प्राधिकरण से बड़ी खबर सामने आ रही है। प्राधिकरण के OSD रविंद्र सिंह यादव पर बड़ी कार्रवाई की गई है। OSD रविंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया है। उन पर आय से अधिक संपत्ति का मामला है। मंत्री नंदी गोपाल नंदी ने रविंद्र सिंह पर कार्रवाई करते हुए मामले में विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
ग्रेटर नोएडा: एक तरफ जहां सरकार भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त है, वहीं शासन के नाक के नीचे ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। प्राधिकरण में तैनात एक नवनियुक्त ओएसडी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि इस नवनियुक्त ओएसडी को प्राधिकरण में मलाईदार विभाग क्या मिले, साहब ने भ्रष्टाचार के नए आयाम ही तय कर दिए। ओएसडी पर आरोप है कि उन्होंने हर काम के लिए रिश्वत के नए दाम ही तय कर दिए हैं। यानि जब तक आवंटी या ठेकेदार सेट परसेंटेज नहीं देगा तब तक उसकी फाइल क्लियर नहीं होगी। भ्रष्टाचार में ओएसडी को प्राधिकरण के भ्रष्ट अधिकारियों और बाबुओं का भी पूरा साथ मिल रहा है। आलम ये है कि प्राधिकरण में तैनात दूसरे ओएसडी को एक तरह से कार्य मुक्त कर दिया गया है, यानि सारे विभाग जिनका सरोकार सीधे जनता से है, ऐसे अहम कार्यों की जिम्मेदारी सिर्फ इसी भ्रष्ट ओएसडी को दी गई है। जिससे प्राधिकरण के जुड़े ठेकेदारों और आवंटियों में रोष भी देखने को मिल रहा है। ओएसडी के भ्रष्ट तंत्र से पीड़ित ठेकेदार और आवंटियों ने इसकी शिकायत सीधे शासन को भेजने तक का मन बना लिया है।

भ्रष्ट OSD पर कार्रवाई कब?
अब सवाल ये उठता है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तैनात इस भ्रष्ट अधिकारी पर सरकार कब शिकंजा कसती है। जिससे जनता और विकास कार्यों से जुटे ठेकेदारों को राहत मिल सके।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट: बिल्डर्स के मनमाने रवैये से परेशान सोसायटी के निवासियों को राहत मिलती दिख रही है। मनमानी करने वाले बिल्डर्स पर प्राधिकरण ने कार्रवाई करने का मन बना लिया है। इसे लेकर चेतावनी भी बिल्डर्स को दी जा रही है। प्राधिकरण दफ़्तर में बिल्डर्स और बायर्स की बैठक हुई।
'तत्काल समस्याओं का हल करें बिल्डर'
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौड़ सिटी-2 स्थित व्हाइट ऑर्किड सोसायटी के निवासियों और बिल्डर प्रतिनिधि की बैठक प्राधिकरण के कार्यालय में हुई। इस दौरान प्राधिकरण के ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव ने बिल्डर प्रतिनिधि को निर्देश दिया कि निवासियों की समस्याओं को प्राथमिकता से निस्तारण किया जाए, नहीं तो बिल्डर पर कार्रवाई की जाएगी।

CEO के निर्देश पर बैठक
दरअसल, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रितु माहेश्वरी के निर्देश पर फ्लैट खरीदारों की समस्याओं को हल करने के लिए प्राधिकरण नियमित रूप से बिल्डर-बायर्स बैठक करवा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को व्हाइट ऑर्किड सोसायटी के निवासियों की भी बैठक हुई। ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सोसायटी के निवासियों और बिल्डर के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। निवासियों ने बताया कि सोसाइटी में बनी मार्केट में अवैध रूप से क्योस्क चल रहे हैं।
