नोएडा से इस समय बड़ी खबर सामने आ रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एक ठग ने नोएडा अथॉरिटी के नाम पर अरबों रुपए का चूना लगाने की फिराक में था। ठग ने अथॉरिटी के नाम पर करीब तीन करोड़ रुपए ऐंठ लिए है। नामी बैंक और प्राधिकरण के दफ्तर में ठग की भनक लगते ही हड़कंप मच गया। मामले में नोएडा अथॉरिटी के सीईओ रितु माहेश्वरी ने ठग के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है। कोतवाली 58 पुलिस मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
3 करोड़ 90 लाख रुपए ऐंठे
ताया जा रहा है कि नोएडा प्राधिकरण के नाम पर 3 करोड़ 90 लाख रुपए ले लिए हैं। ठग ने जब और पैसों की मांग की तो ठगी का अहसास हुआ। इस मामले में नोएडा अथॉरिटी के आला अधिकारियों से जानकारी मांगी गई। सके बाद अथॉरिटी के अधिकारियों को फ्रॉड की जानकारी मिली। ठगी का पता चलने पर प्राधिकरण ने खाता फ्रीज कर दिया है। दरअसल, पूरा मामला एक एफडी (FD) से जुड़ा हुआ है। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी ने सेक्टर-58 कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच करवाने के आदेश दिए हैं। इस मामले में पुलिस जांच कर रही है।
नोएडा: MBBS में दाखिला दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सेक्टर-63 थाना पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस की मदद से आरोपी को 62 गोल चक्कर के पास से धर दबोचा। ठगी के आरोपी वैशाली पर 25 हजार रुपये का ईनाम भी घोषित था।
MBBS में दाखिले के नाम पर ठगी
बताया जा रहा है वैशाली अपने गैंग के दूसरे सदस्यों के साथ मिलकर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी करती थी। महिला और उसके गैंग के दूसरे सदस्यों पर कई छात्रों से करोड़ों के ठगी के आरोप हैं।
नोएडा प्राधिकरण से जुड़ी बड़ी ख़बर है, प्राधिकरण में बड़ी धांधली सामने आई है। प्राधिकरण ने एक शख्स के खाते में 200 करोड़ रुपये जमा करा दिए। घटना की जानकारी सामने के बाद प्राधिकरण के आलाधिकारियों के हाथ पांव फूल गये। जिस व्यक्ति के खाते में रकम ट्रांसफर की गई थी, उस व्यक्ति ने बैंक खाते से करोड़ों रुपए निकाल भी लिए। जानकारी के मुताबिक उस शख्स ने अकाउंट से 3 करोड़ 80 लाख रुपये निकाल लिए।

मिली भगत का अंदेशा
दरअसल, 200 करोड़ रुपये की FD कराने के बजाय प्राधिकरणकर्मियों ने 'बैंक ऑफ इंडिया' के एक खाताधारक के खाते में ये पैसे ट्रांसफर कर दिए। इस घटना के बाद से अधिकारियों के ऊपर कई प्रकार के सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या अधिकारियों की लापरवाही से ये हुआ है या फिर अधिकारियों और बैंककर्मियों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा किया गया था। जिसकी जानकारी सामने आ गई। साथ ही अगर किसी व्यक्ति के खाते में ये रकम गलती से चली गई तो ये प्राधिकरण कर्मियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करती है।
