होली का त्योहार की हर ओर धूम मची है। आप सबको तो पता ही होगा कि ब्रज की होली दुनियाभर में मशहूर है। देश-विदेश से लोग मथुरा की होली आनंद लेने यहां आते हैं। ब्रज में बरसाने और नंदगांव की लट्ठमार होली सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। लोग दूर-दूर से इस त्योहार को मनाने यहां आते हैं।
फागुन शुरू होते है छाने लगती है खुमारी
कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन और पूरे ब्रजधाम में फागुन का महीने शुरू होते ही होली की खुमारी छाने लगती है। वृंदावन की कुंज गलियों में अबीर और गुलाल की बौछार होने लगती है। प्रेम रंग में सराबोर मथुरावासी सिर्फ रंग गुलाल ही नहीं लड्डू, फूल और माखन से भी होली खेलते हैं। दुनियाभर से बड़ी संख्या में लोग ब्रज की होली देखने मथुरा पहुंचते हैं। बरसाने की लट्ठमार होली को देखने का अपना अलग ही मजा है।
लट्ठमार होली क्यों खेली जाती है?
मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा रानी के गांव यानि बरसाने में होली खेलने आया करते थे। नंदगांव के ग्लावे और बरसाने की ग्वालिन होली खेलती थीं। तभी से यहां होली खेलने की ये परंपरा चली आ रही है। गोप जब गोपिकाओं को प्रेम में छेड़ते थे, तो गोपिकाएं उन्हें लट्ठमारते हुए भगाया करती थीं। इसी मान्यता को जीवंत रखने के लिए यहां हर साल लट्ठमार होली खेली जाती है।
ब्रज में पूरे 40 दिन तक होली का त्योहार मनाया जाता
18 मार्च को बरसाना के राधा रानी मंदिर में लट्ठमार होली का आयोजन किया जाएगा। 19 मार्च को नंदगांव में लट्ठमार होली का आयोजन होगा। 20 मार्च को कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में होली का आयोजन किया जाएगा। 21 मार्च को गोकुल में छड़ी मार होली खेली जाएगी। आपको बता दें कि पहले बरसाने में लट्ठमार होली खेली जाती है उसके बाद नंदगांव में होली खेली जाती है और सबसे आखिर में रंगभरी एकादशी के दिन वृंदावन में फूलवारी होली खेली जाती है। हालांकि ब्रज में पूरे 40 दिन तक होली का त्योहार मनाया जाता है। अलग-अलग मंदिरों में भक्त नंदलाला के साथ होली खेलते हैं।
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