New Dellhi: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव को लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में बड़ी राहत मिली है। तेजस्वी यादव, लालू यादव और राबड़ी देवी बुधववारर को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश होकर जमानत लेने पहुंचे । लालू का परिवार विशेष सीबीआई जज गीतांजलि गोयल की कोर्ट में पेश हुए। राउज एवेन्यू कोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर तीनों को जमानत दे दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।
गौरतलब है कि सीबीआई द्वारा 3 जुलाई को दाखिल की गई दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर 23 सितंबर को संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को समन जारी कर 4 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। कोर्ट ने तेजस्वी के अलावा लालू यादव और राबड़ी देवी सहितसभी 17 आरोपियों को भी समन जारी किया था।
उल्लेखनीय है कि 22 सितंबर को सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि केंद्र सरकार से मामले में आरोपपी रेलवे के तीन पूर्व अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिल गई है। इससे पहले 12 सितंबर को जांच एजेंसी ने कोर्ट को पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ मुकदमा चलाने की केंद्र सरकार से अनुमति मिलने की जानकारी दी थी। सीबीआइ ने तीन जुलाई को दायर दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे व बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पश्चिम मध्य रेलवे (डब्ल्यूसीआर) के तत्कालीन जीएम, डब्ल्यूसीआर के दो सीपीओ सहित 17 लोगों को आरोपित बनाया है।
बिहार में राज्यसभा चुनाव बेहद करीब हैं. ऐसे में राजनीतिक पार्टियों का सक्रिय होना भी लाजमी है. सभी दलों ने कमर-तोड़ तैयारियां शुरू कर दी हैं. ऐसे में सियासत गलियारे में तहलका मचा देने वाली भी खबर सामने आ रही हैं. जहां बहुरानी की एंट्री की बात की जा रही है. दरअसल 27 फरवरी को 6 राज्यसभा सीटों पर बिहार में वोटिंग होनी है. जहां लालू प्रसाद यादव की बहूरानी यानि की राजश्री चुनावी मैदान में उतरने वाली हैं. इस खबर के बाद से सियासी गलियारों में खलबली मच गयी है. बताया जा रहा है कि, राज्यसभा की दो सीटें खाली पड़ी हैं. जिसमें से एक सीट पर बहूरानी राजश्री यादव राज्यसभा जा सकती हैं.
पहले बदला नाम, अब बदलेगा काम
राजनीतिक दिग्गज तेजस्वी यादव ने साल 2021 में राजश्री के साथ 7 फेरे लिए थे. शादी से पहले राजश्री का नाम रेचल था. बहुत ही कम लोगों को उनके इस रियल नाम के बारे में पता होगा. राजश्री रेवाड़ी की रहने वाली हैं और इसाई परिवार से हैं. राजश्री का बचपन दिल्ली में गुजरा. ग्रेजुएट राजश्री शादी से पहले वो एक एयर होस्टेस थीं.
15 फरवरी है नामांकन की आखिरी तारीख
राज्यसभा की 6 सीटों पर चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी की जा चुकी है क्योंकि सांसदों का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है. वहीं चुनाव के लिए नामांकन का प्रोसेस शुरू हो चुका है. जिसका नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 15 फरवरी तय की गयी है.
जानिए कब होनी है वोटिंग
आने वाली 27 फरवरी को राज्यसभा के लिए वोटिंग होनी है. जो सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक जारी रहेगी. जिसके बाद उसी दिन वोटों की गिनती भी शाम 5 बजे से शुरू हो जाएगी.
बिहार में जब से नीतीश की अगुवाई में NDA सरकार का गठन हुआ है तभी से सियासी हलचल मची हुई है, एक ओर जहां फ्लोर टेस्ट की तैयारी में नीतीश कुमार लगे हुए है तो वहीं तेजस्वी के बयान ने अभी तक सबकी टेंशन को बढ़ाया हुआ है. ऐसा दावा है कि फ्लोर टेस्ट से पहले बड़ा खेला हो सकता है. बता दें नई सरकार के गठन के बाद 12 फरवरी को फ्लोर टेस्ट होने जा रहा है.
