ग्रेटर नोएडा: अपनी मांगों को लेकर प्राधिकरण के ख़िलाफ़ किसानोंं ने ट्रैक्टर रैली निकाली। ये रैली तय कार्यक्रम के अनुसार ग्रेटर नोएडा वेस्ट के एक मूर्ति गोल चक्कर और ग्रेटर नोएडा ईस्ट के सिरसा गोल चक्कर से जैतपुर होते हुए प्राधिकरण के सामने आकर ख़त्म किया। इस रैली में सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रॉली में सवार होकर हज़ारों किसान पहुंचे।
किन किन मांगों को लेकर प्रदर्शन?

प्राधिकरण के ख़िलाफ अपनी मांगों को लेकर किसान धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जिनके समर्थन में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर से पहुंचे। किसानों की मांग है कि उन्हें 10 फीसदी आबादी प्लॉट, आबादियों में लीजबैक, भूमिहीन किसानों को 40 वर्ग मीटर का प्लाट शामिल है।इसके अलावा सर्किल रेट से 4 गुना मुआवजा भी शामिल है।

डेरा डालो, घेरा डालो का भी है प्रोग्राम
इस दौरान किसानों का कहना था कि अगर उनकी मांग जल्द नहीं मानी गई तो 6 जून को डेरा डालो, घेरा डालो का भी प्रोग्राम किया जा रहा है। आपको बता दें किसान पिछले 34 दिन से अपनी मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा: प्राधिकरण के बाहर धरना दे रहे किसानों को पुलिस ने हटा दिया। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच नोंकझोक भी देखने को मिली। किसानों पर काबू पाने के लिए पुलिस को हल्के बल का भी इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस ने मौके से 33 किसानों को हिरासत में भी लिया। जिन्हें पुलिस लाइन में लाया गया।

धरने को जबरन करवाया ख़त्म
किसान पिछले 43 दिन से अपनी कई मांगों को लेकर प्राधिकरण दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे थे। मंगलवार को किसानों ने प्राधिकरण के दूसरे गेट को भी बंद कर दिया था। किसानों ने प्राधिकरण पर डेरा डालो, घेरा डालो का आह्वन किया था। जिसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसान शामिल हुए थे।

ग्रेटर नोएडा: यमुना प्राधिकरण के खिलाफ़ किसान पिछले 29 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। सलारपुर अंडरपास के किसान बैठकर धरना दे रहे हैं। लेकिन कोई भी किसानों की समस्या सुनने को तैयार नहीं दिख रहा है। रविवार को किसानों ने प्राधिकरण के खिलाफ़ अनोखा प्रदर्शन किया। किसानों ने भैंस के ऊपर मोटे मोटे अक्षरों में यमुना प्राधिकरण और अंग्रेजी में येडा लिखकर बीन बजाई
ग्रेटर नोएडा: पिछले 52 दिन से किसान प्राधिकरण के बाहर धरना दे रहे हैं। गुरुवार रात 8 बजे ग्रेटर नोएडा सीईओ रितु माहेश्वरी और किसानों की बीच बातचीत विफल हो गई। इस दौरान मौजूद रहे विधायक तेजपाल नागर भी किसानों को समझाने में नाकाम रहे। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे किसानों ने उनके जेल में बंद उनके साथी किसानों को छोड़ने की मांग की। हालांकि विधायक ने किसानों को लाख समझाने का प्रयास किया कि वो अभी रात में धरना खत्म कर दें, सुबह उनके साथियों को छोड़ दिया जाएगा। इसके बावजूद किसानों ने विधायक की भी बात नहीं सुनी।
विधायक से नाराज़ दिखे किसान
किसानों ने कहा कि विधायक जनप्रतिनिधि हैं, इसके वाबजूद वो किसानों की तरफ़ से कम, अथॉरिटी अफसरों की तरफ से बोलते दिखे। किसानों का आरोप था कि विधायक की रूचि केवल धरना ख़त्म करवाने में थी, ना कि किसानों की समस्या सुलझाने में।

अथॉरिटी से बातचीत बेनतीजा
अथॉरिटी की तरफ़ से किसानों के प्रतिनिधियों को अंदर बातचीत के लिये बुलाया गया था। किसानों की बातचीत रितु माहेश्वरी की मौजूदगी में उनके कार्यालय में शुरू हुई। इससे पहले विधायक मास्टर तेजपाल सिंह भी किसानों और अधिकारियों के बीच मसले को सुलझाने पहुंचे। विधायक ने किसानों के सामने धरना ख़त्म करने का प्रस्ताव रखा। इस दौरान करीब आधे घंटे विधायक और रितु माहेश्वरी की भी बातचीत हुई। इसके बाद तय हुआ कि किसानों के एक प्रतिनिधि दल को अंदर बुलाया जाए।
ग्रेटर नोएडा: गिरफ्तार 33 किसानों की रिहाई की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर से गिरफ्तार किसानों को छोड़ने की मांग की। साथ ही उन पर दर्ज फ़र्जी मुकदमें को हटाने की भी मांग की। प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव सुखवीर गठिना, विधायक राजपाल बालियान, छपरौली विधायक अजय कुमार, खतौली विधायक मदन भैया मौजदूर रहे।
ग्रेटर नोएडा: किसान सभा की घंगोला और मायेचा कमेटी ने अपने-अपने गांव से जेल गए साथियों का सम्मान किया। साथ ही आंदोलन की आगे की रणनीति के बारे में चर्चा की गई। किसानों के बैठक में 10% आबादी प्लाट, रोजगार, भूमिहीन किसानों के लिए 10 वर्ग मीटर के प्लाट, 120 मीटर न्यूनतम प्लाट और साढ़े 17% आवासीय स्कीम में कोटा की नीति को बहाल करने के मुद्दे पर बात हुई।

इन मांगों पर भी किसान बैठक में चर्चा
इसके अलावा नई खरीदों में सर्कल रेट का 4 गुना मुआवजा देने और नई खरीद से प्रभावित किसानों को नए कानून के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लाभ देने पर भी बात हुई। आपको बता दें किसानों के प्लाटों पर पेनल्टी खत्म करने, आबादियों की लीज बैक तुरंत तेज गति से शुरू करने, आबादी के शेष प्रकरणों का निस्तारण करने सहित अन्य मांगों को लेकर 7 फरवरी से किसान सभा ने आंदोलन शुरू किया था।

क्या है पूरा घटनाक्रम
दरअसल, किसान सभा ने 7 मार्च, 14 मार्च और 23 मार्च को हजारों की संख्या में एक-एक दिन का धरना प्रदर्शन किया था। 25 अप्रैल से किसान सभा ने प्राधिकरण पर रात दिन का महापड़ाव डाल दिया था। जिसमें लगातार आंदोलन करते हुए 6 जून को किसानों ने प्राधिकरण के दोनों गेटों को बंद कर दिया। इस दौरान चले आंदोलन में अभूतपूर्व रूप से किसानों ने हजारों की संख्या में हिस्सा लिया। संख्या के लिहाज से आंदोलन ऐतिहासिक रहा, आंदोलन में महिलाओं युवाओं और भूमिहीन किसानो की हजारों की संख्या ऐतिहासिक तौर पर बेमिसाल रही।
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