सिनेमा जगत की दुनिया में कई बार स्टार्स खुद अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार लेते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है एक और एक्ट्रेस के साथ. जिसका नाम है पूनम पांडे शायद आप सबने सुना ही होगा. जिन्होंने हाल ही में पीआर स्टंट के लिए अपनी झूठी मौत की खबर उडाई. लेकिन अब यही पीआर स्टंट पूनम को भारी पड़ रहा है. दरअसल मौत की झूठी खबर फैलाने की वजह से पूनम पांडे के खिलाफ कानपुर में एक शिकायत दर्ज की गई है.
100 करोड़ की मानहानि का दावा
पूनम पांडे के खिलाफ सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर फैजान अंसारी ने शिकायत दर्ज कराई है। मुंबई से कानपुर आए फैजान अंसारी ने पूनम पांडे पर केस दर्ज कराने के लिए शिकायत में लिखा कि बीते दिनों पूनम पांडे और उनके पति के तरफ से सर्वाइकल कैंसर से मौत की झूठी खबर फैलाई जाने को लेकर बड़ी संख्या में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। फैजान ने 10 फरवरी को कानपुर कोर्ट में सौ करोड़ की मानहानि का वाद दाखिल किया और साथ ही पुलिस कमिश्नर से भी इस मामले की शिकायत की गई है.
पूनम के स्टंट के कारण हो रही जगहंसाई
2 फरवरी को मॉडल पूनम पांडे की पीआर टीम ने सर्वाइकल कैंसर से उनकी मौत की खबर इंस्टाग्राम पर दी थी. जिसके बाद 3 फरवरी को खुद पूनम पांडे ने अपना एक वीडियो शेयर किया. जिसमें वह कर रही थीं कि मैं हिंदू हूं, सर्वाइकल कैंसर से मेरी मौत नहीं हुई है, लेकिन दुख की बात यह भी है कि मेरी तरह वह लाखों-हजारों महिलाएं ऐसा नहीं कह सकती.जो हर साल इस बीमारी से मर जाती हैं. पूनम पांडे ने लोगों को सर्वाइकल कैंसर से जागरूक करने के लिए ऐसा किया था. लेकिन पूनम के पीआर स्टंट के बाद सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस की जहां एक ओर जमकर आलोचना हो रही है. तो वहीं कई सेलेब्स ने पूनम पांडे के इस पीआर स्टंट को सबसे भद्दा बताया है.
Pryagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 498 ए को स्पष्ट करते हुए कहा है कि पति के खिलाफ 'दूसरी पत्नी' घरेलू हिंसा का केस नहीं कर सकती है। इसके लिए पहले शादी वैध होनी चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 498 ए को स्पष्ट करते हुए कहा है कि पति के खिलाफ 'दूसरी पत्नी' घरेलू हिंसा का केस नहीं कर सकती है। कोर्ट का मानना है कि इसके लिए पहले दोनों की शादी वैध होनी चाहिए। हालांकि दहेज मांगने पर उस अधिनियम के तहत केस हो सकता है।
दहेज के लिए विवाह आवश्यक नहीं
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दहेज के लिए विवाह आवश्यक नहीं है। किसी पुरुष महिला ने शादी तय की है तो भी दहेज अधिनियम में केस दर्ज हो सकता है। न्यायमूर्ति न्यायाधीश अरुण कुमार देशवाल ने धारा 498-ए, 323, 504, 506 और धारा 3/4 के तहत दर्ज मामले के संबंध में आरोप पत्र की पूरी कार्यवाही के साथ-साथ समन आदेश को चुनौती देने वाली पति और उसके परिवार के सदस्यों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शादी में दिए जाने वाले उपहारों की सूची बनाई जानी चाहिए। उस पर वर व वधू पक्ष के हस्ताक्षर भी होने चाहिए। इससे लोग दहेज के निरर्थक मुकदमों से बच सकेंगे। जस्टिस विक्रम डी चौहान ने अंकित सिंह व अन्य की ओर से दायर वाद की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
जस्टिस चौहान ने कहा, दहेज की मांग के आरोपों से जुड़े मामलों में पक्षकार याचिकाओं के साथ उपहारों की सूची नहीं दे रहे हैं। ऐसे में दहेज निषेध अधिनियम अक्षरशः लागू करने की जरूरत है ताकि लोग निरर्थक मुकदमेबाजी से बच सकें। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा, क्या दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत कोई नियम बनाया है, यदि नहीं तो विचार करे। अगली सुनवाई 23 मई को होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार को ऐसे कानून बनाने पर विचार करने की सलाह दी है।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों द्वारा कांवड़ मार्ग पर स्थित दुकानदारों को नामपट्टिका लगाने के आदेश पर अंतरिम रोक जारी रखी है। कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों के मालिकों के नाम पट्टिका लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने 22 जुलाई के आदेश को जारी रखा है। 22 जुलाई को कोर्ट ने कहा था कि दुकानदारों को अपना नाम बताने की जरूरत नहीं है। वे सिर्फ यह बताएं कि उनके पास कौन-से और किस प्रकार के खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश को जारी रखा
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान रेस्टोरेंट के मालिकों और कर्मचारियों की नेम प्लेट लगाने का आदेश जारी किया गया था। इसके बाद विपक्ष ने तीनों राज्यों की सरकारों के आदेश पर आपत्ति जताई थी। विपक्ष ने इस फैसले को समाज को विभाजित करने वाला और मुस्लिमों से पक्षपात करने वाला आदेश करार दिया था। इसके बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने इसे लेकर आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों की सरकारों द्वारा जारी आदेश पर रोक लगाई थी। शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ समय के अभाव के कारण मामले की सुनवाई नहीं कर पाई लेकिन, अंतरिम आदेश को जारी रखा।
19 अगस्त तक चलेगा सावन
बता दें कि श्रावण के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी कांवड़ में पवित्र गंगाजल लाते हैं और इससे शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान श्रद्धालु मांस से परहेज करते हैं और कई श्रद्धालु प्याज और लहसुन का भी सेवन नहीं करते। अदालत में एक पक्ष ने याचिका दायर करते हुए मामले की जल्द सुनवाई की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि अभी कांवड़ यात्रा चल रही है और 19 अगस्त को इसका समापन हो जाएगा। इसके जवाब में शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। हालांकि, अदालत ने यह नहीं बताया कि मामले की सुनवाई किस दिन होगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए धर्मपरिवर्तन को लेकर अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि फादर, मौलाना या कर्मकांडी किसी को भी जबरन धर्म परिवर्तन कराने का अधिकार नहीं है। अगर कोई गलत बयानी, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती और प्रलोभन देकर ऐसा कराता है तो वह यूपी धर्मांतरण विरोधी अधिनियम के तहत जिम्मेदार होगा।
गाजियाबाद के मौलाना की याचिका खारिज
यह तल्ख टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने गाजियाबाद के थाना अंकुर विहार के मौलाना मोहम्मद शाने आलम की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा, भारत का संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म को मानने व प्रचार करने का मौलिक अधिकार देता है। संविधान सभी व्यक्तियों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। जो भारत की सामाजिक सद्भाव और भावना को दर्शाता है। संविधान के अनुसार राज्य का कोई धर्म नहीं है। राज्य के समक्ष सभी धर्म समान हैं।
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