एक्शन में रितु माहेश्वरी
मामला सामने आने के बाद CEO रितु माहेश्वरी ने नोएडा सेक्टर-58 में अज्ञात प्राधिकरण अफसर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है। जिसके बाद पुलिस ने तुरंत रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच के मुताबिक प्राधिकरण के कुछ अफसरों से इसे लेकर पूछताछ भी की गई है।
नोएडा अथॉरिटी की एफडी बनाकर 3 करोड़ 90 लाख रुपये बैंक ऑफ इंडिया से निकालने वाले आरोपी को सेक्टर-58 पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी अब्दुल कादिर गुजरात का रहने वाला बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला
आरोपी अब्दुल कादिर ने सबसे पहले जरूरी कागजों की जालसाजी की, माने नकली कागज तैयार किए और खाता खुलवाने बैंक ऑफ इंडिया पहुंचा। 21 जुलाई को नोएडा अथॉरिटी ने खाता खुलवाने के लिए बैंक को एक लेटर जारी किया था और कहा था कि अथॉरिटी के तीन अधिकारियों के नाम खाता खुलवा दिया जाए। ये लेटर बैंक तक पहुंचा ही नहीं। बल्कि इसकी जगह नकली लेटर बैंक को दिया गया। इस आदमी ने बैंक में दावा किया कि वही नोएडा अथॉरिटी की तरफ से खाता खुलवाने के लिए साइनिंग अथॉरिटी है। इसके बाद इसी आदमी ने 30 जून को एक खाते में 3 करोड़ 80 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
लोन दिलाने के नाम पर ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले गैंग का फेस-3 थाना पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने गैंग के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिनके पास से 8 मोबाइल, एक लैपटॉप के साथ एक लाख 30 हजार रुपये बरामद किये गए हैं।
ऐसे करते थे फ्रॉड
इस गैंग के सदस्य पहले लोगों को कॉल कर अपने झांसे में लेते थे। ये ग्राहक को प्रतिष्ठित बैंक का कर्मी बताकर उनको अपने झांसे में लेते थे। जब लोगों को इन पर विश्वास हो जाता तो व्हाट्स एप पर एक क्यूआर कोड भेजते। फिर उनके साथ ऑनलाइन फ्रॉड करते थे।
फ्रॉड का खुलासा
जब फेस-3 थाना पुलिस को इत तरह के फ्रॉड की शिकायत मिली। तो पुलिस तुरंत एक्शन में आई। मैनुअल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की सहायता से साक्ष्य जुटाए गये। गैंग के तीनों आरोपी प्रकाश, आशीष और नवीन को ममूरा के पास से दबोच लिया गया। फिलहाल एक आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है। जिसकी तलाश जारी है।
नोएडा: फर्जी जीएसटी के जरिए करोड़ों के राजस्व का चूना लगाने वाले गैंग के फरार चल रहे तीन सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोंटी, मिंटू और महेश है। इनके पास से फर्जी टैक्स इनवॉइस दस्तावेज, 7 मोबाइल फोन, आधार कार्ड और दो लग्जरी कार बरामद की गई है।
फर्जी जीएसटी फॉर्म के जरिए सरकार को करोड़ों रुपए के चूना लगाने वाले गैंग के तीन और सदस्य गिरफ्तार @noidapolice @NoidaCrime pic.twitter.com/wuWm7zyFUY
— Now Noida (@NowNoida) July 10, 2023
कैसे करते थे फ्रॉड?
