मध्य प्रदेश पुलिस को साइबर ठगी के मामले में बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. दरअसल इंदौर में पुलिस ने लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े गैंग का खुलासा किया है. पकड़े गए गिरोह के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 34 बैंक खातों को भी पुलिस ने फ्रीज कर दिया है. इसके अलावा पुलिस को आरोपियों के पास से 1400 सिम कार्ड भी बरामद हुए हैं.
सॉफ्टवेयर इंजीनियर महिला से ठगी का मामला
साइबर धोखाधड़ी के मामलों में डिजिटल अरेस्ट एक नया तरीका है. जिसमें धोखेबाज ऑडियो या वीडियो कॉल करके खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसी के अधिकारियों के रूप पेश करते हैं. इसके बाद लोगों को केस से बचाने के नाम पर पैसों की ठगी करते हैं. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने कहा कि आरोपी ने करीब 5 महीने पहले एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर महिला से संपर्क कर ड्रग्स और फर्जी पासपोर्ट के मामले में फंसाने की धमकी दी. गिरोह के एक सदस्य ने पीड़ित महिला को ये कहकर धोखा दिया कि उसे डिजिटल अरेस्ट किया गया है. अगर वो इससे बचना चाहती है, तो अलग-अलग बैंक खातों में 12 लाख रुपये ट्रांसफर करने होंगे. अनजाने में फंसने के डर से महिला ने ठगों द्वारा दिए गए अकाउंट नंबर पर रुपये ट्रांसफर कर दिए वहीं रुपये ट्रांसफर करने के बाद महिला को एहसास हुआ कि उसे ठग लिया गया है.
लगभग 34 बैंक खाते और 1,400 सिम कार्ड बरामद
अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि 'जांच के दौरान, पुलिस को गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए गए लगभग 34 बैंक खाते और 1,400 सिम कार्ड बरामद हुए हैं. उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया है कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल चार मोबाइल फोन में किया गया था और यह एक संगठित गिरोह है.' गिरोह के एक सदस्य को पहले राजस्थान के झालावाड़ से गिरफ्तार किया गया और उसके पास से 2 लाख रुपये बरामद किए गए. वहीं इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों को पकड़ने के लिए जांच चल रही है.
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