हाथरसः सिंकदरामऊ के रतिभानपुर मुगल गढ़ी जिसके सत्संग में हादसे का जिम्मेदार भोले बाबा गजब की शान शौकत में रहता है। कभी पुलिस विभाग में नौकरी करने वाला सूरजपाल आज का नाम साकार विश्व हरि उर्फ भोले बाबा है। बाबा मूल रूप से कासगंज जिले की पटियाली के बहादुरनगर के रहने वाला है। बाबा बनने से पहले वह पुलिस के गुप्तचर विभाग में नौकरी करता था। बाद में नौकरी छोड़ दी और कथावाचक बनकर भक्तों की सेवा का काम शुरू किया। सूरजपाल अपनी पत्नी के साथ सत्संग करते हैं और पटियाली वाले साकार विश्व हरि बाबा के नाम से जाने जाते हैं. इसके सत्संग में हजारों की संख्या में लोग आते हैं।
कोरोना काल से चर्चा में आए बाबा
कोरोना के समय भी भोले बाबा का सत्संग कार्यक्रम विवादों में आया था. तब उन्होंने अपने सत्संग के लिए सिर्फ 50 लोगों के शामिल होने की अनुमति मांगी थी. लेकिन, बाद में 50 हजार से ज्यादा लोग उनके सत्संग में आए थे। भारी भीड़ के चलते प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई थी। इस बार भी कहा जा रहा है कि कार्यक्रम के लिए जितने लोगों के शामिल होने की बात प्रशासन को बताई गई थी, उससे ज्यादा लोग जुट गए थे।
अन्य राज्यों में प्रभाव
भोले बाबा ने अपना वर्चस्व एटा, आगरा, मैनपुरी, शाहजहांपुर, हाथरस समेत कई जिलों में ही नहीं इसके अलावा पश्चिमी यूपी से सटे मध्य प्रदेश और राजस्थान, हरियाणा के कई जिलों में इनके समागम लगते हैं. भोले बाबा के ज्यादातर भक्त गरीब तबके हैं, जो लाखों की संख्या में सत्संग सुनने पहुंचते हैं. साकार विश्व हरि भले ही खुद को भगवान का सेवक कहते हैं, लेकिन उनके भक्त बाबा को भगवान का अवतार बताते हैं।
सूट-बूट में रहता है बाबा
बाबा पुलिस के तौर-तरीकों से परिचत है। वर्दी धारी स्वयंसेकों की लंबी-चौड़ी फौज खड़ी करने में यह काफी मददगार साबित हुआ। बाबा आम साधु-संतों की तरह गेरुआ वस्त्र नहीं पहनता। बहुधा वह महंगे गॉगल, सफेद पैंटशर्ट पहनकर किसी फिल्मी हीरो की तरह रहता है। अपने प्रवचनों में बाबा पाखंड का विरोध भी करता है। चूंकि बाबा के शिष्यों में बड़ी संख्या में समाज के हाशिए वाले, गरीब, दलित, दबे-कुचले लोग शामिल हैं। उन्हें बाबा का पहरावा और यह रूप बड़ा लुभाता है। महिला भक्तों में बाबा का खासा क्रेज दिखाई देता है। अनुयायी कहते हैं कि बाबा साक्षात हरि अर्थात विष्णु के अवतार हैं। कई शिष्यों का मानना है कि बाबा के पास दैविक शक्तियां हैं। वह कुछ भी कर सकते हैं।
बाबा की अपनी फौज संभालती है ट्रैफिक का मोर्चा
साकार हरि की अपनी फौज है। हल्के गुलाबी रंग के पैंट-शर्ट, पुलिस बेल्ट, हाथ में लाठी और सीटी लेकर हजारों की संख्या में इनके स्वयंसेवक कार्यक्रम स्थल और सड़कों पर चप्पे-चप्पे पर तैनात रहते हैं। एक नजर में देखने पर यह होमगार्ड जैसा कोई अनुशासित बल दिखाई देता है। बड़ी संख्या में महिला स्वयंसेवक भी तैनात रहती हैं। इनकी भी वर्दी होती है। बाबा की यह लंबी-चौड़ी फौज ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर, पानी और दूसरे इंतजाम देखती है। कार्यक्रम स्थलों पर बाबा की फौज का यह गणवेश आप कई काउंटरों से बिकते देख सकते हैं। कहा जाता है, इसे खरीदने की अनुमति उन्हीं लोगों की होती है जिसे बाबा चाहते हैं। कई बार यह स्वयंसेवक आम आदमी को कार्यक्रम स्थल के पास से गुजरने से रोक भी देते हैं। प्रशासन भी इन स्वयंसेवकों के भरोसे शायद उतना ध्यान नहीं देता जितना उसे देना चाहिए। शायद प्रशासन की उपेक्षा और बाबा के स्वयंसेवकों पर जरूरत से ज्यादा भरोसे ने हाथरस जैसे बड़े हादसे को जन्म दिया है। हादसे से हाथरस से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक हड़कंप मचा हुआ है।
साकार हरि: 30 बीघे में भोले बाबा का आश्रम
