एक बार फिर एक खुमार पूरे देश के सिर चढ़ कर बोलने वाला है. आप तो समझ ही गए होंगे हम किस खुमार की बात कर रहे हैं. जी हां, हम अपने पसंदीदा खेल क्रिकेट की ही बात कर रहे हैं. भारत और इंग्लैंड के बीच 5 मैचों की टेस्ट सीरीज का तीसरा मुकाबला 15 फरवरी से राजकोट में खेला जायेगा. जो कि भारतीय समयानुसार सुबह 9.30 बजे से खेला जाएगा. इससे पहले शुरुआती 2 मुकाबलों तक यह सीरीज 1-1 से बराबरी पर है. वहीं इस मुकाबले से पहले भारतीय टीम काफी बदली हुई नजर आ रही है. दरअसल, दिग्गज प्लेयर विराट कोहली ने निजी कारणों से ब्रेक ले लिया है. जबकि केएल राहुल चोट के कारण तीसरा मैच नहीं खेलेंगे साथ ही श्रेयस अय्यर और अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी चोट के कारण सीरीज से ही बाहर हैं.
तीसरे टेस्ट में 2 नये खिलाडियों का डेब्यू तय
जहां तीसरे टेस्ट में तेज गेंदबाद जसप्रीत बुमराह को आराम दिया जाना लगभग तय है. तो वहीं सूत्रों की मानें तो जसप्रीत अब तक राजकोट भी नहीं पहुंचे हैं. जबकि चोट के बाद ठीक होकर लौटे अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के खेलने पर भी संशय बरकरार है. इस तरह अब फैन्स को राजकोट टेस्ट में भारत की एक नई और अलग ही युवा पीढ़ी की टेस्ट टीम खेलती नजर आएगी. इस टेस्ट में सरफराज खान का डेब्यू करना तय माना जा रहा है. जबकि बतौर विकेटकीपर ध्रुव जुरेल को मौका दिये जाने की संभावना है. यदि ऐसा होता है तो यह उनका डेब्यू मैच रहेगा.
4 खिलाड़ियों को छोड़कर नए पीढ़ी के खिलाड़ी
राजकोट टेस्ट में कप्तान रोहित शर्मा, जडेजा, कुलदीप और अश्विन के अलावा सभी नए पीढ़ी के प्लेयर खेलते नजर आएंगे. साथ ही चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे को तो सीरीज के लिए चुना ही नहीं गया था. ऐसे में BCCI का प्लान साफ है कि वो टेस्ट में भी एक नई पीढ़ी की टीम तैयार करना चाह रहे हैं. जिनमें युवा पीढ़ी के खिलाडियों में यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल, रजत पाटीदार, सरफराज खान, अक्षर पटेल मोहम्मद सिराज और मुकेश कुमार शामिल हैं और ध्रुव जुरेल/ केएस भरत (विकेटकीपर)के रूप में शामिल हो सकते हैं.
कुछ बनने का और देश के लिए कुछ करने का जज्बा तो हर एक में होता है लेकिन कुछ लोग ही होते हैं जो अपनी मेहनत और सच्ची लगन से केवल देश का ही नहीं अपने मां-बाप का सिर भी फख्र से ऊंचा कर पाते हैं. कामयाबी के शिखर पर पहुंचने वाले हर शख्स की संघर्ष की कहानी तो जरूर होती है मगर कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा और दुनिया के लिए मिसाल बन जाती हैं. आज हम ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी का जिक्र करने जा रहे हैं जो कि क्रिकेटर ध्रुव जुरेल और उनके माता-पिता की संघर्ष की कहानी भी है.
फौजी के बेटे का टीम इंडिया में डेब्यू
बता दें राजकोट टेस्ट में टीम इंडिया की ओर से एक नहीं दो खिलाड़ियों का टेस्ट डेब्यू देखने को मिला. उन्हीं में से एक हैं ध्रुव जुरेल. जो कि भारत के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाले 312वें खिलाड़ी भी है. विकेट कीपर बल्लेबाज ध्रुव जुरेल को तीसरे टेस्ट में केएस भरत की जगह मौका मिला है. दरअसल केएस भरत पहले दो टेस्ट में अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे, जिसके बाद उन्हें राजकोट में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच से बाहर कर दिया गया और ध्रुव जुरेल को मौका देकर दिनेश कार्तिक ने टेस्ट कैप दी. जानकारों की माने तो अगर ध्रुव राजकोट टेस्ट मैच में अपनी बेहतर छाप छोड़ते हैं तो उनके लिए आगे अवसर की झड़ी लग जायेगी क्योंकि राजकोट के बाद 2 और टेस्ट खेले जाने हैं. जिनमें उन्हें मौका मिल सकता है.