फ्लोर टेस्ट से पहले विधायकों बने 'बंदी'
फ्लोर टेस्ट से पहले जनता दल यूनाइटेड ने 11 फरवरी को विधानमंडल की बैठक बुलाई है। जिसमें विधायकों को अनिवार्य रूप से शामिल होने के निर्देश जारी किये गए हैं । इसी बीच आरजेडी ने अपने विधायकों को बैठक के लिए बुलाया और तेजस्वी यादव के आवास पर करीब 3 घंटे तक विधायकों की बैठक चली। जिसके बाद सभी विधायकों को तेजस्वी के पांच देश रत्न मार्ग पर रोक दिया गया और विधायकों का सामान भी आवास में भेजा गया। वहीं विधायकों के टूटने की आशंका के चलते फ्लोर टेस्ट से पहले बिहार कांग्रेस के विधायक हैदराबाद पहुँच गए हैं । बता दें कि बीते दिनों दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस के विधायकों की एक बैठक हुई थी जिसमें करीब 17 विधायक शामिल हुये थे।
नये स्पीकर का चुनाव भी 12 को होगा
आपको बता दें की नीतीश कुमार ने 28 जनवरी की शाम 8 मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। विजय सिन्हा डिप्टी सीएम, सम्राट चौधरी डिप्टी सीएम , विजय कुमार चौधरी, डॉक्टर प्रेम कुमार , ब्रिजेन्द्र प्रसाद यादव, सुमित कुमार सिंह, संतोष कुमार और श्रवण कुमार नीतीश की नई कैबिनेट का हिस्सा हैं। वही विधानसभा के नये स्पीकर का चुनाव होना अभी बाकी है जो कि 12 फरवरी को होना है।
किसके पास, कितने विधायकों की सेना ?
243 सीटों वाली विधानसभा में जहां राजद के पास 79 विधायक हैं और राजद विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है। तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के पास 19 विधायक, सीपीआई के पास 16 विधायक हैं। वहीं विपक्ष के पास कुल मिलाकर 114 विधायकों की फौज है और एक विधायक AIMIM के पास है।
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव 'जन विश्वास यात्रा' पर निकल पड़े हैं। यात्रा के पहले पड़ाव में मुजफ्फरपुर पहुंचे जहां तेजस्वी यादव के समर्थकों ने क्रेन के ऊपर चढ़कर उन पर फूल बरसाए। इस दौरान तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा। तेजस्वी यादव ने कहा "कि कुछ लोग कहते हैं कि RJD MY (MUSLIM और YADAV) की पार्टी है लेकिन RJD तो BAP (BAHUJAN बहुजन + AGDA अगड़ा + POOR की पार्टी है. RJD MY के साथ साथ BAP की पार्टी है।"
यात्रा में उठाये जनता के मुद्दे
मुजफ्फरपुर में तेजस्वी यादव ने जनता के मुद्दों पर बात करते हुए कहा, “कि मैं आपकी लड़ाई लड़ने के लिए यहां हूं, हम चाहते हैं कि बिहार शीर्ष राज्यों में गिना जाए और यह जन विश्वास यात्रा का पहला सार्वजनिक संबोधन है, हमें आपके विश्वास की जरूरत है। क्या आप हमें सत्ता देंगे? आशीर्वाद मिलेगा ना? बेरोजगारी सबसे बड़ा दुश्मन है, इसे जाना चाहिए। मैंने 10 लाख नौकरियों का वादा किया था। मैंने कहा था कि हम रिक्तियां भरेंगे और बिहार को राष्ट्रीय औसत के बराबर लाएंगे। हमें धोखा दिया गया और हमारी नौकरी काट दी गई।''
जनता ने हमें बिहार की सबसे बड़ी पार्टी
'जन विश्वास यात्रा' से पहले तेजस्वी यादव ने गाय को चारा खिलाया और मंदिर में पूजा-अर्चना करके आशीर्वाद लिया। यात्रा शुरु करने से पहले तेजस्वी अपनी बेटी कात्यायनी को लाड-प्यार करते हुए भी नजर आए। इस दौरान तेजस्वी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "कि जनता हमारी मालिक है, हम मालिक के सामने जा रहे हैं। जनता ने हमें बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनाया।
'नीतीश जनमत को अपने पैर की जूती समझते'
इसके साथ ही तेजस्वी ने गठबंधन के मुद्दे पर कहा, "कि नीतीश कुमार के पास गठबंधन बदलने का न तो कोई विजन है और न ही कोई कारण। हमने 17 महीने में जो काम किया, उसे हम जनता के सामने रखेंगे। सीएम नीतीश कुमार जनता के फैसले को कोई महत्व नहीं देते, नीतीश कुमार जनमत को अपने पैर की जूती समझते हैं। जनता इसबार उनको जरूर जवाब देगी।"
11 दिनों में राज्य के 38 जिलों का करेंगे दौरा
आपको बता दें कि तेजस्वी यादव 20 फरवरी से 1 मार्च तक पूरे बिहार का दौरा करेंगे. इस दौरान राज्य के सभी 38 जिलों में जायेंगे। 'जन विश्वास यात्रा' एक जन संपर्क कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य "सार्वजनिक विश्वास" जीतना है। इसकी शुरुआत मुजफ्फरपुर से हो गई है। तेजस्वी मोतिहारी, पूर्वी चंपारण जिले के मुख्यालय में रात्रि विश्राम करेंगे। इससे पहले तेजस्वी सीतामढ़ी और शिवहर में दो और सार्वजनिक बैठकों को संबोधित करेंगे।
