नियमों की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती हैं ये तो कोई यूपी के लोगों से सीखे. जहां बड़े-बड़े महारथी हार जाते हैं. वहां यूपी के लोग कोई ना कोई तोड़ निकाल ही लेते हैं. फिर चाहें वो किसी भी क्षेत्र और किसी भी मामले को लेकर क्यूं ना हो. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि यूपी के नोएडा में छत की चाह में दंपतियों ने ऐसा ही एक कारनामा कर दिखाया है. यीडा सिटी में प्लॉट पाने वाले के लिए पति-पत्नी तलाक को फायदेमंद हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. यीडा के दंपति में से केवल एक को ही प्लॉट के आवंटन के नियम के लिए लोग तलाक लेकर अलग हो रहे हैं. ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है ताकि पति-पत्नी दोनों के नाम पर आवंटित हुआ प्लॉट उन दोनों को मिल सके और इस प्लॉट को रीसेल कर मोटा मुनाफा कमाया जा सके.
यीडा की जांच में सामने आए 47 मामले
दरअसल यमुना अथॉरिटी में एक के बाद एक कई ऐसे मामले आने पर जांच कराई गई. जिसमें 2015 से लेकर अब तक इंडस्ट्रियल कैटेगरी में 47 ऐसे मामले निकलकर सामने आए. जिनमें पति और पत्नी ने तलाक से संबंधित दस्तावेज पेश कर अपने प्लॉट बचा लिए. जबकि नियम के अनुसार आवासीय, इंडस्ट्रियल और अन्य प्लॉट स्कीम के ड्रॉ में अगर पति और पत्नी दोनों का नाम निकलता है, तो एक का प्लॉट स्वत: निरस्त हो जाएगा. मतलब दोनों में से एक को ही प्लॉट का आवंटित होगा.
32 प्लॉटों का दस परिवारों को आवंटन सवालों के घेरे में
इस जांच में ये भी खुलासा हुआ कि 47 मामलों में 32 प्लॉटों का आवंटन दस परिवारों में हुआ है. कुछ सगे भाई हैं तो कुछ परिवार के नजदीकी रिश्तेदार हैं. 32 इंडस्ट्रियल प्लॉटों का एक ही परिवार या रिश्तेदारों को मिलना ड्रॉ की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है. अधिकारियों की मानें तो जांच के बाद जब प्लॉट सरेंडर करने के लिए अथॉरिटी द्वारा संपर्क किया गया, तो अधिकतर ने तलाक के दस्तावेज या कंपनी, फर्म आदि के अलग-अलग दस्तावेज पेश कर दिए. ताकि यह साबित हो सके कि वे दोनों अलग हैं. जबकि 12 लोगों ने तो सीधे तलाक के ही कागज पेश कर दिए.
अब आवासीय स्कीम में आवंटित प्लॉटों की भी होगी जांच
यमुना अथॉरिटी के सीईओ अरुणवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 47 प्लॉटों में अधिकतर का आवंटन 2015 में निकाली गई इंडस्ट्रियल प्लॉट स्कीम के तहत हुआ है. इसके बाद के कुछ ही प्लॉट हैं. वहीं इस पूरे मामले को आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा. इसके बाद जांच होगी. इनमें जो भी फर्जी तलाक के मामले मिलेंगे उनका प्लॉट आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा. इसके अलावा अब आवासीय स्कीम में आवंटित प्लॉटों की भी जांच होगी. अधिकारियों का मानना है कि आवासीय प्लॉट स्कीम में यह फर्जीवाड़ा और भी बड़ा हो सकता है.
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