैसे जमा कर चुके बिल्डरों के परियोजनाओं की रजिस्ट्री सुनिश्चित कराने के उपाय किए जा रहे हैं.
सीएम की समीक्षा बैठक
बता दें कि, सरकार और प्राधिकरण की कोशिश है कि दो-तीन माह में जितनी भी लंबित रजिस्ट्री है उसका काम पूरा कर लिया जाए. लेकिन कहा जा रहा है कि सीएम योगी भी इस कामकाज का कभी भी निरीक्षण लिया जा सकता है. अगर कोई कमी मिलती है तो सरकार द्वारा इसपर सख्त रवैया भी अपनाया जाएगा.
Noida: हर किसी की चाह होती है कि उसका अपना घर हो. छोटा हो मगर अपना घर हो. यही चाह आपकी भी जरूर होगी. आने वाले समय में आप अपनी इसी चाहत को भी पूरा करना चाहते होंगे. आप भी सोच रहे होंगे कि पहले 1 बीएचके या फिर 2 बीएचके फ्लैट ले लेते है. लेकिन कहा जा रहा है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ढूंढने से भी 1 और 2 बीएचके फ्लैट नहीं मिल रहे हैं. ऐसा हम नहीं कर रहे है बल्कि ये जानकारी सामने आई है, जिससे खुद नोएडा अथॉरिटी भी हैरान है.
नोएडा अथॉरिटी के प्लानिंग विभाग की रिपोर्ट
दरअसल, नोएडा अथॉरिटी के प्लानिंग विभाग के मुताबिक, 4 साल में 12 ग्रुप हाउसिंग के नए प्रॉजेक्ट सामने आए है. लेकिन हैरानी वाली बात ये है कि इन सभी प्रॉजेक्ट में 3, 4 और 5 बीएचके के ही फ्लैट शामिल है. इतना ही नहीं बल्कि इस ग्रुप के 36 और प्रॉजेक्ट पहले से चल रहे हैं, जिसमें भी 1 बीएचके का कोई भी फ्लैट शामिल नहीं है.
अधिकारियों का कहना है कि अगर 2 बीएचके की बात करें तो 6 हजार फ्लैट के नक्शे पास हुए है. लेकिन इनमें 2 बीएचके 300 से भी कम है. एक भी फ्लैट 1 बीएचके का नहीं है. जबकि नोएडा में एक समय ऐसा था कि जब 1 बीएचके का कई प्रॉजेक्ट आते थे. ऐसे में साफ पता चलता है कि अब नोएडा में छोटे फ्लैट यानी की 1 और 2 बीएचके की डिमांड कम होती जा रही है.
जानें क्या है कारण
कहा जा रहा है कि कोरोना काल के बाद लोगों की जिंदगी में काफी बदलाव आया है. कोरोना के दौरान वर्क फ्रॉम होम का कल्चर ज्यादा चल गया है. जिसके बाद से ही लोग अपने घरों से काम कर रहे हैं. ऐसे में उनकी डिमांड अब छोटे घर नहीं बल्कि बड़े घर है. ताकि उन्हें काम करने में कोई दिक्कत ना हो. जिसके चलते 1 और 2 बीएचके फ्लैट के बजाए 3,4 और 5 बीएचके के फ्लैट चाहिए. जिसके बाद से साफ कहा जा सकता है कि इसमें कोई संदेह नहीं कि आने वाले समय में हाई रेंज वाली प्रोपर्टी की मांग और बढ़ेगी और छोटे घरों की मांग और बिक्री में और कमी आएगी.