बहादुरनगर में 30 बीघे में भोले बाबा का आश्रम तो पांच बीघे में अनुयायी विश्राम गृह बना है। बाबा के पास खुद के सेवादारों की आर्मी भी है। जिले में कोई दूसरा ऐसा पूर्ण निर्माण का आश्रम नहीं है। आश्रम पर अनुयायियों के रुकने के लिए 5 बीघा जमीन में विश्राम घर बना हुआ है। प्रतिदिन ही बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं और पर्वों के दिन में तो लोगों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सत्संग हो या न हो कोई कार्यक्रम हो या न हो लेकिन भक्तों पर इसका कोई असर नहीं। वे आते हैं और माथ टेकते हैं।आश्रम और आश्रम के आस पास माहौल भक्ति का रहता है। वैसे तो तमाम गांव के लोग घर के बाहर चापराई पर ही अस्थायी रूप से खाने पीने के सामान की दुकान लगा लेते हैं, लेकिन मंगलवार को पानी व खाद्य पदार्थ की दुकानें गांव के लोग सजाते हैं। जिससे बाबा के आश्रम में आने वाले अनुयायियों के द्वारा की जाने वाली खरीद से ग्रामीणों की आमदनी हो जाती है।
हाथरस के फुलराई गांव में गांव में मंगलवार को साकार हरि बाबा उर्फ भोले बाबा के सत्संग के बाद मची भगदड़ में 124 लोगों की जान जा चुकी है। हाथरस हादसे का जिम्मेदार भोले बाबा का अतीत भी काले कारनामों से भरा है। भोले बाबा बनने से सूरजपाल जाटव पुलिस में सिपाही था। लंबे समय तक एलआईयू में तैनाती थी। इसी दौरान यौन शोषण का आरोप लगा था और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इसी बीच नौकरी भी चली गई थी। लेकिन भोले बाबा खुद को स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने की बात कहता है। जेल में रहने के दौरान पता नहीं कौन सा गुरु मंत्र मिला कि बाहर आकर सूरजपाल सत्संग करने लगा। इसके भजन, प्रवचन की शुरुआत घर से ही हुई थी। इसके बाद देखते ही देखते इसके चाहने वालों की भीड़ बढ़ने लगी और तब घर से निकल कर सत्संग का सिलसिला अड़ोस-पड़ोस में, फिर खुली जगहों में, पंडालों में और अलग-अलग राज्यों में शुरू हो गया।
बेटी को जिंदा करने की कोशिश की थी
नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा की कोई संतान नहीं है। इसलिए इसने 24 साल पहले अपने साले की बेटी स्नेहलता को गोद लिया था। जिसकी गंभीर बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। लेकिन इसके अनुयायी को विश्वास था कि वो जिंदा कर देगा। इसलिए शव को दो दिन तक जिंदा करने की कोशिश की थी। हालांकि हंगामा होने के बाद पुलिस ने भोले बाबा समेत 7 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके अलावा इस पर 5 मुकदमे दर्ज हैं।
हाथरस में बाबा की 'रंगोली' के बुरादे ने ले लीं सवा सौ जानें
हाथरस में हुई घटना के पीछे बड़ी जानकारी सामने आई है। स्थानीय पुलिस की खुफिया यूनिट को मिली जानकारी के मुताबिक बाबा की रंगोली के बुरादे को लेने के चक्कर में इतनी मौतें हो गईं। हाथरस में हुई सोमवार की घटना के पीछे अहम और बड़ा खुलासा हुआ है। घटना के 24 घंटे के भीतर खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जानकारी के मुताबिक, भगदड़ मचने से हुई सवा सौ मौतों के पीछे सत्संग स्थल पर बनाई गई वह 'रंगोली' है, जिस पर चलकर आरोपित बाबा को निकलना था।
दरअसल, पंडाल से निकलने के बाद बाबा के भक्तों का हुजूम उस रंगोली को बाबा का आशीर्वाद मानकर दंडवत प्रणाम कर रंगोली के बुरादे को अपने साथ ले जाता है। इस दौरान एक साथ हजारों हजार लोग रंगोली लेने के लिए दंडवत हुए और फिर संभलने का मौका नहीं मिला। जानकारी के मुताबिक, सवा दो टन बुरादे से रंगोली तैयार हुई थी। इस प्रयोजन की जानकारी स्थानीय पुलिस को भी आयोजकों ने नहीं दी थी। फिलहाल इस पूरी जानकारी को उत्तर प्रदेश शासन के अधिकारियों से साझा किया जा चुका है। हाथरस में हुई घटना के पीछे बड़ी जानकारी सामने आई है।
स्थानीय पुलिस की खुफिया यूनिट को मिली जानकारी के मुताबिक बाबा की रंगोली के बुरादे को लेने के चक्कर में इतनी मौतें हो गईं। जानकारी के मुताबिक, हर सत्संग कार्यक्रम में नारायण साकार उर्फ भोले बाबा के रास्ते में तकरीबन 200 मीटर की रंगोली बनाई जाती है। जानकारों का कहना है कि यह रंगोली सत्संग के बाद नारायण साकार उर्फ भोले बाबा के जाने का रास्ता होता है। नारायण साकार के भक्तों में मान्यता है कि जब वह इस रंगोली से चलकर निकल जाते हैं तो यह रंगोली बेहद पुण्य हो जाती है। नारायण साकार के कार्यक्रम में शामिल हाथरस में मिले देवतादीन कहते हैं कि इस रंगोली के बुरादे को लोग दंडवत कर प्रणाम करते हैं और उसका थोड़ा हिस्सा अपने घर ले जाते हैं। वह कहते हैं कि मान्यता है कि इस बुरादे से घर में बीमारियां भी दूर होती हैं और भूत प्रेत का डर नहीं सताता है।