'मेंटिनेंस के नाम पर उगाही'
इस दौरान सोसायटी निवासियों ने बिल्डर पर गंभीर आरोप भी लगाए। लोगों का आरोप है कि बिल्डर निवासियों से जितना मेंटिनेंस के नाम पर चार्ज कर रहा है, उस हिसाब से सोसायटी को मेंनटेन नहीं किया जा रहा है। सोसाइटी के बेसमेंट में लीकेज की समस्या है। बिल्डर ऑडिट रिपोर्ट भी निवासियों से साझा नहीं कर रहा। बैठक में ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव ने बिल्डर प्रतिनिधियों को इन समस्याओं का शीघ्र समाधान कराने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक टावर से दो निवासी और बिल्डर के दो प्रतिनिधि की संयुक्त कमेटी बनाकर समस्याओं का निदान कराने के भी निर्देश दिये।
ग्रेटर नोएडा: उद्योगों के विकास में आड़े आ रही समस्याओं को लेकर प्राधिकरण कार्यालय में बैठक की गई। इस दौरान उद्यमियों की समस्याओं को सुना गया। बैठक में जिला उद्योग केंद्र से जुड़े अलग-अलग संगठन के उद्यमियों ने हिस्सा लिया। जिन्होंने औद्योगिक भूखंडों की मांग करते हुए उन्हें समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान प्राधिकरण के ओएसडी विष्णु राज ने उद्यमियों की समस्याओं को सुनते हुए उन्हें जल्द निस्तारण करने का आश्वासन दिया।
ग्रेटर नोएडा: जिन आवंटियों ने समय पूरा होने के बाद भी अभी तक उद्योग नहीं लगाया प्राधिकरण उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई करने जा रही है। ऐसे आवंटियों के आवंटन को रद्द करने के निर्देश दिए गये हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी ने निर्देश देते हुए कहा कि जिन आवंटियों को अंतिम नोटिस भेजी जा चुकी है, उसके बावजूद उन्होंने उद्योग नहीं लगाया, ऐसे आवंटियों के आवंटन को तत्काल रद्द कर दिया जाए।
दूसरे निवेशकों को उद्योग लगाने का मिलेगा मौका
सीईओ रितु माहेश्वरी ने कहा कि आवंटन रद्द होने के बाद उन भूखंडों को दूसरे निवेशकों को आवंटित किया जाए, ताकि उद्योग लग सके और रोजगार का अवसर बढ़े।
धनराशि नहीं जमा तो भी रद्द होगा आवंटन
सीईओ रितु माहेश्वरी ने स्कीमों की समीक्षा करते हुए कहा कि जिन आवंटियों ने धनराशि जमा करा दी है, उनकी लीज डीड की प्रक्रिया तत्काल संपन्न कराएं। जबकि जिनका धनराशि नहीं जमा और अंतिम तारीख़ निकल चुकी है, ऐसे आवंटियों का भी आवंटन तत्काल रद्द करने के निर्देश दिया गया है।
वेयर हाउस स्कीम लाने की तैयारी
उधर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण जल्द ही वेयर हाउस स्कीम लाने की तैयारी कर रहा है। वेयर हाउस स्कीम ईकोटेक-16 में लाया जाएगा। जिसके लिए भूखंडों को चिन्हित किया जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा: पिछले 52 दिन से किसान प्राधिकरण के बाहर धरना दे रहे हैं। गुरुवार रात 8 बजे ग्रेटर नोएडा सीईओ रितु माहेश्वरी और किसानों की बीच बातचीत विफल हो गई। इस दौरान मौजूद रहे विधायक तेजपाल नागर भी किसानों को समझाने में नाकाम रहे। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे किसानों ने उनके जेल में बंद उनके साथी किसानों को छोड़ने की मांग की। हालांकि विधायक ने किसानों को लाख समझाने का प्रयास किया कि वो अभी रात में धरना खत्म कर दें, सुबह उनके साथियों को छोड़ दिया जाएगा। इसके बावजूद किसानों ने विधायक की भी बात नहीं सुनी।
