बलिया में दलालों और घूसखोरों के खिलाफ सीएम योगी के एक्शन के बाद नोएडा के अधिकारी भी सतर्क हो गए हैं। इसी कड़ी में आज डीएम मनीष वर्मा और डीसीपी राम बदन सिंह ने एआरटीओ ऑफिस और रजिस्ट्री विभाग में औचक निरीक्षण किया। जिससे दोनों विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। इस दौरान करीब एक घंटे तक दोनों अधिकारियों ने ऑफिस में कर्मचारियों से पूछताछ की। साथ ही वहां अपने काम के लिए पहुंचे लोगों से भी बातचीत की।

डीएम ने एआरटीओ को दिए निर्देश
मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि डीएम को शिकायत मिली थी कि एआरटीओ डिपार्टमेंट में दलालों द्वारा काम कराया जा रहा है। डीएम ने यहां आए लोगों से बातचीत की। इसके बाद काउंटर पर जाकर काम कर रहे कर्मचारियों और लाइन में लगे लोगों से बात की।लोगों ने बताया कि यहां पर समय से काम हो रहा है। हालांकि कुछ एक जगह विलंब होने पर लोगों को परेशानी हो रही थी। ऐसे में डीएम ने एआरटीओ सिया राम को निर्देशित किया कि किसी प्रकार से आम लोगों को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यहां लर्निंग लाइसेंस सेंटर पर भी गए। कई फाइलों को देखा। लोगों को लाइसेंस बनवाने के लिए जो स्लॉट मिला था उस हिसाब से काम हो रहा था कि नहीं ये भी देखा गया। इस दौरान उन्होंने पार्किंग में वाहनों की व्यवस्थित तरीके से खड़ा करने के लिए भी कहा।
शिकायत मिलने पर होगी कड़ी कार्रवाई- डीएम
एआरटीओ ऑफिस के निरीक्षण के बाद दोनों अधिकारी रजिस्ट्री विभाग गए। यहां रजिस्ट्री कराने आए लोगों से बातचीत की। साथ ही उनसे भी दलाल के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि कोई भी कर्मचारी नियम के विरुद्ध काम करे तो उसकी शिकायत की जाए। इसमें किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। दोनों ही अधिकारी करीब एक घंटे तक एआरटीओ और रजिस्ट्री विभाग में रुके।
अधिकारियों को साफ-सफाई कराने के दिए निर्देश
डीएम और डीसीपी ने निबंधन विभाग में फैली गंदगी को देखकर निर्देश दिए कि यहां तत्काल साफ-सफाई कराई जाए। यहां आम लोगों से लेकर खास सभी आते हैं। परिसर को साफ सुथरा रखना हमारा काम है। इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों की वर्किंग शैली को देखा।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने एक जून तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी। प्रवर्तन निदेशालय के नौ समन के बाद केजरीवाल की 21 मार्च को गिरफ्तारी हुई थी। करीब 50 दिन बाद उन्हें राहत मिली है। उन्हें यह राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तें लगाईं हैं, जिनका उन्हें पालन करना होगा। आपको बता दें कि केजरीवाल दिल्ली शराब नीति मामले में 1 अप्रैल (39 दिन) से न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में थे। इससे पहले 11 दिन वे ED की हिरासत में रहे। अदालत ने आज दोपहर 2 बजे एक लाइन में फैसला सुनाया। हालांकि, उनके वकील ने 5 जून तक की रिहाई का अनुरोध किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया एक जून को खत्म हो जाएगी।
मैं तानाशाही के खिलाफ संघर्ष कर रहा हूं- केजरीवाल
रिहाई के बाद केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं से कहा, 'आप से निवेदन है हमें सबको मिलकर देश को तानाशाही से बचाना है। मैं तन-मन-धन से लड़ रहा हूं। तानाशाही के खिलाफ संघर्ष कर रहा हूं। आज आपके बीच आके अच्छा लग रहा है। कल सुबह 11 कनॉट प्लेस हनुमान जी के मंदिर में मिलेंगे। हनुमान जी का आशीर्वाद लेंगे। 1 बजे पार्टी ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।'
क्या था अंतरिम जमानत का आधार
कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल को 22 दिन के लिए अंतरिम जमानत देने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा, 'अगस्त 2022 में ED ने केस दर्ज किया था। केजरीवाल को मार्च 2024 में गिरफ्तार किया गया। डेढ़ साल तक वे कहां थे? गिरफ्तारी बाद में या पहले हो सकती थी। 22 दिन इधर या उधर से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए।' ईडी ने चुनाव प्रचार के आधार केजरीवाल को अतंरिम जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए कोर्ट में कहा कि ऐसा कोई पूर्व उदाहरण नहीं है।
नोएडा के सेक्टर 24 थाना क्षेत्र के भारतीय खाद्य निगम के दफ्तर के बाहर मजदूर ने धरना दिया. ये विरोध प्रदर्शन गोंडा डिपो के पूर्व कर्मचारियों ने किया. दलित सेना के नेतृत्व में भारतीय खाद्य निगम के गेट के बाहर सैकड़ों पूर्व कर्मचारियों ने धरना दिया. मजदूर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं
विभाग पर मजदूर लगा रहे गुमराह करने का आरोप
धरने पर बैठे मजदूरों का आरोप है कि विभाग ने 456 मजदूरों को बाहर कर दिया गया था. जब मजदूरों को निकाला गया था. उस समय मजदूरों को वापस रखने का आश्वासन भी दिया गया था लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ. पुराने मजदूरों की जगह नए लोगों को रख लिया गया है. मजदूरों ने खाद्य विभाग पर गुमराह करने का भी आरोप लगाया. बताया जा रहा है कि 2011 में गोंडा डिपो में रंगाई पुताई के नाम पर 456 मजदूरों को छुट्टी पर भेजा दिया गया था. उसके बाद फिर इन मजदूरों को दुबारा वापस नहीं बुलाया गया. धरने पर बैठे मजदूरों का कहना है कि धरना तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा.
ग्रेटर नोएडा में आईआईटीजीएनल के इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप में निवेश के लिए सिंगापुर ने भी रुचि दिखाई है। सोमवार को सिंगापुर के एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने आईआईटीजीएनएल की इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप का जायजा लिया। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस और एसीईओ प्रेरणा सिंह ने प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। एनआईसीडीसी के सीईओ रजत कुमार सैनी भी प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण के दौरान साथ रहे। श्रीलक्ष्मी वीएस और प्रेरणा सिंह ने सिंगापुर प्रतिनिधिमंडल को इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप और ग्रेटर नोएडा के इंफ्रास्ट्रक्चर से अवगत कराया।