ये गैंग अज्ञात लोगों का पैन, आधार कार्ड और दस्तावेज लेकर फर्जी जीएसटी फॉर्म बनाते थे। जिसके बाद फर्जी फॉर्म के जरिए जीएसटी रिफंड लेकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाते थे।
गैंग के 15 सदस्य पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
इस गैंग के 15 सदस्य पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। जिसमें एक महिला भी शामिल है। गैंग के दूसरे सदस्यों की अभी भी तलाश जारी है।
ग्रेटर नोएडा (greater noida) से बड़ी खबर सामने आ रही है। जिला न्यायालय के आदेश पर बिसरख पर कोतवाली पुलिस ने सुपरटेक बिल्डर आरके अरोड़ समेत 12 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मुकदमा दर्जकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
एक के बाद एक सुपरटेक के फर्जीवाड़े
सुपरटेक (supertech) समूह के चेयरमैन (chairman) आरके अरोड़ा के एक के बाद एक फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं। आरके आरोड़ा फिलहाल दिल्ली जेल में बंद है। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने इस महीने की शुरुआत में गिरफ्तार किया था। अरोड़ा पर अरबों की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग (money laundering) जैसे गंभीर आरोप हैं।
पीड़ित की सुनवाई के बाद FIR के आदेश
कोर्ट ने पीड़िता की याचिका पर सुनवाई करते हुए FIR के आदेश दिए। जिसके बाद बिसरख कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
Noida: साइबर अपराधी ठगी करने का अलग-अलग तरीके अपना कर लोगों की कमाई हड़प ले रहे हैं। ऐसा ही कुछ मामला नोएडा में सामने आया है। यहां साइबर ठगों ने बिजली कनेक्शन काटने का डर दिखा कर लाखों रुपए एक व्यक्ति के अकाउंट से उड़ा दिए।
दरअसल नोएडा सेक्टर 39 में रहने वाले पूर्ण चंद्र जोशी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 6 मार्च को उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें बिजली बिल अपडेट करने के बात लिखी हुई थी। इसके साथ ही बिजली बिल अपडेट न होने पर कनेक्शन काटने की बात कही गई थी।
पूर्ण चंद जोशी ने बताया कि उसने जब मैसेज किए गए नंबर पर फोन किया तो जालसाज मैं थोड़ी देर में बिल अपडेट करने के बात कही और कुछ प्रक्रिया अपनाने को कहा। इसके साथ ही फोन पर बैंक से जुड़ी सारी जानकारी ले ली और फोन में एक ऐप डाऊनलोड करवाया। ऐप डाउनलोड करते ही एक एकाउन्ट से 2 लाख और दूसरे अकाउंट से 25 लाख रुपये कट गये। शिकायतकर्ता ने बताया जब वह दोबारा उस नंबर फोन किया तो बंद मिला। साइबर क्राइम थाने की प्रभारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर जाँच शुरू कर दी है।
Greater Noida: न्यू नोएडा के नाम पर एक बिल्डर द्वारा गोलमाल करने का मामला सामने आया है। सुशांत मेगापोलिस प्रोजेक्ट को सर्वोत्तम वर्ल्ड बिल्डर अपने नाम से बेच रहा है, जबकि प्रोजेक्ट उत्तम स्टील एंड एसोसिएट और अंसल हाईटेक टाउनशिप बिल्डर का है। इस पर उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने सुशांत मेगापोलिस प्रोजेक्ट के खरीदारों और निवेशकों का सावधान किया है। यूपी रेरा के अधिकारियों का कहना है कि यह नियमों के खिलाफ है। बिल्डर प्रोजेक्ट को न्यू नोएडा के नाम से बेच रहा है। जल्द ही सर्वोत्तम वर्ल्ड बिल्डर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस प्रोजेक्ट में हजारों खरीदार कब्जा मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
बिल्डर की ओर से किया जा रहा है झूठा प्रचार