विधायक से नाराज़ दिखे किसान
किसानों ने कहा कि विधायक जनप्रतिनिधि हैं, इसके वाबजूद वो किसानों की तरफ़ से कम, अथॉरिटी अफसरों की तरफ से बोलते दिखे। किसानों का आरोप था कि विधायक की रूचि केवल धरना ख़त्म करवाने में थी, ना कि किसानों की समस्या सुलझाने में।

अथॉरिटी से बातचीत बेनतीजा
अथॉरिटी की तरफ़ से किसानों के प्रतिनिधियों को अंदर बातचीत के लिये बुलाया गया था। किसानों की बातचीत रितु माहेश्वरी की मौजूदगी में उनके कार्यालय में शुरू हुई। इससे पहले विधायक मास्टर तेजपाल सिंह भी किसानों और अधिकारियों के बीच मसले को सुलझाने पहुंचे। विधायक ने किसानों के सामने धरना ख़त्म करने का प्रस्ताव रखा। इस दौरान करीब आधे घंटे विधायक और रितु माहेश्वरी की भी बातचीत हुई। इसके बाद तय हुआ कि किसानों के एक प्रतिनिधि दल को अंदर बुलाया जाए।
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को शासन ने बड़ा आदेश दिया है। राज्य के औद्योगिक विकास एवं अवस्थापना आयुक्त (आईडीसी) मनोज कुमार सिंह ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी और उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) समेत सभी प्राधिकरणों को आदेश दिया है कि आवंटियों को भूमि आवंटन के सापेक्ष बकाया व भुगतान की जानकारी ऑनलाइन मिलनी चाहिए। आईडीसी ने कहा है कि आवंटियों को अथॉरिटी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे आम आदमी और और उद्यमियों को परेशानी होती है।
सभी प्राधिकरणों के लिए आदेश जारी
यूपी के आईडीसी मनोज कुमार सिंह ने सभी विकास प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजा है। जिसमें उन्होंने लिखा है, “प्राधिकरणों के आवंटियों को अपने ऊपर बकाया की जानकारी पोर्टल पर ऑनलाइन नहीं दिख रही है। इस तरह की शिकायतें लगातार शासन को मिल रही हैं। संज्ञान में आया है कि आवंटियों को बार-बार प्राधिकरणों के चक्कर काटने पड़ते हैं। यदि यह व्यवस्था ऑनलाइन पोर्टल पर प्रदर्शित हो जाए और इसे लगातार अपडेटेड किया जाए तो आवंटियों को परेशानी नहीं होगी।
ग्रेटर नोएडा: जिला कलेक्ट्रेट और कोर्ट के आस-पास लगातार गंदगी की शिकायत मिल रही थी। जिसे देखते हुए सोमवार को सूरजपुर स्थित जिला कोर्ट और कलेक्ट्रेट के आस-पास का ACEO मेधा रूपम ने निरीक्षण किया। जहां पर सफाई व्यवस्था में खामी मिलने पर जिम्मेदार कंपनी साईंनाथ सेल्स एंड सर्विसेज पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही एसीईओ ने जन-स्वास्थ्य विभाग की टीम को कलेक्ट्रेट और जिला कोर्ट के आस-पास के एरिया को चमकाने के निर्देश दिए।

ACEO ने जन-स्वास्थ्य विभाग के साथ की बैठक
एसीईओ ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड रूम में जन-स्वास्थ्य विभाग के साथ समीक्षा बैठक की। जिसमें ACEO ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट देखी। साथ ही अस्तौली में बन रहे लैंडफिल साइट, डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन और मैकेनिकल स्वीपिंग समेत अन्य परियोजनाओं को अमली जामा पहनाने के निर्देश दिए।

साफ-सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश
