Noida: नोएडा में घर खरीदारों के लिए योगी सरकार ने एक और राहत भरी खबर दी है। प्रशासन की ओर से नोएडा, ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में तैयार फ्लैटों की रजिस्ट्री तीन माह में करने और अधूरी पड़ी परियोजनाओं का निर्माण अधिकतम तीन वर्षों में पूरे करने होंगे। नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत के नेतृत्व में गठित समिति की सिफारिशों को यूपी कैबिनेट से पास करने के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण को शासनादेश भेजा गया है।
बिल्डरों की दी गई चेतावनी
औद्योगिक विकास आयुक्त मनोज कुमार सिंह की ओर से भेजे गए शासनादेश में तय समय में रजिस्ट्री और अधूरे निर्माण पूरे नहीं करने वाले बिल्डरों पर जुर्माना लगाने और परियोजना का आवंटन निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। इसके साथ हीतीनों प्राधिकरणों को विशेष बोर्ड बैठकों में प्रस्ताव रखते हुए कार्य बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
बिल्डरों को 2 महीने में बकाया का 25 फीसदी रकम जमा करना होगा
औद्योगिक विकास आयुक्त की ओर से जारी निर्देश में को-डेवलपर पॉलिसी, पैसों के भुगतान, जीरो पीरियड, परियोजना के समय विस्तार आदि पर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके मुताबिक कोविड काल के दौरान दो साल की अवधि के किए गए ब्याज और दंडात्मक ब्याज को घटाते हुए सीए फर्म से बिल्डरों के बकाये की गणना कराई जाएगी। बिल्डरों को उनके कुल बकाये की राशि से अवगत कराया जाएगा। छूट का लाभ पाने के लिए बिल्डर को 60 दिन के भीतर बकाये की 25 फीसदी राशि प्राधिकरण में जमा करनी होगी। इसके बाद वह नियमों के तहत हर प्रकार के छूट के हकदार होंगे।
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 6 से 10 फरवरी तक 57 वां आईएचजीएफ दिल्ली मेला - स्प्रिंग 2024 आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई, निवेश प्रोत्साहन, नंद गोपाल गुप्ता भी शामिल रहे. पांच दिन तक चलने वाले इस एक्सपो में देश-विदेश से कई खरीददार भारत के बनाए हुए शिल्प कला और अन्य उत्पाद जैसे की कपड़े, फर्नीचर और आम जीवन में उपयोग में आने वाले सामानों की खरीदी का एक प्लेटफॉर्म है.
Greater Noida के एक्सपो मार्ट में टेक्सटाइल, फर्नीचर, और हस्तशिल्प के उत्पादों के अलावा और भी कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जैसे कि डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सुरक्षा, कॉर्पोरेट संचार, डेटा सुरक्षा के कानून और पालन कि प्रक्रियाओं के साथ-साथ उपयोग की जानकारी साझा करते हुए एक्सपो में लोगों के मनोरंजन और प्रोत्साहन के लिए रैम्प शो का भी आयोजन किया गया है.
बिजनेस में आपार संभावनाएं
एक्सपो की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राकेश कुमार ने व्यवसायिक गतिविधि के बारे में बताते हुए कहा, “पहले तीन दिनों के दौरान अच्छी संख्या में खरीददारों ने मेले का दौरा किया और मेले में अपने नियमित और नए आपूर्तिकर्ताओं के साथ ऑर्डर देने में अपनी रुचि साझा की। कई पुराने और नए खरीदार हमारे आयोजन का हिस्सा बने हैं। यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि हमारे विक्रेताओं और संरक्षकों की अगली पीढ़ी आईएचजीएफ दिल्ली मेले के साथ अपनी सोर्सिंग यात्रा शुरू कर रही है। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट हमारे हस्तशिल्प उद्योग के दूसरी और तीसरी पीढ़ी के निर्यातकों के साथ इन युवा खरीददारों के बीच नए व्यापारिक संबंधों की शुरुआत का गवाह है। इस तरह हमारा वैश्विक परिवार बढ़ रहा है."

अनुभव साझा करते लोग
आईएचजीएफ दिल्ली मेले के पहले संस्करण से ही कई विदेशी खरीददार जुडते आएं हैं, उन्होंने अपने अुनभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उन लोगों ने भारत के तैयार उत्पादों को अपने और अंतर्राष्ट्रीय मापदंडों पर खरा पाया. यू.के. (United Kingdom) से आने वाले डेज़ी स्नो और स्कॉट हिरोन ने कहा कि इस मेले में आना 'घर' आने जैसा है और इससे वो लोग बहुत खुश हैं, “मैंने अपने पिता के साथ खुद को भारत के होम वेयर और फ़र्नीचर उद्योग में डुबो दिया है, जिसकी जड़ें मेरी अंग्रेजी विरासत में हैं। कारीगरों के साथ काम करते हुए, मैंने उन्हें रीसाइकल्ड कच्चे माल का उपयोग को प्रोत्साहित किया। ऐसा करके मैंने पारंपरिक शिल्प को स्थायी रूप से संरक्षित किया है। विश्व स्तर पर काम करते हुए, मैंने सचेत उपभोग की वकालत करते हुए भारतीय शिल्प कौशल की सुंदरता को साझा किया है।"
अमेरिका से आए खरीदारों का कहना है कि उनके ग्राहकों को केवल उच्च स्तर के शिल्प कला उत्पाद जैसे की प्रिमियम टेबल लिनेन और अन्य लग्जरी आइटम के तलाश में रहते हैं, जिसकी आपूर्ति हम भारतीय एक्सपो में आकर करते हैं.