बेटे को आर्मी में देखने की थी पिता की ख्वाहिश
आगरा के 23 साल के क्रिकेटर ध्रुव जुरेल के पिता नेम सिंह भारतीय सेना में रहे और हवलदार पद से रिटायर हुए. नेम सिंह जी चाहते थे कि ध्रुव नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) में शामिल हों और देश की सेवा करें, लेकिन क्रिकेट के प्रति ध्रुव का जुनून उन्हें एक अलग दिशा में ले गया. हालांकि ध्रुव के परिवार में पहले कोई भी क्रिकेट नहीं खेलता था, लेकिन ध्रुव की प्रतिभा को जल्दी ही पहचान लिया गया और उनके पिता ने उनके कौशल को विकसित करने के लिए कोच परवेंद्र यादव की मदद मांगी. वहीं अपने बेटे की सफलता से नेम सिंह जी बहुत ही रोमांचित हैं. वो इसे एक सपने के सच होने के रूप में मानते हैं और ध्रुव का समर्थन करने वाले सभी लोगों के आभारी हैं.
बेटे के संघर्ष में मां का अहम योगदान
घर की आर्थिक स्तिथि ठीक ना होने के बाद भी ध्रुव के माता-पिता ने किसी भी मुश्किल को ध्रुव की कामयाबी के आड़े नहीं आने दिया.ध्रुव के लिए पहला क्रिकेट किट खरीदने के लिए उनकी मां ने अपनी एकमात्र सोने की चेन भी गिरवी रख दी थी लेकिन ध्रुव दृढ़ निश्चयी रहे और कड़ी मेहनत करते रहे। ध्रुव की इसी लगन और मेहनत का नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है.
ध्रुव जुरेल ने अब तक खेले कुल 15 मैच
ध्रुव जुरेल के पास ज्यादा मैचों का अनुभव नहीं है. उन्होंने केवल 15 मैच खेले है. जिनमें ध्रुव ने 790 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 5 अर्धशतक शामिल हैं. इस दौरान विकेट के पीछे उन्होंने 2 स्टंप किए हैं. जबकि 34 कैच पकड़े हैं.
इंग्लैंड के खिलाफ चल रहे तीसरे टेस्ट मैच में डेब्यू खिलाड़ी ध्रुव जरेल ने शानदार पारी खेली. ध्रुव ने मार्क वुड को सचिन के अंदाज में छक्का लगाकर बताया कि उनके अंदर क्या काबिलियत है. बता दें ध्रुव जुरेल ने रेहान अहमद की बॉल पर दो छक्के लगाए, वो हॉफ सेंचुरी की ओर बढ़ ही रहे थे कि 124वें ओवर में लेट कट खेलने के चक्कर में विकेट के पीछे कैच थमा बैठे. इस तरह से ध्रुव की पारी तो खत्म हुई, लेकिन 104 गेंदों पर 46 रन ठोककर उन्होंने खुद को मैदान में साबित कर दिया. इसके साथ ही ध्रुव जुरेल की कहानी भी बहुत संघर्षों वाली है वो भी आपको बताते है.
