Mathura: वृंदावन के श्री ठाकुर बांके बिहारी के दर्शन को आईं दो महिला श्रद्धालुओं की रविवार को मंदिर के रास्ते में मौत हो गई। एक महिला जबलपुर (मप्र) और दूसरी सीतापुर (उप्र) की रहने वाली थी। दोनों महिलाएं भीड़ के दबाव में अपने परिजनों से बिछड़ गई थीं। तबियत बिगड़ने से मौत होने की पुष्टि पुलिस द्वारा की गई है। परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए शव लेकर चले गए।
भीड़ के आगे पुलिस-प्रशासन की व्यवस्था ध्वस्त
रविवार को चार लाख से अधिक श्रद्धालु बांके बिहारी के दर्शन को पहुंचे। पुलिस-प्रशासन की व्यवस्था ध्वस्त हो गई। एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय पुलिस द्वारा की गई पुष्टि के अनुसार बीना गुप्ता (70) पत्नी ओम प्रकाश गुप्ता निवासी गंज बाजार, महोली, सीतापुर, जो कि अपनी पड़ोसन शिवानी व अन्य परिजनों के साथ वृंदावन में श्रीबांके के दर्शन को आई थीं। रविवार सुबह 11.30 बजे करीब वह मंदिर में दर्शन को निकली थीं। तभी वह भीड़ के चलते अपने परिजनों बिछड़ गईं। पड़ोसन शिवानी उनके साथ थीं। हरि निकुंज चौराहा के पास चलते-चलते उनकी तबीयत बिगड़ी और अचेत हो गईं। सूचना पर पहुंची पुलिस उन्हें सौ शैय्या अस्पताल में लेकर पहुंची। वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
Greater Noida: थाना बिरसख स्थित शाहबेरी स्थित एक सोसाइटी की बिल्डिंग से गिरकर युवक की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि मां की मौत और पिता के कैंसर से पीड़ित होने के कारण सदमे में आकर युवक ने आत्महत्या कर ली है। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
गुरुग्राम की कंपनी में करते थे जॉब
पुलिस के अनुसार ग्रेटर नोएडा वेस्ट की शाहबेरी स्थित वृंदावन गार्डन कॉलोनी की मान हाइट्स में फरहाद हसन (37) पत्नी के साथ रहते थे। फरहाद गुरुग्राम की एक कंपनी में बिजनेस एनालिस्ट थे। फरहाद की मां का कुछ दिन पहले निधन हो गया था,जबकि पिता कैंसर से पीड़ित हैं। फरहाद हसन की सोमवार रात संदिग्ध परिस्थितियों में तीसरी मंजिल स्थित फ्लैट से नीचे जमीन पर गिर गए थे।
मां के निधन के बाद डिप्रेशन में थे
सोसाइटी के लोगों ने पुलिस को सूचना देने के साथ ही फरहाद हसन को अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। थाना बिरसख के प्रभारी ने बताया कि परिवार के सदस्यों और सोसाइटी के अन्य लोगों से पूछताछ में पता चला है कि मां के निधन के बाद से ही फरहाद बहुत ज्यादा तनाव में थे। जिस वक्त घटना हुई उस वक्त परिवार के सभी सदस्य सोए थे। पिता के कैंसर को लेकर भी वह बहुत परेशान रहते थे।
होली का त्योहार की हर ओर धूम मची है। आप सबको तो पता ही होगा कि ब्रज की होली दुनियाभर में मशहूर है। देश-विदेश से लोग मथुरा की होली आनंद लेने यहां आते हैं। ब्रज में बरसाने और नंदगांव की लट्ठमार होली सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। लोग दूर-दूर से इस त्योहार को मनाने यहां आते हैं।
फागुन शुरू होते है छाने लगती है खुमारी
कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन और पूरे ब्रजधाम में फागुन का महीने शुरू होते ही होली की खुमारी छाने लगती है। वृंदावन की कुंज गलियों में अबीर और गुलाल की बौछार होने लगती है। प्रेम रंग में सराबोर मथुरावासी सिर्फ रंग गुलाल ही नहीं लड्डू, फूल और माखन से भी होली खेलते हैं। दुनियाभर से बड़ी संख्या में लोग ब्रज की होली देखने मथुरा पहुंचते हैं। बरसाने की लट्ठमार होली को देखने का अपना अलग ही मजा है।
लट्ठमार होली क्यों खेली जाती है?
मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा रानी के गांव यानि बरसाने में होली खेलने आया करते थे। नंदगांव के ग्लावे और बरसाने की ग्वालिन होली खेलती थीं। तभी से यहां होली खेलने की ये परंपरा चली आ रही है। गोप जब गोपिकाओं को प्रेम में छेड़ते थे, तो गोपिकाएं उन्हें लट्ठमारते हुए भगाया करती थीं। इसी मान्यता को जीवंत रखने के लिए यहां हर साल लट्ठमार होली खेली जाती है।
ब्रज में पूरे 40 दिन तक होली का त्योहार मनाया जाता
18 मार्च को बरसाना के राधा रानी मंदिर में लट्ठमार होली का आयोजन किया जाएगा। 19 मार्च को नंदगांव में लट्ठमार होली का आयोजन होगा। 20 मार्च को कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में होली का आयोजन किया जाएगा। 21 मार्च को गोकुल में छड़ी मार होली खेली जाएगी। आपको बता दें कि पहले बरसाने में लट्ठमार होली खेली जाती है उसके बाद नंदगांव में होली खेली जाती है और सबसे आखिर में रंगभरी एकादशी के दिन वृंदावन में फूलवारी होली खेली जाती है। हालांकि ब्रज में पूरे 40 दिन तक होली का त्योहार मनाया जाता है। अलग-अलग मंदिरों में भक्त नंदलाला के साथ होली खेलते हैं।
Mathura: रक्षाबंधन पर्व को लेकर वृंदावन में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में शनिवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। आराध्य के दर्शन पाने के लिए उमस भरी गर्मी में भी श्रद्धालुओं के कदम पीछे नहीं रहे। भीड़ के चलते यातायात व्यवस्था भी चरमराती दिखी। वहीं, बांकेबिहारी के दर्शन करने आए हरियाणा के श्रद्धालु की भीड़ के दबाव में दम घुटने से मृत्यु हो गई। पुलिसकर्मी उनको अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के गांव सेहवाल के रहने वाले 65 वर्षीय मामचंद्र सैनी रविवार को ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन के लिए वृंदावन आए थे। मंदिर परिसर में अधिक भीड़ के कारण मामचंद्र का दम घुटने लगा। वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े। मौके पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस उनको अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डाक्टरों ने मामचंद्र को मृत घोषित कर दिया।
बांकेबिहारी के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
बता दें कि धार्मिक नगरी में शनिवार की सुबह भक्तों की संख्या में इजाफा देखा गया। सुबह मंदिर के बांकेबिहारी मंदिर के पट खुलने से पहले ही भक्तों की भीड़ मंदिर के मुख्य मार्गों पर नजर आने लगी। मंदिर के प्रवेश द्वार दो और तीन नंबर गेट पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। दिन भर तेज धूप का असर भी भक्तों पर होता नहीं दिखाई दे रहा था। भीड़ का आलम यह था कि लोग अपने आराध्य की झलक पाने के लिए किसी भी तरह अंदर घुसने को लालायित थे। कुंज गलियों में भीड़ एक-दूसरे के ऊपर चढ़ रही थी। लगातार यह आलम अब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक चलेगा।
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