ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों पर एक कंपनी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मैसर्स क्रेन-वैल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कंपनी का आरोप है कि प्राधिकरण ने फर्जी और कूट-रचित दस्तावेजों के आधार पर गांव पतवाड़ी की उनकी 6.0637 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर लिया है। वहीं अब इस मामले में बिसरख थाने में कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।
क्या है पूरा मामला
मैसर्स क्रेन-वैल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के एक अधिकारी ने नोएडा पुलिस को बताया कि वर्ष 2006 में उत्तर प्रदेश सरकार ने 70 जिलों में ग्रामीण विकास केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। क्रेन-वैल इंटरनेशनल को इस योजना के तहत पतवाड़ी गांव में स्थित भूमि पर ग्रामीण विकास केंद्र स्थापित करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, वर्ष 2008 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने गांव पतवाड़ी की 600 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने का फैसला किया। कंपनी का आरोप है कि प्राधिकरण ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर राज्यपाल को भेजा और धारा 17 के तहत कंपनी की भूमि का अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद उस भूमि पर बिल्डरों को फ्लैट निर्माण के लिए आवंटित कर दिया गया। कंपनी का कहना है कि अगर वहां उद्योग लगते तो ग्रामीणों को रोजगार मिलता। मामले में प्राधिकरण के विभिन्न अधिकारियों पर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और अवैध लाभ लेने के आरोप लगाए गए हैं।
प्राधिकरण ने कई सालों तक नहीं दिए कंपनी को दस्तावेज
वहीं कंपनी के द्वारा प्राधिकरण से दस्तावेज़ बार-बार मांगने पर भी उपलब्ध नहीं कराये जा रहे थे। मैसर्स क्रेन-वैल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के अधिवक्ता नितेश यादव ने बताया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कई सालों तक उनको लटकाकर रखा। प्राधिकरण के द्वारा कंपनी के दस्तावेज नहीं दिए जा रहे थे। जिसकी वजह से मुकदमा दर्ज करवाने में देरी हुई। वकील नितेश ने यह भी बताया कि वर्ष 2006 के समय में जो जिलाधिकारी थे, उन्होंने हमें कंपनी लगाने के लिए अनुमति भी दी थी और यह जमीन क्रेन-वैल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड की ही थी। जिसमें अब मुकदमा दर्ज हुआ है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
कंपनी के वकील नितेश यादव ने बताया कि अब इस मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के लेखपाल अमीन, नायब तहसीलदार, तहसीलदार, प्राधिकरण के ओएसडी और अपर जिला अधिकारी (भूमि अधिनियम) के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले में धारा संख्या-420, 467, 468, 471 और 34 के तहत मुकदमा दर्ज है।
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