Greater Noida: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ मेधा रूपम ने सेक्टर म्यू -2 का निरीक्षण किया। इस दौरान एसीईओ ने परियोजना विभाग को सेक्टर म्यू टू में सामुदायिक केन्द्र और दुकानें जल्द बनाने के निर्देश दिए।
सेक्टर में दुकानें भी बनेंगी
गौरतलब है कि प्राधिकरण की एसीईओ बुधवार सुबह करीब 8.30 बजे सेक्टर म्यू टू पहुंचकर निरीक्षण किया। दौरान प्राधिकरण का संबंधित स्टाफ और आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने सेक्टर की समस्याओं से एसीईओ को अवगत कराया। एसीईओ ने परियोजना विभाग को सेक्टर में सामुदायिक केंद्र और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दुकानों का निर्माण कराने के निर्देश दिए। पार्किंग के लिए खाली स्थान को विकसित करने सेक्टर म्यू टू के मेन गेट के पास सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराने के निर्देश दिए।

नियमित कूड़ा उठवाने के दिए निर्देश
इसके अलावा सेक्टर के अंदर से नियमित रूप से कूड़ा उठाने व सफाई कराने, सफाई कर्मियों की सूची आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों को उपलब्ध कराने, मुख्य द्वार पर सूचना पट्ट लगवाकर प्राधिकरण के संबंधित स्टाफ का नाम, पदनाम व मोबाइल नंबर लिखवाने, पार्कों में लगे झूलों व जिम की मरम्मत कराने, झूले व ओपन जिम के उपकरण न होने पर नए लगवाने, खाली प्लॉट की सफाई आदि के लिए निर्देश दिए। एसीईओ मेधा रूपम ने बताया कि इन सभी शिकायतों का निस्तारण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
Noida: स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 को लेकर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम. काफी प्रयास कर रहे हैं और शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में पहले पायदान पर खड़ा करने के प्रयास में जुटे हुए हैं। सीईओ लगातार जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। शहर की साफ-सफाई का जायजा ले रहे हैं। लेकिन इन सारी कोशिशों के बावजूद शहर की हालत सुधारने का नाम नहीं ले रही है। सेक्टरों और ग्रामीण क्षेत्रों में गंदगी का अंबार लगना शुरू हो गया है। शहर के निवासी सोशल मीडिया से लेकर प्राधिकरण दफ्तर जाकर शिकायत कर रहे हैं जिसको देखते हुए सीईओ लोकेश एम. ने सोमवार को अलग-अलग सेक्टरों में जाकर साफ-सफाई का जायजा लिया। सीईओ ने लापरवाही मिलने पर डीजीएम (जन स्वास्थ्य) एसपी सिंह को भी कड़ी फटकार लगाई है। वहीं, एक सुपरवाइजर को 6 महीने तक सेवा समाप्त कर दी है।
निरीक्षण के दौरान सफाई कर्मी नदारद, सड़क पर फैली मिली डस्ट
सीईओ लोकेश एम.ने निरीक्षण के दौरान सेक्टर-6 होते हुए सेक्टर-3, हरौला लेबर चौक, टी-सीरीज चौराहा, सेक्टर-19 से होते हुए डीएससी रोड, सेक्टर-29, सेक्टर-37, ग्राम अगाहपुर, सेक्टर-49 चौराहे से सेक्टर-41, सेक्टर-49, सेक्टर-50, सेक्टर-51, मेट्रो स्टेशन, सेक्टर-62 , खोड़ा रोड, सेक्टर-57, सेक्टर-22, सेक्टर-55 सेक्टर-8, और सेक्टर-11 का जायजा लिया। इस दौरान कहीं भी कोई सफाई कर्मचारी सड़क पर या अन्य किसी स्थान पर काम करता हुआ दिखाई नहीं दिया। डिवाइडर और फूटपाथ पर डस्ट पड़ी थी। इस डस्ट को ना तो मैकेनिकल स्वीपिंग के संविदाकार ने साफ किया और न ही उस क्षेत्र के सफाई कर्मियों की तरफ से साफ किया जा रहा है। इसके लिए उप महाप्रबंधक को कार्यवाही के के निर्देश दिए।
साफ-सफाई न मिलने पर सुपरवाइजर की सेवाएं समाप्त
सीईओ ने सेक्टर-18 में साफ-सफाई नहीं मिलने पर सुपरवाइजर की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। जन स्वास्थ्य विभाग के डीजीएम एसपी सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया। सीईओ ने डीजीएम से पूछा गया है कि क्यों न आपके खिलाफ शासन को संदर्भित किया जाए। सीईओ ने डीजीएम को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि बार-बार समीक्षा बैठक और निरीक्षण के बाद भी शहर में साफ-सफाई सही तरीके से नहीं हो रही है। शहर से लगातार साफ-सफाई को लेकर शिकायत आ रही हैं। सड़कों पर सफाई कर्मचारी नदारद हैं। उन्होंने आगे कहा कि अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यों का समुचित ढंग से सुपरवीजन नहीं किया है। डीजीएम शासकीय पदीय दायित्वों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसका जवाब दिया जाए।
ठेकेदार कर रहे पैसों का बंदरबांट
नोएडा की देश के स्वच्छता सर्वेक्षण-2023 में ओवरऑल सभी शहरों में रैंकिंग निराशाजनक आई थी। नेशनल रैंकिंग में नोएडा 14वें स्थान पर रहा। साफ-सफाई के लिए 949 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद शहर की रैंकिंग तीन पायदान गिर गई है। चार निजी कंपनियों पर सफाई की जिम्मेदारी है। कहने को शहर में 5,600 सफाई कर्मी लेकिन जानकारी मिली है कि धरातल पर ठेकेदारों ने इनके आधे कर्मचारी भी काम पर नहीं लगा रखे हैं। बाकी का पैसा बंदरबांट किया जा रहा है।
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