AYODHYA: रामनगरी अयोध्या में फिल्मों की तरह दो शातिर बदमाश सालों से साधु के वेश में रह रहे थे। ये दोनों गोंडा में महावीर सिंह हत्याकांड में शामिल थे, जिनकी 17 साल से तलाश चल रही थी, जिन्हें थाना रामजन्मभूमि पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों बिहार के लखीसराय बड़ईया निवासी संजय उर्फ विजय और उसका सहयोगी हनुमान कुटी निवासी सीताराम के रूप में हुई हैं। संजय गोविंददास बन कर लक्ष्माणकिला तथा सीताराम यहां राधेश्यामदास के नाम से रामकोट मोहल्ले के हनुमान कुटी में रह रह थे। दोनों की तलाश गोंडा पुलिस 17 वर्ष से कर रही थी।
रामकृपालदास के करीबी थे दोनों
सीताराम और संजय दोनों ही रामनगरी में कुख्यात रहे रामकृपालदास के करीबी भी बताए जा रहे हैं। बता दें कि रामकृपालदास की हत्या वर्ष 1996 में हुई थी, जिसमें माफिया श्रीप्रकाश शुक्ल का भी नाम जुड़ा था। 2011 में वजीरगंज गोंडा में हुई पुलिस मुठभेड़ में मारे गए हरिनारायणदास के गिरोह से भी दोनों का संबंध है। सीताराम की तलाश में पहले भी गोंडा पुलिस वांरट के आधार पर उसे पकड़ने कई बार आई थी, लेकिन नाम और वेश बदला होने के कारण खाली हाथ लौट जाती थी।
महावीर सिंह हत्याकांड में वांछित थे दोनों
थाना प्रभारी रामजन्मभूमि देवेंद्र पांडेय ने बताया कि 2007 में गोंडा के तुलसीपुर माझा नवाबगंज निवासी महावीर सिंह की हत्या हुई थी। इस मामले में वर्ष 2008 में संजय और राधेश्याम के विरुद्ध कुर्की की कार्रवाई हुई थी। जिसके बाद से दोनों फरार थे। पुलिस ने 15-15 हजार रुपये का पुरस्कार भी घोषित किया था। थाना प्रभारी ने बताया कि सीताराम का पता हनुमान कुटी था, जो थाना रामजन्मभूमि क्षेत्र में आता है। इसलिए कोर्ट की ओर से जारी वारंट पुलिस को मिला। इसके बाद सीताराम को पकड़ा गया। जिसने पूछताछ में अपनी सही पहचान बताई। इसके साथ ही संजय का भी पता बताया, जिसके बाद दोनों की गिरफ्तारी की गई।
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