ग्रेटर नोएडा: सेक्टर ओमेगा स्थित मित्रा सोसायटी में मंगवार को पकड़ी गई ड्रग्स फैक्ट्री चार साल से चल रही थी। कपड़ा फैक्ट्री की आड़ में यहां ड्रग्स तैयार की जाती थी। यहां तैयार ड्रग्स को बंदरगाहों और बांग्लादेश बॉर्डर से अलग-अलग कोरियर कंपनी के माध्यम से कपड़ों के बंडल के बीच विदेश भेजा जाता जाता था। पुलिस ने तीन कोरियर कंपनियों को चिह्नित किया है, उनको नोटिस जारी किया गया है। कोरियर कंपनी के नाम से कार्गो पार्सल में ड्रग्स पैकेट छुपाए जाते थे। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि मकान में चल रही ड्रग्स फैक्ट्री को तीन विदेशी नागरिक चला रहे थे। तीनों नाइजीरिया के रहने वाले है। 13 दिन के अंदर दो ड्रग्स फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद पुलिस की भूमिका भी जांच शुरू हो गई है।

कोडवर्ड में होती थी बात
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपी तस्करी के लिए वॉट्सऐप कॉलिंग करते थे। कोडवर्ड में अपना मेसेज छोड़ते थे। आरोपियों के पास से कई दस्तावेज मिले हैं, जिनमें कई नंबर और नाम लिखे हुए हैं। अब पुलिस इन दस्तावेजों में लिखे नंबर को कोडवर्ड मानते हुए जांच कर रही है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि कई ऐसे नंबरों से बात की जा रही थी उन्हें ट्रैक कर पाना लगभग नामुमकिन सा था। यूजर्स के लोकेशन और आईपी अड्रेस को ट्रेस नहीं किया जा सकता था और न ही होस्ट के बारे में जानकारी मिल पाती थी। आसपास के लोगों को बताया था कि यहां रहने वाले लोग कपड़ा फैक्ट्री चलाते है। यहां तैयार माल को विदेश भेजा जाता था। घर से जब पुलिस ने 30 किलो 900 ग्राम ड्रग्स पकड़ी तो पड़ोसियों के होश उड़ गए।
तीन विदेशी नागरिक गिरफ़्तार
कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर पुलिस की स्वाट टीम, बीटा-टू और कासना कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने मित्रा सोसायटी के एक मकान में संचालित हो रही ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ करते हुए अफ्रीकी मूल के तीन नागरिकों साइमन, केसिएना रिमी, इग्वे साइमन को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद की थी। ड्रग्स की कीमत 150 करोड़ रुपये बताई गई है। बीते 17 मई को गिरफ्तार किए गए 10 अफ्रीकी नागरिकों शामिल चिडी इजीअग्वा को रिमांड पर लेकर पूछताछ के दौरान पुलिस इन आरोपियों तक पहुंचीं। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि मित्रा एन्क्लेव के एक मकान के दो मंजिल पर चल रही ड्रग्स की फैक्टरी संचालित किए जाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए अफ्रीकी मूल के नागरिक दिल्ली एनसीआर रीजन में ड्रग्स की सप्लाई का सिंडीकेट चलाते थे।

ड्रग्स के काले कारोबार का चीनी कनेक्शन
इससे पहले 11 जून को नेपाल बॉर्डर पर दो चीनी नागरिक जासूसी के शक में पकड़े जाने से पहले 17 दिन ग्रेटर नोएडा में अपने साथियों के साथ रुके थे। देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के बावजूद पुलिस ने विदेशी नागरिकों के दस्तावेज जांच करने के लिए अभियान चलाने का दावा किया था। इसके बावजूद ड्रग्स फैक्ट्री की भनक तक नहीं लगी।
ग्रेटर नोएडा: ड्रग्स के खिलाफ गौतम बुद्ध नगर पुलिस का अभियान जारी है। 11 दिनों के भीतर दो बड़ी ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा हुआ। जहां से पकड़े गये आरोपियों से पूछताछ जारी है। पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी ग्रेटर नोएडा में नहीं, बल्कि दिल्ली में रहते थे। आरोपियों का ठिकाना दिल्ली का महिलपाल पुर है।
अब सप्लायर की तलाश में पुलिस
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी दिल्ली के महिपालपुर में रहते थे और हफ्ते में एक या दो बार ही आते थे। वहां से वो ग्रेटर नोएडा फैक्ट्री का संचालन देखने आते थे। अब पुलिस विदेशी नागरिकों का पूरा डाटा खंगाल रही है और इनके बारे में एक एक जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही पूरे मामले की गहनता से जांच भी की जा रही है। इसके अलावा पुलिस कच्चा माल सप्लाई करने वाले सप्लायर की तलाश में दबिश दे रही है।
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