इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया ने 4-1 से जीत हासिल की। पहला टेस्ट गंवाने के बाद टीम इंडिया ने अगले चारों मैच जी-तोड़ मेहनत करके जीते और इसके साथ ही वो टेस्ट रैंकिंग और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में भी नंबर 1 पोजिशन पर पहुंच गई। वहीं टीम की जीत और देश की खुशी के साथ-साथ ये खुशी देने वाले खिलाड़ियों की निजी जिंदगी में भी मुश्किलें आईं, जिनका शायद अब तक किसी को पता भी नहीं चला। तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि आखिर हुआ क्या था राजकोट टेस्ट के दौरान ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन अचानक टीम इंडिया का साथ छोड़कर चेन्नई चले गए थे। दरअसल अश्विन की मां की तबीयत खराब थी और इसके बाद उन्हें चार्टेड प्लेन से घर भेजा गया था। अश्विन ने अब बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि इस दौरान उनकी सबसे ज्यादा मदद रोहित शर्मा ने की।
यूट्यूब वीडियो में बताई दिल की बात
अश्विन ने यूट्यूब वीडियो में बताया कि वो राजकोट में थे और उन्होंने अपनी मां की तबीयत जानने के लिए डॉक्टर को वीडियो कॉल किया। वो अपनी मां को देखना चाहते थे, लेकिन डॉक्टर ने अश्विन को बताया कि उनकी मां अभी उस हालत में नहीं है कि उन्हें वीडियो कॉल में दिखाया जा सके। इसके बाद अश्विन रुआंसे हो गए, कुछ देर बाद अश्विन के कमरे में रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ आए। अश्विन परेशान थे क्योंकि उन्हें राजकोट से बाहर जाने के लिए कोई फ्लाइट नहीं मिल रही थी और उन्हें तुरंत चेन्नई जाना था। इसके बाद रोहित शर्मा ने उनके लिए चार्टेड प्लेन का इंतजाम कराया और फिर दो लोगों को अश्विन के साथ रखा। रोहित ने जिस तरह से अश्विन का ख्याल रखा वो ये सब देखकर स्तब्ध थे।
"इस मतलबी दुनिया में एक इंसान ऐसा भी है जो औरों के बारे में सोचता है"
अपने मुश्किल समय में मदद करने वाले रोहित शर्मा की तारीफ करते हुए आर अश्विन ने कहा "कि उन्होंने भारतीय कप्तान जैसा इंसान नहीं देखा। रोहित का दिल बहुत अच्छा है। एक खिलाड़ी जिसके पास पांच आईपीएल टाइटल हैं, ये इतना आसान काम नहीं है। उन्हें इससे भी ज्यादा मिलना चाहिए और भगवान उन्हें देगा। इस मतलबी दुनिया में एक इंसान ऐसा भी है जो औरों के बारे में सोचता है, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।"
टीम इंडिया को टी-20 चैंपियन बनाकर कोच राहुल द्रविड़ महान खिलाड़ी के साथ ही महान कोच भी बन गए हैं। लेकिन ये सफर आसान नहीं था। हम जानते हैं कि जब राहुल द्रविड कोच बनाए गए थे, तो उस समय ड्रेसिंग रुम से कोच को लेकर काफी नेगेटिव चर्चाएं चल रही थीं। लेकिन फिर राहुल द्रविड़ ने टीम को संभाला और आज टीम इंडिया विश्व चैंपियन बन गई है। अपने सफर को लेकर राहुल द्रविड़ ने काफी कुछ शेयर किया, जिसे बीसीसीआई ने शेयर किया है।
‘The sacrifices, The commitment, The comeback’
