एक ओर जहां टीम इंडिया का इंग्लैंड संग तीसरा टेस्ट मैच चल रहा है तो वहीं दूसरी ओर टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज सरफराज खान की खूब चर्चा हो रही है. इसके साथ ही सब ये भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर वो कौन सी लड़की है जिसने सरफराज को ससुर के सामनेफ्लाइंग केस तक कर दी. हर कोई उनके बारे में जानने को बेताब है, आइये हम आपको बताते हैं कि आखिर कौन हैं सरफराज की बेगम.
कौन हैं रोमाना जहूर ?
कश्मीरी गर्ल रोमाना जहूर कश्मीर के शोफिया जिले के पशपोरा गांव की रहने वाली हैं। रोमाना की प्रारंभिक शिक्षा पशपोरा गांव में ही हुई और रोमाना ने बीएससी श्रीनगर से पूरी की है जिसके बाद रोमाना ने एमएससी दिल्ली से की है। आपको बता दें कि रोमाना दिल्ली की जिस कॉलेज में पढ़ती थीं सरफराज की बहन भी उसी कॉलेज में पढ़ती थीं और दोनों अच्छी सहेलियां भी थीं।
ऐसे शुरू हुई लव स्टोरी की शुरुआत
रोमाना और सरफराज की पहली मुलाकात 2019 में रणजी क्रिकेट मैच के दौरान ही हुई थी। जहां सरफराज मुंबई की ओर से जम्मू और कश्मीर के खिलाफ खेल रहे थे और रोमाना सरफराज की बहन और सहेलियों के साथ मैच देखने आई थी। जहां दोनों की पहली मुलाकात हुई। इस पहली मुलाकात में ही सरफराज अपना दिल रोमाना को दे बैठे और परिवार से बात करके खुद रोमाना के घर रिश्ता लेकर पहुँचे थे। युवा खिलाड़ी सरफराज खान ने 6 अगस्त को कश्मीर रीति रिवाजों के अनुसार रोमाना जहूर से उनके घर में ही निकाह किया। सरफराज ने अपनी शादी में काले रंग की शेरवानी पहनी हुई थी। वहीं उनकी दुल्हन रोमाना ने लाल रंग और गोल्डन रंग का लहंगा पहना हुआ था।
शादी के समय सरफराज बेहद खुश थे
सरफराज खान और रोमाना जहूर की शादी कश्मीर में हुई थी और सराफराज इस बात से बहुत खुश थे कि उनकी शादी घाटी में हुई थी। सरफराज खान ने अपनी शादी पर कहा था कि, "भगवान ने तय किया था कि कश्मीर में शादी करना मेरी किस्मत में है। मुझे यहां बहुत प्यार मिला है और जब भी समय मिलेगा मैं यहां आऊंगा।"
इंग्लैंड के खिलाफ चल रहे तीसरे टेस्ट मैच में डेब्यू खिलाड़ी ध्रुव जरेल ने शानदार पारी खेली. ध्रुव ने मार्क वुड को सचिन के अंदाज में छक्का लगाकर बताया कि उनके अंदर क्या काबिलियत है. बता दें ध्रुव जुरेल ने रेहान अहमद की बॉल पर दो छक्के लगाए, वो हॉफ सेंचुरी की ओर बढ़ ही रहे थे कि 124वें ओवर में लेट कट खेलने के चक्कर में विकेट के पीछे कैच थमा बैठे. इस तरह से ध्रुव की पारी तो खत्म हुई, लेकिन 104 गेंदों पर 46 रन ठोककर उन्होंने खुद को मैदान में साबित कर दिया. इसके साथ ही ध्रुव जुरेल की कहानी भी बहुत संघर्षों वाली है वो भी आपको बताते है.
