Greater Noida West: बिल्डर्स की दादागीरी देखनी हो तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट आ जाइए। यहां ऐसे-ऐसे मामले सामने आ जाते हैं, जिसे सुन आप भी हैरान रह जाएंगे। मेफेयर सोसायटी में आए दिन यहां रहने वाले निवासी प्रदर्शन करने जो मजबूर रहते हैं। मूलभूत सुविधाओं की नाम पर ये बिल्डर पहले से ही लोगों को चूना लगा रहा है। अब इसी सोसायटी में ऐसा मामला सामने आया है, जो वाकई में चौंकाने वाला है। सोचने वाली बात ये कि पहले से नियम कायदों की धज्जियां उड़ाने वाला बिल्डर अब फ्लैट ओनर के लिए ऐसे-ऐसे नियम बना रहा है, जिसके बाद यहां फ्लैट खरीदने वाले भी परेशान नज़र आ रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
मेफेयर सोसायटी में दो अलग-अलग फ्लैट के किरायेदारों को बारिश में सामान सहित भीगने को मजबूर कर दिया गया लेकिन उन्हें सोसायटी में एंट्री नहीं दी गई। जबकि दोनों किरायेदार नियम कायदे से ही फ्लैट को रेंट पर लिया था। जब पीड़ित किरायेदारों ने इसकी शिकायत निराला एस्टेट चौकी पर की तो बिल्डर की तरफ से किरायेदारों को रेरा के नियमों का पाठ पढ़ाया जाने लगा। पुलिस के दबाव के बावजूद भी बिल्डरों के दबंगों ने किरायेदारों को सोसायटी के अंदर एंट्री नहीं दी, जिसके बाद हार-थककर किरायेदारों को वापस लौटना पड़ा।

फ्लैट ओनर की ये है दलील
गाजियाबाद के रहने वाले प्रशांत मिश्रा ने बताया कि डेढ़ साल पहले उन्होंने मेफेयर सोसायटी में फ्लैट खरीदा था। उनका फ्लैट नंबर ए-203 नंबर है। उन्होंने बताया कि ब्रोकर के माध्यम से उन्होंने अपना फ्लैट किराये पर उठाया था, जब किरायेदार फ्लैट पर रहने पहुंचा तो उन्हें एंट्री नहीं दी। जबकि किरायेदार ने पूरी प्रक्रिया के तहत फ्लैट को रेंट पर लिया है। प्रशांत मिश्रा के मुताबिक फ्लैट मिलने के बाद से अभी तक उन्होंने पूरा मेंटीनेंस चार्ज भी बिल्डर को चुकाया है। जिल फ्लैट को किराये पर उठाया गया है, उसका पजेशन भी उन्हें मिल चुका है, इसके बावजूद बिल्डर उनके किरायेदार की एंट्री नहीं दे रहा है। बिल्डर के गुर्गों ने किरायेदारों को घंटों बाहर खड़ा करवाये रखा। अंत में जब पुलिस की तरफ से भी किरायेदारों को मदद नहीं मिली तो हार-थक उन्हें अपना सामान लेकर वापस जाना पड़ा।
जब पजेशन है तो एंट्री क्यों नहीं?
पीड़ित की शिकायत पर जब पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो उन्होंने भी मेंटीनेंस विभाग के अधिकारियों से पूछा कि आखिर किरायेदारों को प्रवेश क्यों नहीं दिया जा रहा है। जिस पर मेंटीनेंस विभाग की तरफ से बताया गया कि उनके पास ये आदेश है कि किसी को भी पजेशन मिलने तक प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अब सवाल ये कि जिन फ्लैट ओनर्स को पहले से ही पजेशन मिल चुका है, आखिर उनकी एंट्री क्यों नहीं दी जा रही है। एक फ्लैट ओनर ने बताया कि रेरा का 78 लाख रुपये बिल्डर के ऊपर बकाया है, तो हर्जाना फ्लैट के ओनर क्यों भरें। अब बिल्डर फ्लैट ओनर से जबरन इसे वसूलना चाहता है।
'किराएदार और ओनर को किया जा रहा प्रताड़ित'
एक दूसरे किरायेदार के ब्रोकर वेदप्रकाश ने बताया कि हमारे पास पोर्टल से किराये के लिए लोग पूछते हैं, ऐसे ही एक किरायेदार को वेद प्रकाश ने एक अगस्त को मेफेयर सोसायटी में फ्लैट दिलाकर शिफ्ट कर दिया था। उन्होंने बताया इस फ्लैट के ओनर विदेश में रहते हैं। वेद प्रकाश ने बताया कि उन्होंने मेंटीनेंस विभाग को ओनर को मेल तक दिखा दिया। इसके बावजूद मेंटीनेंस विभाग उन्हें अंदर नहीं जाने दे रहा है। वेदप्रकाश ने मेंटिनेंस मैनेजर पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो जानबूझकर लोगों को परेशान कर रहा है।
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