Sitapur: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बिगुल बज चुका है. ऐसे में राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है. इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शुक्रवार को सीतापुर जेल पहुंचे. यहां उन्होंने जेल में बंद आजम खान से मुलाकात की. करीब एक घंटे की इस मुलाकात के बाद सियासत तेज हो गई है.
अखिलेश-आजम की मुलाकात
जानकारी के मुताबिक, इस मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव और आजम खान के बीच राम लोकसभा सीट को लेकर बातचीत की गई है और अब शायद अखिलेश यादव रामपुर लोकसभा सीट से टिकट की घोषणा भी कर सकते हैं. हालांकि, उम्मीदवार इस सीट से सपा मुखिया किसे उम्मीदवार बनाएंगे इसको लेकर अभी अटकलें लगी हुई है. वहीं, जैसे ही अखिलेश यादव सीतापुर जेल पहुंचे तो सपा कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई.
यह है पूरा मामला
बता दें कि, फेक बर्थ सर्टिफिकेट मामले के चलते आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुला आजम को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई गई थी. फेक बर्थ सर्टिफिकेट का यह केस साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से जुड़ा है. तब अब्दुल्ला आजम ने रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में उनकी जीत भी हुई थी. वहीं, जब चुनाव का परिणाम आया उसी दौरान उनके खिलाफ हाई कोर्ट में केस दर्ज किया गया था.
आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने चुनावी फार्म में जो उम्र बताई है, असल में उनकी उम्र उतनी नहीं है. अब्दुल्ला विधायक का चुनाव लड़ने की उम्र का पैमाना पूरा नहीं करते हैं. शैक्षणिक प्रमाण पत्र में अब्दुल्ला का डेट ऑफ बर्थ 1 जनवरी 1993 है, जबकि जन्म प्रमाण पत्र में 30 सितंबर 1990 है.
सपा नेता आजम खान डूंगरपुर बस्ती केस में 10 साल जेल की सजा सुनाई गई है। रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान को डूंगरपुर बस्ती को खाली कराने के मामले का दोषी पाया है और 10 साल की सजा के साथ ही 14 लाख का जुर्माना भी लगाया है। इसी के साथ ही आजम खान के करीबी ठेकेदार बरकत अली को भी 7 साल की सजा मिली है।
डूंगरपुर केस का फैसला, आजम को 10 साल की सजा
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान को आज फिर से सजा का ऐलान हो गया है। रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान के खिलाफ डूंगरपुर केस में फैसला सुनाया है। सीतापुर की जेल में बंद आजम खान की जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी की गई।
सपा के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां को डूंगरपुर बस्ती खाली कराने के एक और मामले में बुधवार को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार दिया है। कोर्ट ने आजम को डूंगरपुर बस्ती को खाली कराने के मामले में दोषी पाया है। डूंगरपुर केस में आजम को 10 साल की जेल के साथ ही 14 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही उनके करीबी ठेकेदार बरकत अली को भी 7 साल की सजा मिली है।
क्या है डूंगरपुर बस्ती केस मामला?
समाजवादी पार्टी सरकार में 2016 में डूंगरपुर बस्ती में रह रहे लोगों के मकान तोड़कर आसरा आवास बनाया था। लेकिन साल 2019 में बेघर 12 लोगों ने गंज कोतवाली में अलग-अलग केस दर्ज कराए। जिसमें आरोप लगाया गया था कि सपा सरकार में आजम खान के इशारे पर पुलिस और सपाइयों ने उनके घरों को जबरन खाली कराया और साथ ही उनका सामान भी लूट लिया है। मकानों पर ध्वस्त कर दिया था। यहां तक के मामले में आजम खान नामजद नहीं थे।
लेकिन इसके बाद डूंगरपुर केस में पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा और पूछताछ की। जिसमें आरोपियों ने आजम खान का नाम लिया। 12 केस में से 8 में फैसला सामने आ चुका है। पांच में उन्हें सजा और 3 में वो बरी हुए हैं। एक मामले में उन्हें सात साल की सजा हुई थी। इस मामले में हाई कोर्ट से जमानत मिली थी। हालांकि, एक दूसरे मामले में सजा मिलने की वजह से वो रिहा नहीं हो पाए थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आजम खान पर 84 केस अभी विचाराधीन हैं।
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