श्मशान बन गया सत्संग स्थल
यूपी के हाथरस में सत्संग में मची भगदड़ में 124 लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। सत्संग का आयोजन 'भोले बाबा' उर्फ बाबा नारायण हरि के संगठन ने किया था। मरने वालों में सात बच्चे और 100 से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। दर्दनाक हादसे के बाद सत्संग स्थल श्मशान घाट जैसा बन गया। यहां लाशों का ढेर लगा था। सड़क किनारे खेत में पानी भरा था। कीचड़ हो रही थी भागने के चक्कर में श्रद्धालु पानी और कीचड़ में फंसकर गिर गए। इसके भीड़ में दबते चले गए। महिलाओं-बच्चों के मुंह-नाक में कीचड़ भर गया था। भीड़ में कुचलने और दम घुटने से अधिक लोगों की मौतें हुईं हैं। खेतों में लोगों के पैरों के निशान भयावह मंजर बयां कर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों के चप्पल-सैंडल, पर्स और मोबाइल बिखरे पड़े थे। सड़क किनारे लगे चप्पल-सैंडल के ढेर को लोग देखते हुए दिखाई दिए।
क्या खुफिया तंत्र ने रिपोर्ट दी थी
मंगलवार को आयोजित सत्संग में हुई इस घटना के बाद बड़ा सवाल यह कि आखिर इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है? हालांकि सूत्र खुफिया तंत्र की ओर से किसी दुर्घटना के अंदेशे की रिपोर्ट देने का दावा कर रहे हैं। मगर यह बात हजम नहीं हो रही और इस पूरी घटना में खुफिया तंत्र फेल नजर आया है। सूत्रों का दावा है कि खुफिया तंत्र ने सवा लाख तक लोगों के जमा होने का अंदेशा जताया। अगर यह रिपोर्ट दी गई थी तो फिर उसके अनुसार इंतजाम क्यों नहीं किए गए। सूत्र बताते हैं कि एलआईयू व अन्य खुफिया जांच एजेंसियों द्वारा अपने उच्चाधिकारियों को सत्संग भवन को लेकर भेजी गई रिपोर्ट में कहा था कि सत्संग कार्यक्रम में सवा लाख से अधिक भीड़ जुटने की संभावना है। हादसे के बाद बड़ा सवाल है उठता है कि आखिर एलआईयू और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा पहले ही अपनी रिपोर्ट में हादसे को लेकर पहले ही सतर्क किया गया था, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदारी अधिकारियों ने इसे लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया, आखिर इतने बड़े हादसे के लिए कौन जिम्मेदार होगा?
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
हाथरस भगदड़ मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर कर मांग की गई है कि मामले की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति नियुक्त की जाए।
17 दिन से हो रहीं थी तैयारियां, पांच दिन पहले आ गईं थी MP-राजस्थान से सैकड़ों बसें
बाबा के सत्संग की 17 दिनों से तैयारी चल रही थी। 2 जुलाई को होने वाले कार्यक्रम में 26 जून से ही मध्य प्रदेश राजस्थान और आसपास के राज्यों की तकरीबन 500 बसें पहले ही पहुंच चुकी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिकंदराराव से गुजरने वाली जीटी रोड पर जिस तरीके का मजमा लगना शुरू हुआ था उससे अंदाजा था कि यहां पर कार्यक्रम बहुत बड़ा होने वाला है। बावजूद इसके पुलिस प्रशासन ने ना इसकी गंभीरता समझी और ना ही इस दिशा में कोई बेहतर प्रबंध किया। घटनास्थल पर मौजूद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों ने सरकार और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।सिकंदराराव के रहने वाले ओमवीर सिंह कहते हैं कि जब उनके शहर में पहले से ही इतनी बड़ी तैयारी के साथ कार्यक्रम आयोजन की भूमिका बनाई जा रही थी। तो प्रशासन को इस बात का अंदाजा क्यों नहीं हुआ कि कहीं कोई बड़ी दुर्घटना ना हो जाए।
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