एसीईओ ने ग्रेटर नोएडा की सफाई व्यवस्था को और दुरुस्त करने के भी निर्देश दिए। साथ ही सभी कांट्रैक्टर्स के साथ बैठक करने के भी निर्देश दिए। एसीईओ ने विभागीय अधिकारियों को ग्रेटर नोएडा की सफाई व्यवस्था में लगे स्टाफ के कार्यों की निर्धारित फॉर्मेट में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए।
ग्रेटर नोएडा: साफ-सफाई की व्यवस्था को बेहतरीन बनाने के लिए ग्रेटर-नोएडा प्राधिकरण ने कमर कसी ली है। अब प्राधिकरण उन लोगों के खिलाफ पेनाल्टी लगाने जा रही है, जो गंदगी फैलाते हैं। साफ-सफाई की व्यवस्था को बेहतरीन बनाने के लिए प्राधिकरण की एसीईओ मेधा रूपम ने गुरुवार को डोर-टू-डोर कलेक्शन करने वाली संस्थाओं ब्लू प्लेनेट, आईपीसीए और मैनुअल स्वीपिंग कर रही मेसर्स बिमलराज के साथ बैठक की।
गंदगी फैलाने वाली PG पर लगेगी पेनाल्टी
इस बैठक में RWA के पदाधिकारी भी शामिल हुए। उनसे सेक्टरों में साफ-सफाई से जुड़े मसलों पर फीडबैक लिए गये और प्राप्त सुझावों पर तुरंत अमल करने के निर्देश दिए गये। RWA के प्रतिनिधियों ने बताया कि आवासीय सेक्टर में चल रहे पीजी के चलते कूड़ों का ढेर लगा रहता है। जिस पर एसीईओ ने तत्काल निर्देश दिया कि ऐसी पीजी को चिन्हित कर उन पर पेनाल्टी लगाई जाए।
इन सेक्टरों में गंदगी फैलाने की शिकायत
इस बैठक में सेक्टर अल्फा वन व टू, बीटा वन व टू, सेक्टर गामा वन व टू, ओमीक्रॉन वन, वन ए, ओमीक्रॉन टूू व थ्री, पाई वन और टू के जनप्रधिनियों को बुलाया गया था। आने वाले दिनों में अन्य आरडब्ल्यूए और उस एरिया में सफाई व्यवस्था से जुड़ी फर्मों के साथ बैठक की जाएगी। बैठक में सेक्टरवासियों ने बताया कि पेइंग गेस्ट (पीजी) की वजह से बहुत दिक्कत हो रही है। पीजी का कूड़े का ढेर इधर-उधर लगा रहता है। इस पर एसीईओ ने जन स्वास्थ्य विभाग को इन पीजी को चिंहित कर पेनल्टी लगाने के निर्देश दिए।
ग्रेटर नोएडा: IITGNL की इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप में स्थित हायर अप्लायेंसेज ने पहले चरण की इकाई का निर्माण कर उत्पादन शुरू करने के बाद अब दूसरे चरण की इकाई बनाने का शुरू कर दिया है। IITGNL की एमडी रितु माहेश्वरी और प्राधिकरण की एसीईओ मेधा रूपम ने कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ दूसरे चरण की इकाई के निर्माण कार्य की आधारशिला रख दी है।

दूसरे चरण में 400 करोड़ का होगा निवेश
कंपनी के मुताबिक दूसरे चरण की विस्तार इकाई में करीब 400 करोड़ रुपये का निवेश होगा। जिसमें करीब 1000 युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। ये प्लांट करीब एक साल में बनकर तैयार हो जाएगा। इस प्लांट में इंजेक्शन मॉल्डिंग और शीट मेटल का निर्माण किया जाएगा। जो की वर्तमान में कार्यरत इकाइयों में ही इस्तेमाल होगा। ये हायर अप्लायेंसेज का चौथा प्लांट है।
1600 करोड़ का कंपनी कर चुकी है निवेश
इससे पहले एसी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन का प्लांट शुरू किया जा चुका है। हायर कंपनी को साल 2018 में 122 एकड़ का भूखंड आवंटित किया गया है। कंपनी प्रथम चरण में लगभग 1600 करोड़ रुपये का निवेश और करीब 2500 लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान कर चुकी है।
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