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद का बयान
आर.के वर्मा (कार्यकारी निदेशक) प्रेस से बात करते हुए कहा की ईपीसीएच दुनिया भर के विभिन्न देशों में भारतीय हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने के उपलक्ष्य और उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पादों और सेवाओं के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में विदेशों में भारत की छवि और होम जीवनशैली, कपड़ा, फर्नीचर और फैशन आभूषण और सहायक उपकरण के उत्पादन में लगे क्राफ्ट क्लस्टर के लाखों कारीगरों और शिल्पकारों के प्रतिभा की ब्रांड इमेज बनाने के लिए कार्यरत हैं.
इस एक्सपो से जुडी और जानकारी देते हुए आर.के वर्मा ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में हस्तशिल्प निर्यात 30 हजार 19.24 करोड़ रुपये (3,728.47 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का रहा.
Greater Noida: ग्रेटर नोएडा कोर्ट में तीसरी आंख यानि की सीसीटीवी काम नहीं कर रहा है। सीसीटीवी कैमरों का रखरखाव न होने और काम नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। इसी कोर्ट में बीते दिनों वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया से मारपीट हुई थी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने उस रिपोर्ट पर संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया था कि बार-बार पत्र लिखने के बावजूद सीसीटीवी काम नहीं कर रहे हैं। इसलिए फुटेज संरक्षित नहीं कर सकते।
सीजेआई ने की महत्वपूर्ण टिप्पणी
तीन सदस्यीय पीठ ने आदेश दिया कि रिपोर्ट सभी पक्षों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को दी जाए। इसके साथ ही राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सीजेआई ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों और अन्य लोगों को काम न करने के लिए कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कोई हड़ताल नहीं है और वकील इस तरह अदालत में घुस कर किसी से यह नहीं कह सकते कि चलो निकलो यहां से। कोर्ट ने 21 मार्च को इसी कोर्ट में गौरव भाटिया व वकील मुस्कान गुप्ता पर हमले का स्वत: संज्ञान लिया था।
Lucknow: योगी आदित्यनाथ कैबिनेट मीटिंग में मंगलवार को कई बड़े फैसले लिए गए हैं। 41 प्रस्तावों में से गौतमबुद्ध नगर को दो सौगातें मिली हैं. जिसमें जेवर एयरपोर्ट बनाने के लिए ली गई किसानों की जमीन का मुआवजा देने और नोएडा में 500 बेड के अस्पताल को मंजूरी मिली है. अस्पताल का निर्माण 15 एकड़ भूमि पर किया जाएगा।
UP में नई तबादला नीति मंजूर
योगी कैबिनेट ने नई तबादला नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत विभागाध्यक्ष 30 जून तक ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके बाद ट्रांसफर करने के लिए सीएम से परमिशन लेना होगा। नई तबादला नीति के तहत प्रदेश में समूह क, ख, ग, घ के सभी कार्मिकों के ट्रांसफर 30 जून तक होंगे। जिलों में तीन साल और मंडल में सात साल से अधिक तैनाती वाले कार्मिक हटाए जाएंगे। पिक एंड चूज की व्यवस्था खत्म होगी। जो ज्यादा पुराना होगा, वह पहले हटेगा। समूह क और ख में अधिकतम 20 प्रतिशत और समूह ग और घ में अधिकतम 10 प्रतिशत कार्मिकों के तबादले होंगे।
41 प्रस्तावों को दी गई मंजूरी
यूपी कैबिनेट में 41 प्रस्तावों को दी गई मंजूरी जिसमें बरेली में फ्यूचर यूनिवर्सिटी, गाजियाबाद में एचआरआईटी यूनिवर्सिटी को मंजूरी. हुडको से 1000 करोड़ के लिए गए लोन की गारंटी लेगी सरकार, ओबरा में लग रहे दो पावर प्लांट की लागत बढ़ने को दी मंजूरी. पहले 11705 करोड़ रुपए लागत थी, अब 13005 करोड़ रुपए लागत हो गई है. बलिया के रसड़ा में ट्रांसमिशन सबस्टेशन की लागत 537 करोड़ लागत करने के प्रस्ताव को मंजूरी. नोएडा में जेवर एयरपोर्ट बनाने के लिए ली गई किसानों की जमीन का मुआवजा देने के लिए धनराशि को मंजूरी. लखीमपुर में बनाया जाएगा हवाई अड्डा, प्रस्ताव को दी मंजूरी. आईआईटी कानपुर में बनेगा मेडिकल रिसर्च सेंटर, 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने को दी मंजूरी. इसके लिए राज्य सरकार हर साल 10 करोड़ रुपये देगी। इस तरह पांच साल में 50 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। शेष मदद केंद्र से आएगी। बुंदेलखंड की 26 परियोजनाओं को मिली मंजूरी. ललितपुर, झांसी, महोबा, मिर्जापुर जैसे जिलों से जुड़ी परियोजनाओं को मिली मंजूरी.