Noida: ग्रेट वैल्यू डेवलपर्स बिल्डर ने अब नोएडा प्राधिकरण के पास 71 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं। इसके बाद 400 फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, अभी तक बिल्डरों ने 113 करोड़ रुपये जमा किए हैं। यह रकम कुल बकाये का 25 प्रतिशत है। इसके एवज में करीब एक हजार फ्लैटों की रजिस्ट्री शुरू हो गई है। गौरतलब है कि इससे पहले नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-77 के एक्सप्रेस जेनिथ सोसाइटी में 50 रजिस्ट्री कराकर अभियान की शुरुआत की। प्राधिकरण के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह ने इस तरह की व्यवस्था के साथ लगातार रजिस्ट्री अभियान लगातार चलाने का आह्वान किया था।
इंदिरा गांधी कला केंद्र में रोजाना होगी रजिस्ट्री
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम ने बताया कि सोमवार से इंदिरा गांधी कला केंद्र में रोजाना रजिस्ट्री होगी। यहां डेवलपर्स के अलावा फ्लैट खरीदारों को भी बुलाया जाएगा। प्राधिकरण की ओर से बिल्डरों से बातचीत कर रजिस्ट्री कराने की व्यवस्था की जाएगी। यहां रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
10 बिल्डर बुलाने पर भी नहीं आ रहे
बड़ी बात है कि शासन और प्राधिकरण की इतनी कवायद के बाद भी बड़े बिल्डर सामने नहीं आ रहे हैं। 10 बड़े बिल्डर प्राधिकरण के बुलाने पर भी नहीं आए। इन पर हजारों करोड़ का बकाया है। ऐसे बिल्डर अगर पैकेज साइन कर देते तो अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने का रास्ता साफ हो जाएगा. लेकिन बिल्डरों के न आने से फ्लैट खरीदार भी मायूस हुए हैं। बिल्डरों के संपर्क नहीं हो पा रहा है, ऐसे में प्राधिकरण इन पर कार्रवाई भी कर सकता है।
Gautam Buddha Nagar: लोकसभा चुनाव 2024 का बिगुल बज चुका है. अगर बात गौतमबुद्ध नगर सीट की करें तो यहां पर बीजेपी, सपा और बसपा ने अपने-अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. दूसरे चरण में यहां मतदान किया जाएगा. लेकिन इस दौरान यहां एक तरफ राजनीतिक पार्टीयों का वर्चस्व बढ़ा तो दूसरी तरफ इन दलों से नाखुश रहने वालों की संख्या भी बढ़ी है. चलिए अब हम आपकोआकड़ों में समझाते हैं कि कैसे नोटा साल दर साल लोगों की पंसद बनता गया.
नोएडा वासियों की बदली पसंद
एक सर्वे में दावा किया गया है कि पिछले दो लोकसभा चुनावों के बाद लोगों की पसंद काफी बदली है. इसमें सबसे ज्यादा नाखुश मतदाता नोएडा के हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में नोएडा विधानसभा क्षेत्र में 1879 लोगों ने नोटा को अपना मत दिया था. 2019 में यही संख्या करीबन दोगुनी रफ्तार से बढ़ गई और 3315 पर पहुंच गई. आलम यह था कि कोई भी उम्मीदवार नोटा के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाया था. लेकिन इस बार प्रशासन स्वीप के जरिए मतदाताओं को जागरूक करने की कोशिश कर रहा है. इसके बाद भी उम्मीदवारों की कोशिशल नोएडा वासियों को रास नहीं आ रही है.
नोटा का बटन दबाने की बड़ी वजह
दरअसल, नोएडा में सबसे बड़ा मुद्दा इन दिनों रजिस्ट्री का है. जिसके चलते कई लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उनका कहना है कि सरकार ने वादा किया था कि इस बार सभी फ्लैट मालिकों की रजिस्ट्री होगी. अमिताभ कांत की अनुशंसा के अनुसार इसे लागू किया गया. इसके तहत बिल्डरों को कुल बकाया का 25 फीसदी जमा करना था. लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सिर्फ 75 बिल्डर प्रोजेक्टों ने सहमति दी. पैसा करीब 200 करोड़ रुपये ही आया. जिस कारण सिर्फ 2000 रजिस्ट्रेशन ही हो सके.
