केंद्र में तीसरी बार एनडीए की सरकार बनने के बाद बुधवार को एमएसपी में बढ़ोत्तरी की गई। जिसमें 14 खरीफ फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके। हालांकि एक तरफ सरकार ने किसान हित में कदम बढ़ाते हुए किसानों को साधने की कोशिश की है तो वहीं दूसरी तरफ रबूपुरा में किसानों ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा के समान बताया है। सरकार के इस कदम पर किसानों की मिली जुली प्रक्रिया सामने आई है।
बिना क्रय केंद्र किसानों को नहीं मिल सकेगा MSP का लाभ
किसान चौधरी इकपाल सिंह का कहना है कि हमारे यहां अधिकांश खेती धान, ज्वार, बाजरा आदि की होती है। जिस पर मात्र 170 रुपए से लेकर 190 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि दलहन पर सर्वाधिक बढ़ोत्तरी की गई है जिसका कुछ किसानों को लाभ मिल सकता है। वहीं किसान विजेंद्र भाटी का कहना है कि सरकार द्वारा बढ़ाई गई एमएसपी किसान हित में है लेकिन जब तक इन फसलों की खरीद के लिए क्षेत्र में क्रय केंद्र स्थापित नहीं किए जाएंगे, तब तक किसानों को एमएसपी बढ़ोत्तरी का लाभ नहीं मिलेगा। क्योंकि निजी आढ़ती मनमाने रेटों पर ही फसलों की खरीद फरोख्त करते हैं। सरकार को जिला स्तर, तहसील स्तर व सहकारी समितियों पर आवश्यकता अनुसार फसल सम्बंधित क्रय केंद्र स्थापित किये जाने चाहिए। किसान संजीव सिंह, विपिन चौधरी, जगदीश सिंह, धीरेंद्र सिंह, सोनू त्यागी, त्रिलोकी शर्मा, रामकुमार, अशोक आदि का कहना है कि सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य तो बढ़ा दिया गया है लेकिन क्रय केंद्र नहीं होने के कारण इसका लाभ किसानों के स्थान पर व्यापारियों को ही मिलेगा। किसान को इससे कोई लाभ मिलता दिखाई नहीं दे रहा।
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