कहते हैं बेटे पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हैं लेकिन लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने लोगों को शायद ये बताने की ठान ली है कि केवल बेटे ही नहीं अब बेटियां भी पिता की विरासत की बागडोर को अच्छे से संभाल भी सकती हैं और आगे बढ़ा भी सकती हैं। दरअसल राष्ट्रीय जनता दल ने बिहार की 22 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. पार्टी ने सारण लोकसभा सीट से रोहिणी आचार्य को टिकट दिया है जबकि पाटलिपुत्र से मीसा भारती को उम्मीदवार घोषित किया है. सारण वही सीट है जहां से कभी लालू यादव सांसद हुआ करते थे. 1977 में लालू यादव पहली बार इस सीट से मैदान में उतरे थे और जीत हासिल कर संसद पहुंचे थे. 1977 में जीत हासिल करने के बाद लालू यादव ने 1989, 2004 और 2009 में भी इसी सीट से जीत हासिल की थी. तब से इस सीट को लालू यादव का गढ़ कहा जाने लगा था. हालांकि, तब यह सीट छपरा कहलाती थी. 2008 में हुए परिसीमन के बाद इस सीट का नाम छपरा से बदलकर सारण कर दिया गया.
बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी से होगी रोहिणी की टक्कर
बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी से सारण की सीट पर रोहिणी का मुकाबला होना है. रूडी इस सीट से मौजूदा सांसद भी हैं. 2014 के चुनाव में भी रूडी को जीत हासिल हुई थी. रूड़ी ने 2014 में लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी को मात दी थी. इसके बाद 2019 में लालू यादव के समधी चंद्रिका राय को धूल चटाया था. रूडी का सामना अब लालू यादव की बेटी रोहिणी से है. 2019 के चुनाव में बीजेपी के राजीव रूडी को 50 फीसदी से अधिक वोट मिले थे. वहीं, 38 फीसदी से अधिक वोटों के साथ चंद्रिका राय दूसरे नंबर पर रहे थे.वही बात करें रोहिणी आचार्य की तो रोहिणी पहली बार मैदान में जरूर उतर रही हैं, लेकिन राजनीति के दांव पेच का अंदाजा उन्हें पहले से मालूम है. अब उनके कंधे पर लालू यादव की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है. हालांकि, रोहिणी इसमें कितना सफल हो पाती हैं यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा लेकिन टिकट की घोषणा होने के पहले से ही रोहिणी आचार्य ताबड़तोड़ सारण का दौरा कर रही हैं और लोगों के बीच में पहुंचने की कोशिश कर रही है.
पहले कांग्रेस और बाद में पिता लालू के गढ़ में ताल ठोंक पाएंगी रोहिणी
लालू यादव के चुनाव जीतने से पहले सारण कांग्रेस का गढ़ रहा. 1962 से लेकर 1971 तक यह सीट कांग्रेस के कब्जे में थी. रामशेखर प्रसाद सिंह यहां से तीन बार सांसद चुने गए थे. 1977 के चुनाव में देश की सियासत का मिजाज बदला और बिहार की राजनीति में लालू यादव का कद बढ़ा तो वो पहली बार यहां से मैदान में उतरे. 1989, 2004 और 2009 में लालू यादव यहां से सांसद निर्वाचित हुए थे अब पार्टी ने इस सीट से रोहिणी आचार्य को मैदान में उतार दिया है. करीब डेढ़ साल पहले पिता लालू यादव को अपनी एक किडनी दान में देकर रोहिणी आचार्य सुर्खियों में आईं थी. सारण सीट से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब रोहिणी आचार्य के कंधे पर उस सीट को जीतने की चुनौती है जहां से पिता पहली बार सांसद चुने गए थे. रोहिणी पहली बार चुनावी मैदान में जरूर उतर रही हैं, लेकिन सियासी दांव पेंचों से वो पहले से वाकिफ हैं.
क्या कहता हैं सारण का सियासी समीकरण?
सारण लोकसभा सीट की बात करें तो इसमें छह विधानसभा सीटें आती हैं. 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने चार सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि दो सीटें बीजेपी के खाते में गई थी. जिन चार सीटों पर आरजेडी ने जीत हासिल की थी उनमें मढ़ौरा, गरखा, परसा और सोनपुर सीट शामिल है जबकि छपरा और अमनौर सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी.
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