ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय में 78वां स्वतंत्रता दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया। यूनिवर्सिटी कैंपस को तिरंगे झंडे से सजाया गया। देश के गौरवशाली इतिहास ,संस्कृति और उपलब्धियां को यादगार बनाने के लिए यूनिवर्सिटी में विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें विश्वविद्यालय के प्रबंधन, शिक्षक, सहयोगी कर्मचारी और छात्रों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ चांसलर पीके गुप्ता, वाइस चांसलर डॉ सिबराम खारा, प्रो वाइस चांसलर डॉ परमानंद, डॉ आरसी सिंह और पब्लिक रिलेशन विभाग के डायरेक्टर डॉ अजित कुमार, और यूनिवर्सिटी और हॉस्पिटल के सभी सीनियर मेंबर्स ने ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के साथ किया गया। एनसीसी की छात्राओं ने अपनी टुकड़ी के साथ परेड की।

चांसलर पीके गुप्ता ने देश के क्रांतिकारियों को याद करते हुए छात्रों को आजादी का महत्व समझाया और छात्रों को भारत का भविष्य बताते हुए, उन्हें अपने कर्तव्योंा का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। छात्रों ने हिंदी कविता और टॉक शो के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया।

मौजूदा समय की ज्वलंत समस्याओं से जुड़ा एक नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया। इस नुक्कड़ नाटक का उद्देश्य दर्शकों को देश की स्वच्छता और इस दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित करना था।
ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय ने शिक्षा मंत्रालय इनोवेशन सेल की ‘मेंटर मेंटी योजना’ के तहत नवाचार और उद्यमिता पर दो दिवसीय प्रशिक्षण और एक्सपोजर कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्घाटन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव भुवनेश कुमार और डॉ. अरविंद कुमार ने किया।
‘रचनात्मकता करती है सृजन, अवसर की पहचान, समस्या समाधान को प्रेरित करती’

शारदा विश्वविद्यालय के प्रो चांसलर वाईके गुप्ता ने संबोधन के दौरान इस बात पर जोर दिया कि उद्यमियों के लिए रचनात्मकता आवश्यक है, जो विचार सृजन, अवसर की पहचान, समस्या समाधान, नवाचार और विशिष्टीकरण को प्रेरित करती है। साथ ही कहा कि उद्यमिता एक नया व्यवसाय शुरू करने और उसे प्रबंधित करने की कला है, जिसमें अवसर की पहचान, सोच-समझकर जोखिम उठाना और बदलती बाजार मांगों को पूरा करने के लिए समाधान तैयार करना शामिल है। रचनात्मक उद्यमी जोखिम उठाते हैं, प्रभावी ढंग से संवाद करते हैं और लगातार सीखते और अनुकूलन करते हैं। रचनात्मकता उद्यमियों को चुनौतियों का सामना करने, अवसरों को भुनाने, नए समाधान बनाने और सफल उद्यम बनाने में सक्षम बनाती है। विश्वविद्यालय में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता गतिविधियों को मजबूत करने के लिए और अधिक सहायता प्रदान करने का पुरजोर आश्वासन दिया।
‘संस्थानों में उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देना कार्यक्रम का उद्देश्य’
डीन रिसर्च डॉ भुवनेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम उद्देश्य सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बीच अंतर को पाटना और शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देना है। छात्रों, शिक्षकों और अनुसंधान विद्वानों ने नवाचार और उद्यमिता के प्रति अपनी ताकत दिखाने के लिए उत्साहपूर्वक भाग लिया। विश्वविद्यालय उद्यमशीलता को बढ़ावा देने तथा छात्रों और शिक्षकों के बीच रचनात्मकता और उद्यम की संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस दौरान वाइस चांसलर डॉ सिबाराम खारा, शारदा लॉन्चपैड विभाग के डॉ. अमित सहगल और आईपीआर प्रमुख प्रोफेसर अविनाश कुमार समेत अन्य संकाय डीन और एचओडी मौजूद रहे ।
ग्रेनो के नॉलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय के एस्टेट विभाग व विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों ने इन्फो एज इंडिया के साथ मिलकर पौधारोपण कार्यक्रम किया गया। इस दौरान नीम, पीपल पिलखन, आम, चीकू, अनार, जामुन,बरगद ,गुलमोहर समेत 500 पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में फैकल्टी और विदेशी छात्रों ने हिस्सा लिया और पौधा लगाने के फायदे के साथ आसपास के लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया।

विश्वविद्यालय के चांसलर पीके गुप्ता ने कहा कि 'पौधे प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ हमें प्राण वायु ऑक्सीजन देते हैं। धरती पर लगातार पौधे कम होने पर पर्यावरण में जहरीली हवा बढ़ती जा रही है। इससे लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। एक पौधा हमें |ऑक्सीजन के साथ-साथ, फल, छाया और कीमती लकड़ी देता है। पौधारोपण से ग्लोबल वार्मिंग को कम किया जा सकता है। पौधे लगाने के साथ-साथ इनकी नियमित देखभाल भी जरूरी है। सालों से पौधारोपण को लेकर जागरूक किया जा रहा है। अब हमें पौधारोपण के साथ-साथ इसकी देखभाल पर भी ध्यान देना होगा। बहुत से पौधे देखभाल के बगैर नष्ट हो जाते हैं। इनका पालन-पोषण करना भी जरूरी है'।

वाइस चांसलर डॉ सिबाराम खारा ने कहा कि 'जिस प्रकार शरीर को पोषण के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए पेड़-पौधों की आवश्यकता होती है। पेड़-पौधे पर्यावरण की अशुद्धियों को सोख लेते हैं और हमें शुद्ध प्राणदायिनी वायु देते हैं। इसकी निरंतरता बनाए रखने के लिए हमें अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण का संरक्षण करना प्रत्येक मनुष्य की नैतिक जिम्मेदारी है। इसके लिए हमें आगे आना चाहिए और दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए। पर्यावरण के संरक्षण के लिए हमें अपने जीवन में एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए'।

इस दौरान प्रो चांसलर वाईके गुप्ता, रजिस्ट्रार विवेक गुप्ता, डॉ आरसी सिंह, डॉ रितू सूद, डॉ अजीत कुमार, आरडी साहे, डॉ प्रमोद कुमार, डॉ कपिल दवे , एडीसीपी अशोक कुमार समेत विभिन्न विभागों एचओडी और डीन मौजूद रहे।
ग्रेटर नोएडा में स्थित शारदा विश्वविघालय की छात्रा ने कांस्य पदक हासिल किया है। ओडिशा में हुई नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में शारदा विश्वविद्यालय की छात्रा अनन्या चौहान ने अंडर 30 सीनियर महिला कैटेगरी में कांस्य पदक जीता। चैंपियनशिप में लगभग 50 टीमों और 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।
अक्टूबर में नेपाल में दिखाएंगी ताइक्वांडो का जलवा
विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग के डीन डॉ प्रमोद कुमार और डायरेक्टर डॉ कपिल दवे ने बताया कि अनन्या चौहान विश्वविद्यालय से बीपीटी (बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी) की पढ़ाई कर रही है। इससे पहले राज्य स्तरीय ताइक्वांडो टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता था।
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अनन्या चौहान को जी-2 अंतर्राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भारत के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए चुना गया है, जो अक्टूबर 2024 में नेपाल के पोखरा में होने वाली है। शारदा विश्विद्यालय के प्रो वाइस चांसलर डॉ परमानंद ने खेल विभाग के स्टाफ को बधाई दी और कहा कि अन्नया चौहान इस यात्रा में उनके कौशल दृढ़ता और योगदान का एक उल्लेखनीय प्रमाण है।
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