अदालत के कुछ मामले ऐसे होते हैं जिनके फैसलों में देरी जरूर होती है. मगर जब इंसाफ होता है तो पीड़ित को काफी सुकून और राहत मिलता है. भले ही वो इस गम से सारी जिंदगी ना उबर पाए. ऐसा ही एक मामला दिल्ली से सटे नोएडा का है. जहां एक रेप पीड़िता को तीन साल की कड़ी मशक्कत और दर-दर की ठोंकरें खाने के बाद इंसाफ मिला है. दरअसल नाबालिग छात्रा का अपहरण करके रेप करने के दोषी को कोर्ट ने 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही 30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. दोषी ने साल 2021 में इस वारदात को अंजाम दिया था.
2021 में हुई थी वारदात
गौतम बुद्ध नगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विकास नागर ने आरोपी प्रशांत कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 366 (अवैध संभोग के लिए किसी महिला का अपहरण करना) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 (यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया था. इसके बाद सजा का ऐलान किया गया है. जानकारी के मुताबिक, पीड़िता के पिता की दुकान के पास ही प्रशांत कुमार एक कपड़े की दुकान में काम करता था. इस वजह से दोनों के बीच पहले से जान पहचान थी. उस वक्त पीड़िता की उम्र 14 वर्ष थी और वो कक्षा 9 की छात्रा थी. एक दिन प्रशांत उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया. इसके बाद पीड़िता के पिता ने एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने प्रशांत कुमार को गिरफ्तार कर लिया.
आरोपी पर रहम की दलील को कोर्ट ने किया खारिज
वहीं कोर्ट में आरोपी की ओर से दलील देते हुए अधिवक्ता धर्मेंद्र पाल सिंह ने कोर्ट में कहा कि वो अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला है. उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है. ऐसे में उसे कम से कम सजा दी जाए. इस पर विशेष लोक अभियोजक जय प्रकाश भाटी ने कहा कि दोषी ने बहुत गंभीर अपराध किया है. इसलिए कोर्ट की ओर से उसे कोई नरमी नहीं मिलनी चाहिए. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश विकास नागर ने प्रशांत कुमार को दोषी ठहरा दिया.
आरोपी को मिला 10 साल का कठोर कारावास
इस मामले में आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) भी लगाई गई थी, लेकिन पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत समान सजा का प्रावधान होने की वजह से कोर्ट ने एक ही धारा के तहत सजा सुनाई है. इस तरह प्रशांत कुमार को पॉक्सो अधिनियम के तहत 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई. इसके साथ ही 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "दोषी को आईपीसी की धारा 366 के तहत 3 साल की कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई जाती है.'' इसके जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा. खंडपीठ ने कहा कि मुकदमे के दौरान द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को उसे दी गई मूल सजाओं में समायोजित किया जाएगा. दोनों अपराध एक ही क्रम में किए गए हैं, इसलिए सजाएं साथ चलेंगी.
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