टीम इंडिया को टी-20 चैंपियन बनाकर कोच राहुल द्रविड़ महान खिलाड़ी के साथ ही महान कोच भी बन गए हैं। लेकिन ये सफर आसान नहीं था। हम जानते हैं कि जब राहुल द्रविड कोच बनाए गए थे, तो उस समय ड्रेसिंग रुम से कोच को लेकर काफी नेगेटिव चर्चाएं चल रही थीं। लेकिन फिर राहुल द्रविड़ ने टीम को संभाला और आज टीम इंडिया विश्व चैंपियन बन गई है। अपने सफर को लेकर राहुल द्रविड़ ने काफी कुछ शेयर किया, जिसे बीसीसीआई ने शेयर किया है।
‘The sacrifices, The commitment, The comeback’
राहुल द्रविड ने कहा कि टीम के अच्छा माहौल बेहद जरुरी है, उन्होंने कहा कि उनका फोकस था कि वो खिलाड़ियों के लिए एक सुरक्षित माहौल बना सके और टीम में बहुत अधिक बदलाव नहीं करना चाहते क्योंकि उनका मानना है कि इससे टीम में बहुत अधिक अराजकता पैदा होती है। वो कहते हैं कि मैं एक ऐसी टीम का हिस्सा हूं, जिसकी जिम्मेदारी सही खेल और शानदार माहौल बना रहे, जिसमें विफलता का डर न हो, लेकिन लोगों को आगे बढ़ाने के लिए यह काफी चुनौती हों। मैं ऐसा व्यक्ति हूं जो निरंतरता पसंद करता है और बहुत सी चीजों को बदलना पसंद नहीं करता क्योंकि मेरा मानना है कि इससे बहुत अधिक स्थिरता नहीं आती है और बहुत अच्छा माहौल नहीं बनता है।
शुरु मे 6 कप्तानों के साथ किया काम
कोच राहुल द्रविड ने टीम के साथ ढाई साल से ज्यादा का समय बीताया। इस दौरान कैसे शुरु में उन्हें करीब 6 कप्तानों के साथ काम करना था और एक ही समय पर दो भारतीय टीम विश्व के अलग-अलग हिस्से में खेल रही थी, इसपर अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने कहा कि 'हमने पिछले एक साल में लाल गेंद और सफेद गेंद दोनों तरह के क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों को बहुत सारे अवसर दिए। बहुत से लोगों को टीम में शामिल किया। यह देखकर खुशी हुई कि उन्होंने कितनी जल्दी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ तालमेल बिठाया और इन युवा खिलाड़ियों ने आते ही जिस तरह का प्रदर्शन किया। जब कुछ वरिष्ठ खिलाड़ी आराम कर रहे थे और मुझे यकीन है कि उन्हें उनके अवसर मिलेंगे। मुझे लगता है कि यह सबसे कठिन काम रहा है। उससे मुझे लगता है कि यह टीम के साथ-साथ रणजी ट्रॉफी और जिस तरह का घरेलू क्रिकेट खेला जा रहा है, उसको भी मदद करेगा'।
इंग्लैड सीरीज परीक्षा की घड़ी थी
राहुल द्रविड ने कहा, 'इस समय घरेलू मैदान पर इंग्लैंड की सीरीज 1-0 से हारने के बाद सीरीज जीतने और फिर चोट और अन्य कारणों से कई खिलाड़ियों को खोने, ग्रुप में आने के लिए कई युवा खिलाड़ियों पर निर्भर रहने और फिर उस सीरीज को 4-1 से जीतने के साथ-साथ यह भी महसूस किया कि कोचिंग स्टाफ और एक समूह के रूप में हमारी परीक्षा हुई और हमें चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मुझे लगता है कि सीरीज के दौरान शायद हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का अहसास हुआ। सरफराज खान, ध्रुव जुरेल और देवदत्त पड्डिकल ने भारत के लिए जीत सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण पारियां खेलीं'।
भारतीय क्रिकेट के पूर्व कोच राहुल द्रविड़ ने एक बार फिर से सभी का दिल जीत लिया है। उनकी ‘बराबरी की नीति’ को सभी लोग सलाम कर रहे हैं। हेड कोच के तौर पर टीम इंडिया को टी20 वर्ल्ड कप जिताने वाले राहुल द्रविड़ ने बड़ा दिल दिखाते हुए बीसीसीआई की ‘एक्स्ट्रा प्राइज मनी’ को लेने से इंकार किया है।
BCCI ने किया था 125 करोड़ के ईनाम का ऐलान

BCCI सचिव जय शाह ने टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम को वतन लौटने के बाद मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में 125 करोड़ के चेक से सम्मानित किया था। खिलाड़ियों और हेड कोच राहुल द्रविड़ को 5-5 करोड़ रुपये और सपोर्ट स्टाफ को 2.5-2.5 करोड़ रुपये। सपोर्ट स्टाफ में बैटिंग कोच विक्रम राठौर, बॉलिंग कोच पारस महाम्ब्रे और फील्डिंग कोच टी दिलीप समेत अन्य लोग शामिल हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल द्रविड़ ने बीसीसीआई से कहा कि वो भी 2.5 करोड़ रुपये ही लेंगे और बाकी पैसा अन्य स्टाफ सदस्यों के बीच बांट दिया जाए।
अंडर-19 टीम की जीत के बाद किया कर चुके हैं ऐसा

राहुल द्रविड ने ऐसा पहली बार नहीं किया है, वो साल 2018 में भारत द्वारा अंडर-19 वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीतने के बाद बीसीसीआई ने तत्कालीन कोच द्रविड़ के लिए 50 लाख रुपये, उनकी टीम के अन्य सदस्यों के लिए 20 लाख रुपये और खिलाड़ियों के लिए 30 लाख रुपये की प्राइज मनी देने की घोषणा की थी। तब भी राहुल द्रविड़ ने BCCI से प्राइज मनी को कोचिंग स्टाफ के बीच समान रूप से बांटने के लिए कहा था, जिसके बाद बोर्ड ने उनकी बात मानी भी थी।
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