लोकसभा चुनाव 2024 के अब 2 चरणों का चुनाव बाकी है। पांच चरण के चुनाव हो संपन्न हो चुके हैं। जीत को लेकर सभी पार्टियां दावे पेश कर रही हैं। सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने शुरु से ही नारा दिया हुआ था कि इस बार 400 पार, लेकिन चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कहना है कि इस बार बीजेपी की सीटें 370 तो नहीं आएंगी।
बीजेपी के लिए 370 सीटें हासिल करना असंभव है
प्रशांत किशोर ने कहा कि जिस दिन से पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी को 370 सीटें मिलेंगी और एनडीए 400 का आंकड़ा पार करेगा, मैंने कहा कि यह संभव नहीं है। यह सब कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए नारेबाज़ी है। बीजेपी के लिए 370 सीटें हासिल करना असंभव है, लेकिन यह भी निश्चित है कि पार्टी 270 के आंकड़े से नीचे नहीं जा रही है। मुझे लगता है कि भाजपा पिछले लोकसभा चुनाव में मिली संख्या के बराबर ही सीटें हासिल करने में सफल रहेगी, जो कि 303 सीटें या शायद उससे थोड़ी बेहतर है।
उन्होंने बताया है कि बीजेपी कैसे 300 का आंकड़ा पार करेगी। बंगाल, असम, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में बीजेपी की 15 से 20 सीटें बढ़ रही हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि हमें बुनियादी बातों पर गौर करना चाहिए। अगर मौजूदा सरकार और उसके नेता के खिलाफ गुस्सा है, तो भी संभावना है कि कोई विकल्प न होने की वजह से लोग उन्हें वोट देने का फैसला कर सकते हैं। अभी तक तो हमने नहीं सुना कि मोदीजी के खिलाफ व्यापक जनाक्रोश है। निराशा हो सकती है, आकांक्षाएं अधूरी रह सकती हैं, लेकिन हमने व्यापक गुस्से के बारे में नहीं सुना है।
विपक्ष ने खोया मौका
लोकसभा चुनाव का लगातार बातचीत जारी है। एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि कोई पहली बार ऐसा नहीं जब विपक्ष ने मौका खोया है। मैं पहले भी कह चुका हूं कि भारत जैसे देश में अगर आप विपक्ष में हैं तो यह मौका आपके पास हर एक-दो साल में आता है।
बिहार के गांवों को ढाई साल जायजा लेने के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) अपनी पार्टी 'जन सुराज' लॉन्च कर रहे हैं। पीके ने ऐलान किया है कि पार्टी की लॉन्चिंग के बाद भी जन सुराज पदयात्रा बिहार में जारी रहेगी। बता दें कि बिहार अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है। ऐसे में प्रशांत किशोर की पार्टी क्या रंग लाएगी यह तो वक्त ही बताएगा। पीके की जन सुराज पार्टी में पूर्व अधिकारियों से लेकर समाज के हर वर्ग के लोग जुड़े हैं। केंद्र में मंत्री रह चुके डीपी यादव, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद छेदी पासवान, पूर्व सांसद पूर्णमासी राम से लेकर मोनाजिर हसन तक कई बड़े नेता पीके की पार्टी से जुड़े हैं। इसके साथ ही सौ से अधिक पूर्व आईएएस और आईपीएस अधिकारी जुड़े हैं।प्रशांत किशोर ने एलान किया है कि 2025 में होने वाले विधानसभा में 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 40 विधानसभा सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी।
2014 में पीएम मोदी का चुनावी कैंपेन किया था डिजाइन
2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने तो सबसे ज्यादा चर्चा प्रशांत किशोर की हुई थी। पीके ने ही प्रधानमंत्री मोदी का चुनावी कैंपेन डिजाइन किया था। इसके बाद से ही आम लोगों के अलावा पॉलिटिकल पार्टियों की दिलचस्पी भी प्रशांत किशोर में बढ़ गई थी। कई दलों के लिए सफल रणनीति बनाकर अपनी पहचान बना चुके प्रशांत के पारिवारिक जीवन के बारे में कम ही लोग जानते हैं।
कौन हैं पीके और इनका पारिवरिक बैकग्राउंड क्या है
बिहार के रोहतास जिले में कोनार गांव के रहने वाले प्रशांत किशोर के पिता दिवंगत श्रीकांत पांडे डॉक्टर थे। प्रशांत किशोर के मुताबिक, जहां-जहां पिता की पोस्टिंग हुई, वहां के सरकारी स्कूल में शुरुआती पढ़ाई हुई थी। इसके बाद पटना साइंस कॉलेज चले गए। फिर हिंदू कॉलेज आ गए। लेकिन तबीयत खराब हुई तो पढ़ाई बीच में ही छोड़कर चले गए। इसके बाद ग्रेजुएशन लखनऊ से पूरा किया। प्रशांत किशोर फिर हैदराबाद होते हुए अमेरिका, भारत, दक्षिण अफ्रीका और फिर भारत आ गए। प्रशांत ने बताया था कि उन्होंने हर दो साल में पढ़ाई छोड़ दी थी। बारहवीं के बाद तीन साल छोड़ी, फिर ग्रेजुएशन के बाद दो साल। किसी तरह उन्हें यूएन में नौकरी मिल गई.गौरतलब है कि प्रशांत किशोर की पत्नी जाह्नवी दास असम की रहने वाली हैं और पेशे से डॉक्टर हैं। प्रशांत और जाह्नवी की मुलाकात यूएन के हेल्थ प्रोग्राम में हुई थी।कुछ समय बाद दोनों ने विवाह कर लिया था। जाह्नवी डॉक्टरी छोड़ बिहार में प्रशांत और बेटे के साथ ही रहती हैं।
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