GREATER NOIDA: छत्तीसगढ़ में हुए दो हजार करोड़ के शराब घोटाले का मामला अब गौतमबुद्ध नगर पहुंच गया है। शराब घोटाले में ED का शिकंजा कसने लगा है। ED ने ग्रेटर नोएडा के कासना थाने में आबकारी सचिव समेत 5 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

इन अधिकारियों के खिलाफ FIR
छत्तीसगढ़ में दो हजार करोड़ से अधिक के शराब घोटाला मामले में अब ED का शिकंजा कसता जा रहा है। घोटाले का तार अब सीधे गौतमबुद्ध नगर जिले से जुड़ गया है। इस मामले में सूबे के आबकारी आयुक्त समेत 5 अधिकारियों के खिलाफ ED के आदेश पर ग्रेटर नोएडा के कासना थाने में FIR दर्ज हुई है। इन अधिकारियों में स्पेशल सेक्रेटरी अरुणपति त्रिपाठी, IAS निरंजन दास, IAS अनिल टुटेजा, विधु गुप्ता, अनवर ढेबर के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमें दर्ज किये गये हैं।
क्या है पूरा मामला?
FIR की जानकारी देते हुए ED ने बताया मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में शराब घोटाले की जांच कर रहा है। PMLA के तहत जांच में पता चला कि नोएडा स्थित मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को अवैध रूप से टेंडर जारी किया गया था। ये कंपनी टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं थी लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से इस कंपनी को टेंडर दिया गया। बदले में कंपनी से प्रति होलोग्राम 8 पैसे का कमिशन लिया गया।
Noida: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नोएडा में दर्ज मुकदमे में जमानत मिल गई है। दरअसल, यूपी विधान सभा चुनाव 2022 में भूपेश भगेल ने चुनाव प्रचार की शुरुआत नोएडा से ही की थी। इस दौरान बघेल और पंखुड़ी पाठक पर कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का मुक़दमा दर्ज किया गया था। इसी मामले की सुनवाई के लिए भूपेश बघेल सूरजपुर स्थित कोर्ट पहुंचे। इस दौरान नोएडा कांग्रेस की पूर्व प्रत्याशी पंखुड़ी पाठक व प्रदेश प्रवक्ता अनिल यादव भी मौजूद रहे।
सरकार विपक्ष की आवाज दबाना चाहती हैः पंखुड़ी पाठक
पंखुड़ी पाठक ने बताया कि उनकी न्यायालय व क़ानून में पूरी आस्था है। लेकिन इस जिस तरह राजनीतिक लोगों पर चुनाव के दौरान मुक़दमे दर्ज हुए वह निंदनीय है। सरकार मुक़दमों से विपक्ष की आवाज़ दबाना चाहती है। लेकिन कांग्रेस के कार्यकर्ता इन सबसे डरने वाले नहीं है, बल्कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा से हमें इस तरह के अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ने का हौसला मिलता है।
कोविड प्रोटोकॉल तोड़ने पर दर्ज हुआ था केस
उन्होंने कहा, चुनाव के दौरान सत्ता धारी पार्टी के लोगों की कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाते हुए तस्वीरें वायरल हुई थीं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ़ विपक्ष पर ही की गई। वहीं, अनिल यादव ने कहा कि भूपेश बघेल ज़मीनी नेता के साथ क़ानून को मानने वाले हैं। जिनकी न्यायपालिका में पूरी आस्था है। इसी कारण वह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। फ़िलहाल मामले में उन्हें जमानत दे दी गई है।
ऑनलाइन ठगी करके लोगों से पैसे हड़पने के मामले आपने खूब सुने होंगे। लेकिन क्या आप ये सोच भी सकते हैं कि स्टेट बैंक की नकली शाखा खोलकर कोई धोखाधड़ी कर सकता है। जी हां, सही पढ़ा आपने, यहां पर हम किसी फीचर फिल्म की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि आरबीआई के नाम पर साफतौर पर धोखाधड़ी करने की असल कहानी बता रहे हैं।
RBI की शाखा खोल लोगों को दिया धोखा
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के मालखरौदा थाना अंतर्गत छपोरा ग्राम से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां पर स्टेट बैंक की नकली शाखा खुल गई और उच्च अधिकारियों को इसकी दूर दूर तक कोई जानकारी ही नहीं। मालखरौदा थाना प्रभारी राजेश पटेल ने कहा की छपोरा में सीबीआई बैंक के फर्जी शाखा खुलने की सूचना मिली जिसपर जांच की और मामला फर्जी निकला। जिसके बाद तीन आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई हैं। जिसमें पंकज कुमार, रेखा साहू, मंधीर दास के खिलाफ जुर्म दर्ज किया गया है।
नकली बैंक में भर्ती किए कर्मचारी
अक्षय कुमार की 'स्पेशल 26' की तरह ही इस मामले में भी लोगों की फर्जी भर्ती की गई है। एसबीआई बैंक डभरा के ब्रांच मैनेजर और अधिकारी शेखर राज ने बताया कि शिकायत मिलने पर छपोरा पहुंचे थे, तो यहां देखा गया यहां अचानक एसबीआई की बैंक कैसे खुल गई। छपोरा में इस फर्जी बैंक द्वारा स्टेट बैंक का बड़ा बैनर लगाकर बैंक का सेट अप लगाया गया था, जब उनकी टीम मौके पर पहुंचे तो कथित बैंक मैनेजर फरार था। इस बैंक शाखा में 6 कर्मचारी उपस्थित थे जिन्होंने बताया कि पत्र एवम इंटरव्यू के माध्यम से उनकी ज्वाइनिंग करवाई गई। कर्मचारियों से भी 2 से 6 लाख रुपये तक का भुगतान कराया गया था।
कर्मचारी बोले 'हम ट्रेनिंग पर हैं'
जब छापेमारी हुई, तो मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ की गई, जिसमे उन्होंने बताया कि छपोरा शाखा में एम्पलाई को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था, इसके बाद उन्हें यहां पर पोस्टिंग दी गई। बैंक अधिकारी ने कहा कि बैंक स्टार्ट न होने से ग्रामीण कई तरह के फ्रॉड से बच गए, समय रहते कार्रवाई होने से फ्राड नहीं कर पाए।
कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?
अब बात करते हैं कि इस फर्जीवाड़े का पता कैसे चला, तो बता दें, जब ग्रामीण को पता चला कि उनके गांव में SBI की बैंक शाखा खुली है तो वह वहां पर खाता खुलवाने के लिए पहुंचे। ब्रांच में पहुंचने पर पूछा खाता खुलवाने के लिए क्या प्रोसेस है और क्या क्या डॉक्यूमेंट लगेगा। इस पर बैंक में मौजूद कर्मचारी सही जवाब न दे सके। वहीं बैंक कर्मचारियों ने जवाब दिया कि अभी सर्वर खराब है, बाद में चालू होगा। साथ ही ब्रांच कोड भी कहीं दिखाई नहीं दिया, और भी कई चीजों पर शक हुआ। जिसके बाद यहां छापेमारी हुई और फ्रॉड का पता चला।
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