मोदी कैबिनेट की बुधवार रात हुई बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। साथ ही कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में किसानों के हक में एक अहम फैसला लिया गया। बैठक में गन्ना खरीद की कीमत में आठ फीसदी की बढ़ोतरी करने की मंजूरी दे दी गई है। कैबिनेट ने गन्ना खरीद की कीमत में आठ फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने गन्ना खरीद की कीमत को 315 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 340 रुपये प्रति क्विंटल करने को मंजूरी दी है। इस तरह गन्ने की कीमत 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ी है।
’10 सालों से सरकार किसान कल्याण का किया काम’
कैबिनेट की मीटिंग खत्म होने के बाद ब्रीफिंग देते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा ’कि मोदी सरकार ने बीते 10 सालों से किसान कल्याण के लिए काम किया है। 2014 से पहले किसानों को खाद के लिए भी सड़कों पर उतरना पड़ता था। उस समय गन्ने की कीमत सही नहीं मिलती थी, लेकिन मोदी सरकार ने इस दिशा में बेहतरीन काम किया है।’
देश के 5 करोड़ गन्ना किसानों को होगा फायदा
आपको बता दें कि आमतौर पर सरकार जून या इसके बाद FRP तय करती है। सरकार ने शुगर सीज़न 2024-25 के पहले ही दाम तय कर दिए हैं। पिछली बार गन्ने की फसलों के लिए एफआरपी 315 रुपये तय की गई थी, जिनका रिकवरी 10.25 था। इस फैसले से देश के 5 करोड़ गन्ना किसानों को फायदा होगा।
मोदी कैबिनेट ने बुधवार को देश में ‘एक देश एक चुनाव’ को मंजूरी दे दी। वन नेशन वन इलेक्शन के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चेयरमैन बनाकर एक कमेटी बनाई गई थी। बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने अपनी रिपोर्ट मोदी कैबिनेट को दी थी, जिसके बाद उसे मंजूर कर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा?
देश में वन नेशन वन इलेक्शन को मोदी कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हाई लेवल कमेटी की सिफारिशों को मंजूर कर लिया गया है। 1951 से 1967 तक देश में एक साथ ही चुनाव होते थे। हम अगले महीनों में इसपर आम सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। 'एक देश एक चुनाव' पर समिति ने 191 दिन तक काम किया और 21,558 लोगों से राय ली। 80% लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें 47 में से 32 राजनीतिक दल भी शामिल हैं। समिति ने पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों, चुनाव आयुक्तों और राज्य चुनाव आयुक्तों से भी बात की।
दो चरणों में होंगे चुनाव
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे बताया कि 'एक देश एक चुनाव' दो चरणों में होगा। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव और दूसरे चरण में स्थानीय निकाय चुनाव यानी कि पंचायत और नगरपालिका के चुनाव होंगे। राजनीति और कानून के जानकारों का कहना है कि अब केंद्र सरकार इसे शीतकालीन सत्र में संसद में लाएगी। आपको बता दें, ये संविधान संशोधन वाला बिल है और इसके लिए राज्यों की सहमति भी जरूरी है। भारतीय जनता पार्टी ने साल 2024 के आम चुनाव में 'एक देश एक चुनाव' का वादा किया था।
वन नेशन वन इलेक्शन कैसे होता है लागू?
'एक देश एक चुनाव' को सरल शब्दों में समझें, तो एक ही समय में केंद्र और राज्य के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए सभी भारतीय लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान करेंगे। इसके लागू होते ही नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों के चुनाव भी साथ में ही होंगे। मौजूदा समय में केंद्र सरकार का चयन करने के साथ-साथ एक नई राज्य सरकार के लिए भी लोग मतदान करते हैं। एक देश एक चुनाव लागू होते ही संसाधनों की भी बचत होगी।
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