जानकारी के मुताबिक, गौतमबुद्ध नगर में लगभग डेढ़ लाख फ्लैट खरीदारों का रजिस्ट्रेशन अब तक नहीं हुआ है. इतना ही नहीं बल्कि इतने ही लोगों को अब तक घर भी नहीं मिला है. इसके चलते उन्होंने कई बार प्रदर्शन भी किया. लेकिन कोई भी सुनवाई ठीक ठंग से नहीं हुई. इसलिए कहा जा सकता है कि नोएडा वासी फिर अपना गुस्सा नो रजिस्ट्री नो वोट या नोटा के जरिए प्रत्याशियों पर उतारेंगे.
Noida: उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर गौतम बुद्ध नगर में स्टांप राजस्व में वृद्धि करने एवं फ्लैट बायर्स के फ्लैटों की रजिस्ट्री करने को लेकर डीएम मनीष कुमार वर्मा ने संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में फ्लैट बायर्स और बिल्डर भी मौजूद रहे। बैठक में उपस्थित फ्लैट बायर्स फ्लैट बायर्स ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि पूरी धनराशि भुगतान करने के बावजूद भी बिल्डर्स के द्वारा फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं कराई जा रही है। जिस पर डीएम ने संबंधित बिल्डर्स से जवाब मांगा। बिल्डर्स के द्वारा बताया गया कि प्राधिकरण से ओसी न मिल पाने के कारण फ्लैटो की रजिस्ट्री करने में विलंब हो रहा है।
ओसी प्राप्त होने फ्लैट्स की रजिस्ट्री कराएं
जिलाधिकारी ने सभी बिल्डर्स को कहा कि प्राधिकरण के माध्यम से जिन फ्लेटों की रजिस्ट्री के लिए ओसी प्राप्त हो गई है, उनकी जल्द रजिस्ट्री कराए। अन्य फ्लैटों की ओसी प्राप्त करते हुए सभी फ्लैट बायर्स की फ्लैटों की रजिस्ट्री कराएं। इसके साथ ही बिल्डर्स को निर्देश दिए कि फ्लैट बायर्स का अनावश्यक रूप से शोषण न किया जाये। साथ ही बिल्डर्स एवं बायर्स से कहा कि आप अपनी समस्याएं स्टाम्प विभाग या हमारे सामने रख सकते हैं, ताकि आपसी समन्वय स्थापित करते हुए समस्याओं का निराकरण कराया जा सके।
कई सोसाइटियों की शिकायत पर भड़के डीएम
जिलाधिकारी ने बैठक में पारस टेयरा सेक्टर 137 नोएडा, पेन ओएसिस सेक्टर 70 नोएडा तथा नोएडा के लोटस ब्लू बर्ड बिल्डर्स, मैसर्स महागुण इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ग्रेटर नोएडा, मैसर्स मिक्सिंग ग्रीन मेनशन ग्रेटर नोएडा तथा मैसर्स लॉ रेजिडेंन्सिया ग्रेटर नोएडा की सर्वाधिक शिकायतें प्राप्त होने पर आंवटियों की समस्याओं का शीघ्र निस्तारण करने के बिल्डर्स को कड़े निर्देश दिए।
फ्लैटों की रजिस्ट्री में लापरवाही करने वाले बिल्डर्स के विरुद्ध करें कार्रवाई
वहीं, जिलाधिकारी ने स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्टांप राजस्व में अधिक से अधिक वृद्धि करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि संज्ञान में आ रहा है कि बहुत से बिल्डर्स के द्वारा बिना रजिस्ट्री कराये ही फ्लैट बायर्स को कब्जा दे दिया गया है, जिससे काफी स्टांप राजस्व की हानि हो रही है। स्टांप विभाग के अधिकारी अभियान चलाकर ऐसे बिल्डर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लायें। ताकि ऐसे सभी बायर्स के फ्लेटों की रजिस्ट्री कराते हुए स्टांप राजस्व में वृद्धि की जा सके। साथ ही निर्देश दिए कि बिल्डर्स एवं फ्लैट बायर्स की समस्याओं को लेकर प्रत्येक माह बैठक कराई जाए एवं संबंधित बिल्डर्स की उपस्थिति भी सुनिश्चित कराई जाये।