यूपी रेरा के अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में सर्वोत्तम वर्ल्ड बिल्डर विभिन्न माध्यम पर सर्वोत्तम मेगापोलिस प्रोजेक्ट का प्रचार कर रहा है। बिल्डर ने प्रोजेक्ट को न्यू नोएडा में बताया है। बिल्डर ने प्रोजेक्ट के तीनों फेज के यूपी रेरा पंजीकरण संख्या भी दिए है। शिकायत मिलने पर जांच की गई तो पता चला कि विज्ञापन में दी गई पंजीकरण संख्या सुशांत मेगापोलिस प्रोजेक्ट की है। यह उत्तम स्टील एंड एसोसिएट और अंसल हाईटेक टाउनशिप बिल्डर का प्रोजेक्ट है। अगर सर्वोत्तम वर्ल्ड बिल्डर ने प्रोजेक्ट खरीद लिया है तो इसकी अनुमति यूपी रेरा से लेनी थी। साथ ही यूपी रेरा के पंजीकरण संख्या में अपना नाम शामिल कराना था, लेकिन बिल्डर ने ऐसा कुछ नहीं किया। यह यूपी रेरा के नियमों का उल्लंघन है।
अधिकारियों ने बताया कि बिल्डर इस तरह इन प्रोजेक्टों को बेच नहीं सकता है। यूपी रेरा ने सर्वोत्तम वर्ल्ड बिल्डर के विज्ञापन को भ्रामक और कपटपूर्ण करार दिया है और खरीदारों व निवेशकों को आगाह किया है। मकान और दुकान खरीदने से पहले यूपी रेरा के वेबसाइट पर किसी भी प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी लेने के बाद ही निर्णय लेने की अपील की गई है।
9 किमी दूर प्रोजेक्ट को बताया परी चौक के पास
सुशांत मेगापोलिस प्रोजेक्ट बोड़ाकी, रामगढ़ गांव और जीटी रोड के बीच स्थित है। यह परी चौक से नौ किमी दूर है, लेकिन सर्वोत्तम वर्ल्ड बिल्डर ने अपने प्रोजेक्ट को परी चौक के पास होने का दावा किया है। बिल्डर ने गोल्फ कोर्स, क्रिकेट स्टेडियम, टेनिस कोर्ट से लेकर तमाम सुविधाएं देने का भी दावा किया है।
फोन करने पर खुली पोल
यूपी रेरा के अफसरों ने बिल्डर का नाम सुनकर उनके हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर प्रोजेक्ट में निवेश करने की इच्छा जाहिर की। साथ ही पूछा कि सर्वोत्तम मेगापोलिस के नाम से बैंक ने ऋण देने से इन्कार कर दिया है, जबकि प्रोजेक्ट किसी और नाम से यूपी रेरा में पंजीकृत है। जिस पर बिल्डर के प्रतिनिधि ने कहा कि जिस तरह कार को बेचने में चेसिस नंबर नहीं बदलता, लेकिन मालिक बदल जाता है। उसी तरह प्रोजेक्ट का मालिक बदल गया है, लेकिन यूपी रेरा पंजीकरण संख्या वहीं पुराने बिल्डर का रहेगी।
दोनों बिल्डरों को कारण बताओं नोटिस जारी
यूपी रेरा सचिव प्रमोद कुमार ने बताया कि नियमों का उल्लंघन कर प्रोजेक्ट को बेचकर खरीदारों को ठगा जा रहा है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रोजेक्ट के दोनों बिल्डर और सर्वोत्तम वर्ल्ड बिल्डर को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। जवाब आने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी, फिलहाल खरीदारों को सतर्क कर दिया गया है।
Noida: GST विभाग को 15 हज़ार करोड़ का चूना लगाने के मामले में 7 आरोपियों को भगौड़ा घोषित कर दिया है। कोर्ट से वारंट जारी होने के बाद पेश नहीं होने पर इन आरोपियों को भगौड़ा घोषित किया गया। अब सभी सातों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का ईनाम भी घोषित कर दिया गया है।
अब तक 25 आरोपियों की गिरफ्तारी
इस मामले में अब तक एक महिला सहित 25 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जबकि आरोपियों के बैंक खातों में अभी तक 3 करोड़ रुपये सीज कराये गये हैं। बाकी आरोपियों की धड़ पकड़ के प्रयास जारी हैं। फरार चल रहे 7 आरोपियों को कोर्ट में पेश होने के लिए वारंट जारी किया गया। लेकिन ये आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुए। जिसके बाद फरार चल रहे सभी 7 आरोपियों को कोर्ट ने भगौड़ा घोषित कर दिया है। साथ ही इन पर ईनाम भी घोषित किया गया है।
सेल कंपनियों के जरिए लगाया जा रहा था चूना
दरअसल, जीएसटी विभाग को चूना लगाने के लिए इन आरोपियों ने बकायदा सेल कंपनियां बन ली थी। जिसके जरिए देश भर में जीएसटी विभाग को चूना लगाया जा रहा था। थाना सेक्टर-20 में सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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