लोकसभा चुनाव का रण तैयार है। सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी बिसातें भी बिछा ली हैं। वहीं एक पार्टी ऐसी हैं जिसको या तो खुद के गहन मंथन और विचार के बाद घोषित किए उम्मीदवार पर या तो भरोसा नहीं है या फिर पार्टी के वरिष्ठ नेता ही गुटबाजी का शिकार हो गए हैं। जहां लोकसभा चुनाव की नजरों से देखा जाए तो गौतमबुद्ध नगर सीट एक अहम सीट मानी जाती है। तो वहीं दूसरी ओर सपा इस सीट को या तो हल्के में ले रही है या फिर इस सीट से पार्टी इस बार भी हार का पताका लहराना चाहती है। साफ तौर पर देखा जाए तो पार्टी में मौजूद कद्दावर नेता भी यहां से घोषित उम्मीदवार राहुल अवाना के साथ दिखाई नहीं दे रहे हैं। तो ऐसे में इसका नतीजा क्या होगा ये आप समझ ही गए होंगे।
स्वागत कार्यक्रम से नदारद रहे पार्टी के कद्दावर नेता
दरअसल सपा प्रत्याशी राहुल अवाना को अपने चुनावी अभियान की गुरुवार से ही शुरूआत करनी थी। इस कारण उन्होंने नोएडा से दिल्ली की सीमा में जाकर यू-टर्न लिया और डीएनडी टोल प्लाजा पर स्वागत का कार्यक्रम रखा। वहीं नोएडा से प्रत्याशी बनने पर बड़ी संख्या में उनके समर्थक और गाड़ियों का काफिला इस स्वागत कार्यक्रम में शामिल हुआ, लेकिन इस काफिले में सपा का एक भी वरिष्ठ और कद्दावर नेता राहुल अवाना के साथ मंच पर नहीं दिखा। देखा जाए तो राहुल की क्षेत्र और युवाओं के बीच काफी बेहतरीन पकड़ हैं लेकिन वहीं दूसरी ओर पार्टी की अपने ही प्रत्याशी से दूरी दबे शब्दों में कुछ और ही बयां कर रही है। वहीं जिस तरह से इस कार्यक्रम की पूरे क्षेत्र में चर्चा रही तो साथ ही इस बात की चर्चा खूब हो रही है कि मंच पर कोई बड़ा नेता क्यों नहीं मौजूद था।
राहुल की कैसे होगी जीत जब पार्टी ही नहीं है साथ
आपको बता दें कि पार्टी ने पहले डॉक्टर महेंद्र नागर को 16 मार्च को गौतमबुद्ध नगर सीट से प्रत्याशी घोषित किया। इसके तीन दिन बाद ही पार्टी ने अपना फैसला बदल कर नागर की जगह युवा नेता राहुल अवाना को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। वहीं अब जब इस युवा को पार्टी के सभी कद्दावर नेताओं का पूरा-पूरा सहयोग मिलना चाहिए था तो वो कोई भी नहीं था। अपने प्रत्याशी के पहले चुनावी कार्यक्रम में नोएडा के समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष आश्रय गुप्ता, नोएडा सपा के महासचिव विकास यादव, पार्टी के पुराने नेता और नोएडा सपा के पूर्व अध्यक्ष बीर सिंह यादव यहां तक कि नोएडा में सपा के टिकट पर दो बार चुनाव लड़े सुनील चौधरी भी इस कार्यक्रम से नदारद रहे। देखा जाए तो इससे साफ दिखाई दे रहा है कि पार्टी किसी गुटबाजी का शिकार है। अब देखना होगा कि पार्टी की अपने ही प्रत्याशी से इतनी बेरुखी उसे अर्श पर ले जाती है या फिर फर्श पर लाकर पटक देती है।
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