न्याय की अपेक्षा में एनसीएलएटी कोर्ट की ओर टकटकी लगाये हुए सुपरटेक के 26000 घर खरीदारों के भविष्य का फैसला फिर एक सप्ताह के लिए टल गया है। नोएडा से नॉर्थ आई, इकोसिटी, रोमानो और केप टाउन, ग्रेटर नोएडा से इकोविलेज 1, इकोविलेज 3, स्पोर्ट्स विलेज, यमुना एक्सप्रेसवे से अपकंट्री, गुरुग्राम से अराविले और हिलटाउन और बेंगलुरु से मिकासा सहित सुपरटेक लिमिटेड की ग्यारह परियोजनाओं से 26 हजार से अधिक घर खरीदारों के एनसीएलएटी के आदेश के द्वारा नियुक्त अधिकृत प्रतिनिधियों (एआर) ने घर खरीदारों के अधिकार को बचाने के लिए अपना प्रार्थना दाखिल किया था। जिस पर आज सुनवाई होनी थी। लेकिन सुनवाई टल गई है।
सुपरटेक बिल्डर की प्रताड़ना से मुक्ति दिलाने की मांग
यह NCLAT के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त आवेदन हैं। जिसमे 26000 से अधिक घर खरीदारों की सुपरटेक की प्रताड़ना से मुक्ति के प्रार्थना है। घर खरीदारों के प्रतिनिधिमंडल ने एनसीएलएटी के समक्ष आवेदन किया है। जिसमें एनसीएलएटी ने मांग कि है कि एनबीसीसी को घर खरीदारों के हित को ध्यान में रखते हुए समाधान प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दें। फोरेंसिक ऑडिट से एनबीसीसी को एक मजबूत योजना बनाने में मदद मिलेगी जो सभी हितधारकों के लिए फायदेमंद होगी। एनबीसीसी को आम्रपाली में आने वाली समस्याओं से बचने में मदद मिलेगी। सुपरटेक लिमिटेड के प्रबंधन की भागीदारी को पूरी तरह से हटा दिया जाए। मौजूदा घर खरीदारों के लिए कोई लागत वृद्धि नहीं की जाए।
10 साल से लड़ रहे हक की लड़ाई
पिछले दस वर्षों से ये घर खरीदार अपने घर की लगभग पूरी राशि का भुगतान करने के बाद भी असहाय, बेघर हैं। जो लोग अपना घर प्राप्त करते हैं, वे खराब बुनियादी ढांचे और उचित सुरक्षा और सुविधाओं की कमी के तहत रहने वाले आंशिक रूप से निर्मित समाजों में अराजकता और कुप्रबंधन का शिकार हैं।
एनसीएलएटी कोर्ट में ये रहे मौजूद
एनसीएलएटी कोर्ट में होम बायर के प्रतिनिधियों में इको विलेज 3 से चेतन कपूर एवम् आयोग रस्तोगी, इको विलेज 1 से गौरव कपिल एवम् विजय चौहान, हिलटाउन से कपिल दत्त शर्मा, केप टाउन से अरुण जैन, स्पोर्ट्स विलेज से अचिन मजूमदार, रोमानो से विक्रांत वर्मा, अपकंट्री से कैलाश चंद्र, इकोसिटी से राकेश यादव एवम् ज्योति रानी (अधिवक्ता) उपस्थित रहे. सुनील मैथ्यू, आकाश गोयल एवम् राहुल पाराशर वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा सम्मिलित हुए।
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