लोकसभा चुनावों के नतीजों ने सभी को चौंका दिया। जो परिणाम सामने आए शायद ही उनकी किसी ने कल्पना भी की हो। ऐसे में जिन नेताओं ने सपा का साथ छोड़ बीजेपी का दामन थामा वो भी समर्थकों के सवालों के घेरे में हैं कि आखिर उन्होंने ये फैसला क्यों लिया। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन ने भारतीय जनता पार्टी से ज्यादा राष्ट्रीय लोकदल को चौंका दिया है। सपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की, जिसमें आरएलडी का गढ़ माने जाने वाला मुजफ्फरनगर और कैराना भी शामिल है। सपा के इस प्रदर्शन ने जयंत चौधरी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कहीं उन्होंने अखिलेश यादव का साथ छोड़कर कोई गलती तो नहीं कर दी? वहीं बीजेपी के अंदर भी चर्चा है कि जयंत को साथ लाकर बीजेपी ने तो गलती नहीं कर दी?
सपा का ऑफर ठुकरा कर क्या जयंत ने की गलती
दरअसल बीजेपी के साथ दोस्ती से पहले आरएलडी और सपा का गठबंधन था। विधानसभा के बाद दोनों साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुके थे। सपा ने लोकसभा चुनाव में आरएलडी को 7 सीटों का ऑफर भी कर दिया था, जिसमें मुजफ्फरनगर, बिजनौर, कैराना, बागपत शामिल थी लेकिन जयंत ने यह ऑफर छोड़कर बीजेपी के साथ जाना पसंद किया। जयंत का कहना था कि सपा से गठबंधन करने पर 7 सीटें जरूर मिल रही थी, लेकिन प्रत्याशी भी सपा ही तय कर रही थी। इसलिए उन्होंने बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया। वहीं नतीजों में जैसी सपा की आंधी चली, उसने कांग्रेस की वैतरणी को भी पार लगा दिया। अखिलेश यादव का ही कमाल था कि रायबरेली और अमेठी जैसी सीट पर जीत के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस को 6 सीटें मिल गई। कांग्रेस के इस प्रदर्शन के बाद पश्चिमी यूपी में आरएलडी को लेकर खूब चर्चा हो रही है। कई लोगों का मानना है कि अगर आरएलडी भी सपा के साथ होती तो वह कम से कम 5 सीटें जीतने में कामयाब हो जाती। हालांकि आरएलडी के प्रवक्ता लोगों की चर्चाओं से सहमत नहीं हैं।
जयंत को एनडीए में लाना बीजेपी के लिए रहा नुकसानदेह
जयंत चौधरी का एनडीए का हिस्सा बनना भी किसी रोचक घटना से कम नहीं था। दरअसल केंद्र सरकार ने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने का ऐलान किया। इस ऐलान के बाद जयंत चौधरी अपने आपको एनडीए का हिस्सा बनने से रोक न पाए। बीजेपी के साथ जाने पर जयंत के हिस्से में दो सीट ही आई। तभी से आरएलडी के समर्थक जयंत चौधरी के फैसले पर सवाल उठाने लगे थे। अब जब लोकसभा चुनाव के नतीजे आ गए है तो आरएलडी के समर्थक एक बार फिर कहने लगे हैं कि जयंत चौधरी ने बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर गलती की। जैसे आरएलडी के समर्थक मानते हैं कि जयंत चौधरी ने बीजेपी के साथ जाकर गलती कर दी, वैसे ही बीजेपी के समर्थक भी मानते हैं कि जयंत को एनडीए में लाकर बीजेपी ने गलती कर दी। दरअसल जयंत को लाकर बीजेपी मुजफ्फरनगर, कैराना, सहारनपुर, मथुरा, अलीगढ़ जैसी जाट बहुल सीटों पर शानदार प्रदर्शन करना चाहती थी लेकिन नतीजे उलट आए। जयंत को साथ लाकर बीजेपी ने मुजफ्फरनगर और कैराना जैसी सीट गंवा दी, जो 2014 व 2019 में भी जीती थी।
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