Greater Noida: दक्षिण कोरिया की एक कार कंपनी थी, जिसका नाम है देबू मोटर्स। करीब दो दशक पहले ये कार भारत में बिका करती थी। साल 2001 में देबू मोटर्स दिवालिया हो गई, इस कंपनी को अमेरिकी कंपनी जनरल मोटर्स ने खऱीद लिया लेकिन भारत की यूनिट को नहीं खऱीदा। इसी के चलते देबू मोटर्स की ग्रेटर नोएडा में स्थित यूनिट बंद हो गई। जबसे ये कंपनी बंद हुई है तबसे इसमें कुछ ना कुछ गड़बड़ ही हो रहा है। या यूं कहें कि कुछ गिद्ध नजर गाड़े इस ओर बैठे हैं। एक तरफ यहां काम करने वाले 1300 के लगभग कर्मचारी हैं, जो एक दशक से ज्यादा यानि साल 2012 से कंपनी के बाहर अपनी हक की मांग को लेकर आनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। हालांकि इनका मामला कोर्ट है तो इसका फैसला भी कोर्ट से ही होना है लेकिन इन कर्मचारियों के धरने की वजह से देबू मोटर्स में लाखों प्रकृति की जान सुरक्षित कर ली गई। लेकिन वन माफिया हजारों पेड़ों को चोरी छिपे अब तक काट चुके हैं। यहां पर पेड़ काटने की शिकायत कई बार वन विभाग से की जा चुकी है। बीते सोमवार को देबू मोटर्स के बाहर धरना दे रहे कर्मचारियों की शिकायत पर जब वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो पेड़ों को काटकर ट्रक पर लादा जा रहा था, जिसे जब्त कर लिया गया।

"मजदूरी तो मिली नहीं, कंपनी को पहुंचाया जा रहा नुकसान"
गुपचुप तरीके से देबू मोटर्स में पेड़ों की काटने की सूचना पर जब नाउ नोएडा की टीम मौके पर पड़ताल करने पहुंची तो अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे यूनियन लीडर उपेंद्र खारी ने बताया कि जबसे कंपनी उन्हें यहां से छोड़कर भागी है तब से वो कंपनी के खिलाफ धरना दे रहे हैं और अपने भरपाई की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर कंपनी के कर्मचारियों का यूनियन हाईकोर्ट में भी है। उपेंद्र खारी ने बताया कि उन्हें पता चला कि कुछ लोग कंपनी में पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। इसकी सूचना यूनियन के लोगों ने वन विभाग को दी। उपेंद्र खारी ने आरोप लगाया कि देबू मोटर्स में पेड़ों की कटाई शंकुतलम कंपनी करवा रही है, जिसने गुपचुप तरीके से इस कंपनी को खरीद लिया है। उपेंद्र खारी ने आरोप लगाया कि बिना परिमिशन के पेड़ों कटवाने के अलावा अंदर बोरबेल भी करवा दिया गया है। उपेंद्र खारी ने बताया जब वो जोर जबरदस्ती करके अंदर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि पहले से ही हजारों पेड़ काट दिये गये हैं।

"पेड़ काटकर पैसा कमाने की फिराक में है कंपनी"
देबू मोटर्स के कर्मचारी और यूनियन लीडर अनूप सिंह ने आरोप लगाया कि शंकुतलम लैंडक्रॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी जिसने हाल ही में इसे खरीदा है, उसने पैसा कमाने के लिए पेड़ को कटवा रही है। जबकि अभी ये मामला कोर्ट में पेंडिंग है। उन्होंने कहा कि जब तक मजदूरों को उनका हक नहीं मिलता तब तक वो इस कंपनी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करने देंगे।
"नियमों के साथ खिलवाड़ हो रहा है"
उपेंद्र खारी ने बताया कि शकुंतलम कंपनी बिना किसी परमिशन और कागजात के इस जमीन पर कब्जा किए हुए है, जबकि अभी मामला कोर्ट में है, इसे लेकर यूनियन के अलावा और भी पार्टी हैं, जो कोर्ट में हैं। बावजूद इसके शकुंतलम कंपनी ने बिना किसी आदेश के कंपनी में गलत तरीके से कब्जा करने और पैसा कमाने के लिए पेड़ कटाने के काम में जुटी है। जबकि वन विभाग और पुलिस की टीम इस पर सख्त एक्शन नहीं ले रही है।
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