उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पहले डिप्टी-सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अगले विधानसभा चुनाव में जीत से जुड़ा फॉर्मूला ढूंढ निकाला है। मौर्या ने गुरुमंत्र शुक्रवार को विधायकों को राजधानी लखनऊ में दिया। यूपी में भले ही विधानसभा के चुनाव 2027 में होने हो लेकिन लोकसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी बेहद एक्टिव दिख रही है।
उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अगले विधानसभा चुनाव के लिए विधायकों को खास मैसेज दिया। डिप्टी सीएम ने विधायकों से दो टूक कहा कि "2017 के फॉर्मूले के तहत ही 2027 में सपा को हराया जा सकता है. मौर्य ने सभी एमएलए को संदेश दिया कि वे 2017 के हिसाब से सोशल इंजीनियरिंग करें। समाज के दबे कुचले वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के साथ उनकी बात ठीक से सुनें। बता दें कि बीजेपी के सारे विधायक सीएम योगी आदित्यनाथ से भेंट के बाद मौर्य से मिलने पहुंचे थे।
केशव मौर्या के बाद अब ब्रजेश पाठक ने सीएम योगी की बैठक से बनाई दूरी
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के बाद दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठक से नदारद रहे। इससे पहले बृहस्पतिवार को केशव भी प्रयागराज मंडल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। इसे लेकर सियासी गलियारों में तमाम चर्चाएं हो रही हैं। योगी ने शुक्रवार को लखनऊ मंडल के सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों के साथ लोकसभा चुनाव के नतीजों की समीक्षा के दौरान कहा कि विपक्ष की ओर से सोशल मीडिया के जरिए फैलाए जा रहे अफवाहों और सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने के प्रयास का मुखर होकर विरोध करें। सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए विपक्ष के हर झूठ को बेनकाब करें और जनता के बीच सच लेकर जाएं।मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि अपने अपने क्षेत्र में युवाओं और महिला संगठनों से संपर्क और संवाद स्थापित करें। युवाओं को बताएं कि बिना किसी रिश्वत और जाति, मत, मजहब के भेद के निष्पक्ष तरीके से सरकारी नौकरियां प्रदान की जा रही है। ऐसे युवाओं से संपर्क स्थापित करें जिन्हें बिना भेदभाव और रिश्वत के नौकरी मिली हैं।
सरकार से बड़ा संगठन बयान देकर यूपी में सियासी हलचल मचाने वाले के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बयान अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा है। इस बयान के खिलाफ दाखिल पीआईएल पर हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई पूरी कर ली और फैसला सुरक्षित कर लिया है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने उप मुख्यमंत्री के इस बयान को लेकर इसके संवैधानिक पक्ष पर याची के अधिवक्ता को सुना।
14 जुलाई को केशव मौर्या ने दिया था बयान
कोर्ट ने याची के वकील को सुनने के बाद न तो सरकार से इस मामले पर उनका पक्ष जानने के लिए उनसे कुछ पूछा और न ही डिप्टी सीएम को कोई नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि वह इस याचिका पर उपयुक्त आदेश देगी। याचिका को अधिवक्ता मंजेश कुमार यादव ने दाखिल किया है। याचिका के अनुसार 14 जुलाई को डिप्टी सीएम ने सरकार और संगठन पर बयान दिया था। जिसमें उन्होंने संगठन को सरकार से बड़ा बताया था। बाद में एक्स पर यही बात पोस्ट भी की।
डिप्टी सीएम की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
याची ने कहा है कि केशव मौर्य का यह कहना कि सरकार से बड़ा संगठन होता है, उनके पद की गरिमा को कम करता है। साथ ही सरकार की पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न करता है। यह भी कहा कि भाजपा, राज्यपाल और चुनाव आयोग की ओर से कोई प्रतिक्रिया या खंडन न करना इस मुद्दे को और जटिल बनाता है। याचिका में केशव मौर्य के आपराधिक इतिहास का भी जिक्र किया गया। कहा गया कि उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से पहले उन पर सात आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। इसलिए ऐसे आपराधिक रिकॉर्ड वाले किसी व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त करना गलत है।
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