राहुल द्रविड ने कहा कि टीम के अच्छा माहौल बेहद जरुरी है, उन्होंने कहा कि उनका फोकस था कि वो खिलाड़ियों के लिए एक सुरक्षित माहौल बना सके और टीम में बहुत अधिक बदलाव नहीं करना चाहते क्योंकि उनका मानना है कि इससे टीम में बहुत अधिक अराजकता पैदा होती है। वो कहते हैं कि मैं एक ऐसी टीम का हिस्सा हूं, जिसकी जिम्मेदारी सही खेल और शानदार माहौल बना रहे, जिसमें विफलता का डर न हो, लेकिन लोगों को आगे बढ़ाने के लिए यह काफी चुनौती हों। मैं ऐसा व्यक्ति हूं जो निरंतरता पसंद करता है और बहुत सी चीजों को बदलना पसंद नहीं करता क्योंकि मेरा मानना है कि इससे बहुत अधिक स्थिरता नहीं आती है और बहुत अच्छा माहौल नहीं बनता है।
शुरु मे 6 कप्तानों के साथ किया काम
कोच राहुल द्रविड ने टीम के साथ ढाई साल से ज्यादा का समय बीताया। इस दौरान कैसे शुरु में उन्हें करीब 6 कप्तानों के साथ काम करना था और एक ही समय पर दो भारतीय टीम विश्व के अलग-अलग हिस्से में खेल रही थी, इसपर अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने कहा कि 'हमने पिछले एक साल में लाल गेंद और सफेद गेंद दोनों तरह के क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों को बहुत सारे अवसर दिए। बहुत से लोगों को टीम में शामिल किया। यह देखकर खुशी हुई कि उन्होंने कितनी जल्दी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ तालमेल बिठाया और इन युवा खिलाड़ियों ने आते ही जिस तरह का प्रदर्शन किया। जब कुछ वरिष्ठ खिलाड़ी आराम कर रहे थे और मुझे यकीन है कि उन्हें उनके अवसर मिलेंगे। मुझे लगता है कि यह सबसे कठिन काम रहा है। उससे मुझे लगता है कि यह टीम के साथ-साथ रणजी ट्रॉफी और जिस तरह का घरेलू क्रिकेट खेला जा रहा है, उसको भी मदद करेगा'।
इंग्लैड सीरीज परीक्षा की घड़ी थी
राहुल द्रविड ने कहा, 'इस समय घरेलू मैदान पर इंग्लैंड की सीरीज 1-0 से हारने के बाद सीरीज जीतने और फिर चोट और अन्य कारणों से कई खिलाड़ियों को खोने, ग्रुप में आने के लिए कई युवा खिलाड़ियों पर निर्भर रहने और फिर उस सीरीज को 4-1 से जीतने के साथ-साथ यह भी महसूस किया कि कोचिंग स्टाफ और एक समूह के रूप में हमारी परीक्षा हुई और हमें चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मुझे लगता है कि सीरीज के दौरान शायद हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का अहसास हुआ। सरफराज खान, ध्रुव जुरेल और देवदत्त पड्डिकल ने भारत के लिए जीत सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण पारियां खेलीं'।
राहुल द्रविड़ भारतीय क्रिकेट टीम को विश्व चैंपियन बनाने वाले राहुल द्रविड़ को पूरे देश से सराहना मिली। राहुल द्रविड़ का कार्यकाल तो पिछले साल वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप के बाद ही पूरा हो गया था, लेकिन टी-20 विश्वकप 2024 तक के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया था और उसका परिणाम सभी ने देखा। लेकिन अब राहुल द्रविड़ के लिए भारत रत्न की मांग की गई है। वो भी लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर ने...