बेटे को आर्मी में देखने की थी पिता की ख्वाहिश
आगरा के 23 साल क्रिकेटर ध्रुव जुरेल के पिता नेम सिंह भारतीय सेना में रहे और हवलदार पद से रिटायर हुए. नेम सिंह जी चाहते थे कि ध्रुव नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) में शामिल हों और देश की सेवा करें, लेकिन क्रिकेट के प्रति ध्रुव का जुनून उन्हें एक अलग दिशा में ले गया। हालांकि ध्रुव के परिवार में पहले कोई भी क्रिकेट नहीं खेलता था, लेकिन ध्रुव की प्रतिभा को जल्दी ही पहचान लिया गया और उनके पिता ने उनके कौशल को विकसित करने के लिए कोच परवेंद्र यादव की मदद मांगी। वहीं अपने बेटे की सफलता से नेम सिंह जी बहुत ही रोमांचित हैं। वह इसे एक सपने के सच होने के रूप में मानते हैं और ध्रुव का समर्थन करने वाले सभी लोगों के आभारी हैं।
बेटे के संघर्ष में मां का है अहम योगदान
घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के बाद भी ध्रुव के माता-पिता ने किसी भी मुश्किल को ध्रुव की कामयाबी के आड़े नहीं आने दिया। ध्रुव के लिए पहला क्रिकेट किट खरीदने के लिए उनकी मां ने अपनी एकमात्र सोने की चेन भी गिरवी रख दी थी लेकिन ध्रुव दृढ़ निश्चयी रहे और कड़ी मेहनत करते रहे। ध्रुव की इसी लगन और मेहनत का नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है।
ध्रुव जुरेल ने अब तक खेले कुल 15 मैच
ध्रुव जुरेल के पास ज्यादा मैचों का अनुभव नहीं है। उन्होंने केवल 15 मैच खेले हैं। जिनमें ध्रुव ने 790 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 5 अर्धशतक शामिल हैं। इस दौरान विकेट के पीछे उन्होंने 2 स्टंप किए हैं। जबकि 34 कैच पकड़े हैं।
आईपीएल के नए सीजन का आगाज होने ही वाला है और हर क्रिकेट प्रेमी की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं। इस दौरान अगले दो महीनों तक इंटरनेशनल क्रिकेट से हर किसी का ध्यान भी हट जाएगा, लेकिन इन सबसे पहले अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने एक और बड़ा फैसला लिया है। आपको बता दें कि बीसीसीआई ने पिछले महीने ही मौजूदा इंटरनेशनल सीजन के लिए सेंट्रल कॉन्ट्रेक्ट्स का ऐलान किया था, जिसमें ईशान किशन और श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ियों को बाहर कर दिया गया था। वहीं अब बोर्ड ने इसमें थोड़ा बदलाव करते हुए 2 खिलाड़ियों को शामिल किया है, लेकिन ये खिलाड़ी ईशान या अय्यर नहीं बल्कि ध्रुव जुरेल और सरफराज खान हैं।
सरफराज-जुरेल ने एक साथ टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया
बीसीसीआई की सोमवार 18 मार्च को हुई एपेक्स काउंसिल की बैठक में टीम इंडिया के इन दो नए खिलाड़ियों सरफराज-जुरेल को कॉन्ट्रेक्ट देने पर मुहर लगा दी गई है। साथ ही इस बैठक में कई अन्य मामलों पर भी चर्चा हुई। आपको बता दें कि सरफराज और ध्रुव जुरेल ने एक साथ टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया था और दोनों को इंग्लैंड के खिलाफ हुई 5 मैचों की टेस्ट सीरीज से मौका मिला था। इस टेस्ट सीरीज में भारत के लिए 5 खिलाड़ियों ने टेस्ट डेब्यू किया। इसमें से राजकोट में खेले गए तीसरे टेस्ट में सरफराज और जुरेल को मौका मिला था और उसके बाद अपने प्रदर्शन के दम पर उन्होंने सीरीज के आखिरी 3 टेस्ट खेले। धर्मशाला में खेले गए 5वें टेस्ट मैच में भी दोनों को मौका मिला था और इसके साथ ही उनके सेंट्रल कॉन्ट्रेक्ट में आने का रास्ता साफ हो गया।
दोनों खिलाड़ियों को मिलेंगे सालाना 1 करोड़ रुपये
वहीं अगर बीसीसीआई के रिटेनरशिप नियमों की बात करें, तो इन नियमों के मुताबिक अगर कोई भी खिलाड़ी एक कॉन्ट्रेक्ट ईयर में 3 टेस्ट या 8 वनडे या 10 टी20 इंटरनेशनल खेलता है तो उसे सेंट्रल कॉन्ट्रेक्ट में जगह मिल जाती है। ध्रुव और सरफराज ने ये शर्त पूरी की और उन्हें सीधे C-ग्रेड में एंट्री मिली। ये ग्रेड बोर्ड के 4 ग्रेड में सबसे नीचे है लेकिन इसमें आने वाले खिलाड़ियों को भी 1 साल के 1 करोड़ रुपये मिलते हैं, और अब सरफराज-जुरेल को भी ये रकम दी जाएगी।
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