Noida: उत्तर प्रदेश के सबसे हाईटेक सिटी में बिल्डरों का मकड़जाल फैला हुआ है। हर तरफ ऊंची-ऊंची बिल्डिंग बनी हैं। लेकिन इन बिल्डिंगों को बनाने वाले बिल्डर सरकार और फ्लैट खरीदारों के लिए मुसीबत बन गए हैं। नोएडा के हजारों फ्लैट ऐसे हैं, जिनकी सालों से रजिस्ट्री नहीं हुई है। शहर में 20 हजार से अधिक फ्लैट ऐसे हैं, जिनकी रजिस्ट्री सालों से बिल्डर्स ने नहीं कराई है। जिसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है। यही कारण है कि निबंधन विभाग को स्टांप ड्यूटी के रूप में मिलने वाले 1311 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा नहीं हो पाए हैं।
ओसी और सीसी जारी होने के बाद भी नहीं करा रहे रजिस्ट्री
सेक्टर-137 स्थित अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-1 की रहने वाली सपना मिश्रा ने बताया कि 2015 से 2024 तक नौ साल बीत जाने के बाद भी उनकी सोसायटी के 1596 में से केवल 200 फ्लैट्स की ही रजिस्ट्री हुई है। जबकि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 6382 फ्लैटों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) और कंपलीशन सर्टिफिकेट (सीसी) जारी होने के बावजूद बिल्डरों ने रजिस्ट्री नहीं कराई है। अभी तक 20,214 फ्लैट मालिकों को अपने घर का मालिकाना हक नहीं मिला है। जिसके चलते लोग सोशल मीडिया और विरोध प्रदर्शन के जरिए लगतार सरकार और प्राधिकरण से गुहार लगा रहे हैं।
बिल्डर 100 करोड़ बाकी
बता दें कि सेक्टर-77 की प्रतीक विस्टेरिया सोसायटी में 2014 से लोग रह रहे हैं। लेकिन 1800 फ्लैट्स में से करीब 250-300 फ्लैट्स की रजिस्ट्री अभी तक नहीं हुई है। बिल्डर पर नोएडा प्राधिकरण का लगभग 100 करोड़ रुपये बाकी है। निबंधन विभाग ने इस मामले में संबंधित बिल्डरों को नोटिस भेजा है और जल्द से जल्द रजिस्ट्री कराने के लिए आदेश दिया है। लेकिन बिल्डरों का प्राधिकरण पर बकाया होने के कारण परियोजनाओं को ओसी और सीसी जारी नहीं हो पा रहे हैं, जिस वजह से भी रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
फ्लैट खरीदारों ने इस मामले में कई बार न्यायालयों का दरवाजा भी खटखटाया है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इस घोटाले की वजह से जून, जुलाई और अगस्त महीने में विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया।
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