Gorakhpur: यदि आप अपने गांव में ही उद्यम लगाकर स्वरोजगार की राह पर चलकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना चाहते हैं तो खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की तरफ से संचालित मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना आपके लिए बेहद काम की साबित हो सकती है। इस योजना में चयनित होने पर आपको दस लाख रुपये तक की परियोजना पर लोन अत्यंत कम ब्याज दर पर मिलेगा। इतना ही नहीं परियोजना पर 90 फीसदी लोन भी मिल जाएगा।
5 से 10 फीसदी पैसा ही लगाना पड़ेगा
गोरखपुर के जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एके पाल बताते हैं कि मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना में ग्रामीण शिक्षित बेरोजगारों को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर गांवों में ही उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उद्यम स्थापित करने के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये तक की परियोजना पर वित्तीय सहायता बैंकों के माध्यम से दिलायी जाती है। इसके तहत सामान्य वर्ग के पुरुष लाभार्थियों को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत, जातिगत आरक्षित श्रेणी (एससी-एसटी, ओबीसी), अल्पसंख्यक, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक एवं महिला लाभार्थियों को 5 प्रतिशत का अंशदान स्वयं लगाना होगा।
आरक्षित श्रेणी के लाभार्थी को पांच वर्ष तक पूर्ण ब्याज सब्सिडी
एके पाल ने बताया कि प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद सामान्य वर्ग के पुरुष लाभार्थियों को पूंजीगत मद में मात्र 4 प्रतिशत ब्याज देना होगा। पांच वर्ष तक शेष ब्याज की धनराशि सब्सिडी के रूप में शासन से प्राप्त धनराशि से समायोजित हो जाएगी। जबकि आरक्षित वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक एवं महिला लाभार्थियों के पूंजीगत ऋण पर समस्त ब्याज की धनराशि सब्सिडी से समायोजित हो जाएगी।
इच्छुक व्यक्ति ऐसे करें आवेदन
मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत 18 से 50 वर्ष तक कि आयु के इच्छुक अभ्यर्थी को न्यूनतम कक्षा आठ पास तथा ग्रामीण क्षेत्र का निवासी होना चाहिए। अभ्यर्थी http://cmegp.data-center.co.in पोर्टल पर 28 जून तक आनलाइन आवेदन कर सकते है। ऑनलाइन आवेदन के बाद इसकी प्रिंटेड कॉपी व अन्य जरूरी दस्तावेज को जिला ग्रामोद्योग कार्यालय में जमा करना होगा। विस्तृत जानकारी के लिए विकास भवन के द्वितीय तल पर स्थित जिला ग्रामोद्योग अधिकारी के कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के बाद अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं. हाई कोर्ट ने यूपी के आजमगढ़ में कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना बुलडोजर से घर गिराए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई और यूपी सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा किस कानूनी प्रक्रिया के चलते याचिकाकर्ता के घर को गिराया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस प्रकाश पड़िया की सिंगल बेंच में इस मामले पर सुनवाई हुई।
कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा, ऐसी कौन सी परिस्थिति थी, जिसके चलते कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना याचिकाकर्ता के घर को गिरा दिया गया. अदालत ने इस मामले में यूपी सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
बता दें कि आजमगढ़ के सुनील कुमार ने हाईकोर्ट में बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर याचिका दाखिल की थी। जमीन विवाद को लेकर आजमगढ़ के एडिशनल कलेक्टर ने 22 जुलाई को सुनील कुमार का घर गिराने का आदेश जारी किया. आरोप है कि सुनील कुमार को सुनवाई का कोई मौका दिए बिना जल्द ही उनके मकान पर बुलडोजर चला दिया गया। हाईकोर्ट से पहले सुप्रीम कोर्ट भी क्रिमिनल केस होने पर आरोपियों के घर पर बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर की कार्रवाई को गलत बताया और कहा कि परिवार के किसी सदस्य पर अपराध का आरोप लगना किसी के घर पर बुलडोजर चला देने का आधार नहीं बन सकता है. देश में कानून का शासन है.
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