Noida: लोकसभा चुनाव का नोटिफिकेश अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन पार्टियां चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है और मतदाताओं को लुभाना शुरू कर दिया है। इसके साथ बयानबाजी का दौर भी शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने जहां सबसे पहले उम्मीदवार की लिस्ट जारी कर यूपी की सियासत में हलचल मचा दी थी, वहीं अब भाजपा ने एक साथ 51 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं। गौतम बुद्ध नगर से एक फिर डॉ.महेश शर्मा पर भरोसा जताया है। लेकिन इस बार गौतम बुद्ध नगर में महेश शर्मा की जीत थोड़ी मुश्किल नजर आ रही है। क्योंकि कई ऐसे मुद्दे हैं, जिसको लेकर किसान और स्थानीय लोग सरकार और प्रशासन से नाराज हैं।
किसानों की मांग पर चुप्पी पड़ सकती है भारी
गौतमबुद्ध नगर जिले में बड़ी संख्या में किसान सरकार और प्रशासन से नाराज हैं। किसान लगातार अपनी मांगों को लेकर ग्रेटर नोएडा, नोएडा और यमुना प्राधिकरण पर धरना प्रदर्शन करते रहे हैं। किसानों को मुआवजा, रोजगार, प्लॉट जैसे कई मुद्दे हैं, जो कई बार आश्वासन के बाद भी नहीं पूरे हुए हैं। जिसको लेकर किसानों में आक्रोश है। किसान पहले से ही इसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में भुगतने की धमकी दे चुके हैं। वहीं, सबसे अधिक किसान यहां के स्थानीय जनप्रतिनिधियों से नाराज हैं, क्योंकि इन्होंने कभी समर्थन नहीं दिया। किसानों के विरोध प्रदर्शन में विधायक और सांसद कभी नजर नहीं आए और न ही कोई आश्वासन दिया। जिससे यह मुद्दा भाजपा उम्मीदवार के लिए मुश्किल साबित हो सकता है।
ग्रेनो वेस्ट में मेट्रो मुद्दा बन सकता है गले की हड्डी
इसी तरह ग्रेटर नोएडा वेस्ट में काफी दिनों से मेट्रो चलाई जाने की मांग लोग कर रहे हैं। एक साल से अधिक समय से स्थानीय लोग हर सप्ताह प्रदर्शन कर ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो शुरू करने की मांग उठाते हैं। क्योंकि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में धीरे-धीरे आबादी बढ़ रही है और आवागमन की सुविधा न होने से लोगों में रोष है। जबकि सरकार या स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मांग को लेकर अभी तक कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ऐसे में मतदान के समय भी ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोग अपना रोष जाहिर कर सकते हैं।
समय पर फ्लैट रजिस्ट्री और पजेशन न मिलना बड़ा मुद्दा
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में लगातार सोसाइटियां बस रही हैं और लगातार ऊंची इमारतें भी बन रही हैं। जिनके लाखों खरीदार हैं। लाखों लोगों को बिल्डरों ने फ्लैट तो बेच दिए हैं लेकिन इन्हें रजिस्ट्रे से लेकर पजेशन मिलने में बड़ी दिक्कत हो रही है। लगातार मांग करने के बाद सरकार ने यह मुद्दा सुलझाने की कोशिश की है और बिल्डरों को सहूलियत दी है। जिसकी वजह से अब कुछ लोगों के फ्लैट के रजिस्ट्री होने लगे हैं। लेकिन अभी भी बहुत बड़ा तबका है, जो रजिस्ट्री के लिए धक्के खा रहा है। ऐसे में ये लोग भी सरकार की कार्यप्रणाली से नाराज हैं। इस मुद्दे पर सत्तारूढ भाजपा को थोड़ा बहुत नुकसान हो सकता है। क्योंकि पूरी जीवन की कमाई लगाने वाले दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हुए हैं।
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