बेटे को आर्मी में देखने की थी पिता की ख्वाहिश
आगरा के 23 साल क्रिकेटर ध्रुव जुरेल के पिता नेम सिंह भारतीय सेना में रहे और हवलदार पद से रिटायर हुए. नेम सिंह जी चाहते थे कि ध्रुव नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) में शामिल हों और देश की सेवा करें, लेकिन क्रिकेट के प्रति ध्रुव का जुनून उन्हें एक अलग दिशा में ले गया। हालांकि ध्रुव के परिवार में पहले कोई भी क्रिकेट नहीं खेलता था, लेकिन ध्रुव की प्रतिभा को जल्दी ही पहचान लिया गया और उनके पिता ने उनके कौशल को विकसित करने के लिए कोच परवेंद्र यादव की मदद मांगी। वहीं अपने बेटे की सफलता से नेम सिंह जी बहुत ही रोमांचित हैं। वह इसे एक सपने के सच होने के रूप में मानते हैं और ध्रुव का समर्थन करने वाले सभी लोगों के आभारी हैं।
बेटे के संघर्ष में मां का है अहम योगदान
घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के बाद भी ध्रुव के माता-पिता ने किसी भी मुश्किल को ध्रुव की कामयाबी के आड़े नहीं आने दिया। ध्रुव के लिए पहला क्रिकेट किट खरीदने के लिए उनकी मां ने अपनी एकमात्र सोने की चेन भी गिरवी रख दी थी लेकिन ध्रुव दृढ़ निश्चयी रहे और कड़ी मेहनत करते रहे। ध्रुव की इसी लगन और मेहनत का नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है।
ध्रुव जुरेल ने अब तक खेले कुल 15 मैच
ध्रुव जुरेल के पास ज्यादा मैचों का अनुभव नहीं है। उन्होंने केवल 15 मैच खेले हैं। जिनमें ध्रुव ने 790 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 5 अर्धशतक शामिल हैं। इस दौरान विकेट के पीछे उन्होंने 2 स्टंप किए हैं। जबकि 34 कैच पकड़े हैं।
गुजरात के राजकोट में गेमिंग जोन में 27 मौतों के बाद यूपी अलर्ट मोड पर है। इसके साथ ही नोएडा के किड्ज गेमिंग जोन का गौतमबुद्धनगर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने प्रदीप कुमार चौबे ने निरीक्षण किया। इस दौरान गेमिंग जोन की सुरक्षा व्यवस्था को बारीकी से जांचा-परखा भी गया। इसके साथ ही अग्निशमन विभाग, मनोरंजन अधिकारी, विद्युत सुरक्षा विभाग की ओर जिले के सभी गेमिंग जोन में जांच अभियान अभियान चलाया गया। दो दिन चले जांच अभियान में सामने आया है कि नोएडा के 27 में चार गेमिंग जोन बिना फायर एनओसी के खिलाफ चल रहे थे। चारों गेमिंग जोनों के संचालकों को मंगलवार को नोटिस दिया गया है। बुधवार को सभी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जा सकती है।
इन मॉल के गेमिंग जोनों का किया गया निरीक्षण
जिले में सेक्टर-18 स्थित माल आफ इंडिया, सेक्टर-38ए स्थित जीआइपी, फन सिटी, स्पेक्ट्रम माल, स्मैश, टिंगलैंड, मिरर मांज, स्नोवल्ड, द हिंडन आवर, वेदा एंडवचैर, पीवीआर लाजिक्स, मिस्टीरियस रुमस, नोएडा प्ले बॉक्स, टाइम जोन, कोड ब्रेक नोएडा, अप्पू घर एक्सप्रेस सहित नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई शापिंग मॉल में गेमिंग जोन है। मंगलवार को नोएडा के ब्लू सफायर मॉल स्थित अमीबा गैलेक्सी, सेक्टर-129 स्थित स्मैश गुलशन मॉल, सेक्टर-132 स्थित रोहिल्लापुर में क्लाइंब सिटी, गौर सिटी माल स्थित टाइम जोन, हैमलेस, ईस्ट लंदन टायज, एलइडी किड्स, रिले एंड पार्टी कार्निवल गैलेक्सी, ग्रेटर नोएडा के ग्रैंड वेनिस माल स्थित स्काई वाक, स्नो मस्ती, मस्ती ट्रैंपोलिन पार्क, ग्रेटर नोएडा के ओमेक्स कनाट प्लेस स्थित आमोद का निरीक्षण किया गया।
बिना अनुमति चल रहे 4 गेमिंग जोन बंद
अग्निशमन विभाग की ओर से जांच में सामने आया है कि जिले में 27 गेमिंग जोन हैं। इनमें चार बिना अनुमति के चल रहे थे। सेक्टर-41 डायमंड, सेक्टर-104 स्थित हिंग, सेक्टर-75 स्थित स्पेक्ट्रम माल और गौर सिटी माल के अंदर एक गेमिंग जोन बिना अनुमति संचालित होता मिला है। इन गेमिंग जोन को बंद करा दिया गया है। प्रवेश मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। निरीक्षण के दौरान सभी अधिकारियों द्वारा गेमिंग जोन के संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वह सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रखें। क्षमता से अधिक व्यक्तियों को जोन में प्रवेश न दिया जाएं।
बिना फायर एनओसी चल रहे अस्पतालों पर भी होगी कार्रवाई
अग्निशमन विभाग द्वारा स्वास्थ्य विभाग को बिना फायर एनओसी चल रहे 50 अस्पताल की लिस्ट सौंपी है। डिप्टी सीएमओ डॉ. चंदन सोनी का कहना है कि जांच के दौरान पता चला है कि फायर विभाग की ओर से जनवरी में निरीक्षण किया गया था। इसके बाद नौ अस्पतालों ने फायर उपकरण दुरुस्त कराते हुए एनओसी प्राप्त कर ली है। वहीं 17 अस्पतालों ने एनओसी के लिए आवेदन कर रखा है। बाकी बचे हुए 23 अस्पतालों की लिस्ट झोलाछाप और बिना पंजीकरण चल रहे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकृत डा. जैसलाल को सौंपी है। जिन अस्पतालों ने आवेदन कर रखा है। वहां भी निरीक्षण कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। विभाग मानकों की भौतिक जांच करेगा। गड़बड़ी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग को लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति करेंगे। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा द्वारा बिना फायर एनओसी चल रहे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देशत किया गया है। बता दें कि जिले के अधिकतर निजी अस्पतालों के लाइसेंस नवीनीकृत हो गए हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ इससे राहत मिलने वाली नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी आडिट शुरू होने वाला है। इनमें फेल होने पर लाइसेंस को खतरा हो सकता है।
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