सिंगापुर के निवेशकों निवेश कराने की इच्छा जाहिर की
प्रतिनिधिमंडल ने टाउनशिप में सिंगापुर के निवेशकों से औद्योगिक निवेश कराने की इच्छा जाहिर की। सिंगापुर सरकार के व्यापार और उद्योग मंत्रालय के सीनियर डायरेक्टर फ्रांसिस चोंग के नेतृत्व में सात सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में सिंगापुर की दो मल्टीनेशनल कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। इसके साथ ही औद्योगिक यूनिट लगाने के लिए प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में बताया गया। टाउनशिप में उपलब्ध औद्योगिक भूमि की जानकारी दी गई।

टाउनशिप में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि वे सिंगापुर के निवेशकों को टाउनशिप में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, जिससे टाउनशिप में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद है। गौरतलब है कि दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत आईआईटीजीएनएल की तरफ से इंटीग्रेटेड टाउनशिप करीब 750 एकड़ में इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप बसाई गई है। इस टाउनशिप में उद्यमी तत्काल प्लांट लगाकर काम शुरू कर सकते हैं। इस टाउनशिप में वर्क टू साइकिल, 24 घंटे बिजली, एलईडी लाइट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। यह टाउनशिप सीसीटीवी से भी लैस होगी। इस टाउनशिप की सुरक्षा के लिए इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम बनाया जाएगा।

निवेशकों को हर संभव सहयोग देने की हो रही कोशिश
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ और आईआईटीजीएनएल के प्रबंध निदेशक एनजी रवि कुमार ने कहा है कि इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप और ग्रेटर नोएडा, दोनों शहरों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना पहली प्राथमिकता है। निवेशकों को हर संभव सहयोग देने की कोशिश की जा रही है। औद्योगिक निवेश से न सिर्फ इन दोनों शहरों का विकास होगा। बल्कि इस क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के तमाम अवसर भी उपलब्ध होंगे।
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