'द वॉल' को मिले भारत रत्न
राहुल द्रविड़ भारतीय टीम के सबसे पसंदीदा कोच रहे हैं। क्रिकेट जगत से अब तक सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न से नवाजा गया है, लेकिन अब सुनील गावस्कर ने मांग की है कि राहुल द्रविड़ को भी भारत रत्न मिलना चाहिए। हालांकि उनका कहना है कि ऐसा कोच के पद के लिए नहीं बल्कि कप्तान और खिलाड़ी के तौर पर होना चाहिए।

सुनील गावस्कर ने भारत सरकार से आग्रह करते हुए कहा, "यह उचित होगा यदि सरकार राहुल द्रविड़ को भारत रत्न से सम्मानित करे और वे इसके हकदार भी हैं। वे एक महान खिलाड़ी और कप्तान रहे। उन दिनों वेस्टइंडीज में सीरीज जीतना आसान नहीं था और वे ऐसे केवल तीसरे भारतीय कप्तान भी रहे। जिन्होंने इंग्लैंड में जाकर इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज जीती हो। उन्होंने नेशनल क्रिकेट अकादमी में नए टैलेंट को उभारने का काम बखूबी किया और सीनियर टीम के एक बढ़िया कोच भी रहे।"
साल 2014 में की कोचिंग की शुरुआत
राहुल द्रविड़ एक महान खिलाड़ी रहे, फिर वो साल 2014 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के मेंटर रहे थे। साल 2015 में उन्हें अंडर-19 और इंडिया-ए टीम का हेड कोच नियुक्त किया गया। उनके कोच रहते अंडर-19 टीम 2016 के वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची, लेकिन जीत नहीं पाई। लेकिन उसके 2 साल बाद टीम इंडिया ने ट्रॉफी उठाकर ही दम लिया। इस दौरान उन्होंने ऋषभ पंत, वॉशिंग्टन सुंदर और ईशान किशन जैसे फ्यूचर स्टार्स को तैयार किया। आखिरकार 2019 में उन्हें भारत की सीनियर टीम का कोच नियुक्त किया गया।
खिलाड़ी राहुल द्रविड़ का करियर शानदार

राहुल द्रविड़ के व्यक्तिगत करियर पर नजर डालें, तो उन्होंने 164 टेस्ट मैचों में 13,288 रन बनाए. उन्होंने 344 वनडे मैचों में 10,889 रन भी बनाए हैं। राहुल द्रविड़ के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 24 हजार से अधिक रन हैं और तीनों फॉर्मेट में मिलाकर दुनिया में सातवें सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में उनके नाम 48 शतक और 146 फिफ्टी भी हैं।
भारतीय क्रिकेट के पूर्व कोच राहुल द्रविड़ ने एक बार फिर से सभी का दिल जीत लिया है। उनकी ‘बराबरी की नीति’ को सभी लोग सलाम कर रहे हैं। हेड कोच के तौर पर टीम इंडिया को टी20 वर्ल्ड कप जिताने वाले राहुल द्रविड़ ने बड़ा दिल दिखाते हुए बीसीसीआई की ‘एक्स्ट्रा प्राइज मनी’ को लेने से इंकार किया है।
BCCI ने किया था 125 करोड़ के ईनाम का ऐलान

BCCI सचिव जय शाह ने टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम को वतन लौटने के बाद मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में 125 करोड़ के चेक से सम्मानित किया था। खिलाड़ियों और हेड कोच राहुल द्रविड़ को 5-5 करोड़ रुपये और सपोर्ट स्टाफ को 2.5-2.5 करोड़ रुपये। सपोर्ट स्टाफ में बैटिंग कोच विक्रम राठौर, बॉलिंग कोच पारस महाम्ब्रे और फील्डिंग कोच टी दिलीप समेत अन्य लोग शामिल हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल द्रविड़ ने बीसीसीआई से कहा कि वो भी 2.5 करोड़ रुपये ही लेंगे और बाकी पैसा अन्य स्टाफ सदस्यों के बीच बांट दिया जाए।
अंडर-19 टीम की जीत के बाद किया कर चुके हैं ऐसा

राहुल द्रविड ने ऐसा पहली बार नहीं किया है, वो साल 2018 में भारत द्वारा अंडर-19 वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीतने के बाद बीसीसीआई ने तत्कालीन कोच द्रविड़ के लिए 50 लाख रुपये, उनकी टीम के अन्य सदस्यों के लिए 20 लाख रुपये और खिलाड़ियों के लिए 30 लाख रुपये की प्राइज मनी देने की घोषणा की थी। तब भी राहुल द्रविड़ ने BCCI से प्राइज मनी को कोचिंग स्टाफ के बीच समान रूप से बांटने के लिए कहा था, जिसके बाद बोर्ड ने उनकी बात मानी भी थी।
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