GREATER Noida: परी चौक गुर्जर भवन में किसान संगठनों का आंदोलन लगातार जारी है। रविवार को किसानों ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया इसके साथ ही युवाओं को जोड़ने के लिए जनसंपर्क अभियान भी चलाने की रणनीति बनाई।धरने के 96 वें दिन धरना प्रदर्शन स्थल पर आजाद खान ने धरने की अध्यक्षता की और संचालन सतीश यादव ने किया ।
सांसद और विधायकों को नहीं है किसानों की चिंता
धरने को संबोधित करते हुए किसान सभा के प्रवक्ता डॉक्टर रुपेश वर्मा ने कहा कि भाजपा की सरकार है और प्राधिकरण सरकार की संस्था है। गौतम बुद्ध नगर जिले से एक लोकसभा सांसद, एक राज्यसभा सांसद, तीन विधायक और एक एमएलसी है। किसान लंबे अरसे से अपने मुद्दों को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं परंतु किसी भी जनप्रतिनिधि की प्राथमिकता में किसान और किसानों के मुद्दे नहीं हैं। जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता में उनके अपने कारोबार और अपने काम तो हैं परंतु किसानों के कामों को लेकर उन्हें कोई चिंता नहीं है। यहां तक कि विधायक और सांसद जब भी आंदोलन में हस्तक्षेप करने आए हैं तो सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर ही आए हैं और उन्होंने कभी भी अपनी जिम्मेदारी जनता और किसानों की ओर अपनी कोई जिम्मेदारी महसूस नहीं की है। ना ही धरने पर आकर कभी उन्होंने धरने को समर्थन दिया है । इस तरह उनकी भूमिका स्पष्ट है। जनप्रतिनिधि सरकार के साथ खड़े हैं।
जनप्रतिनिधि नहीं दे रहे किसानों का साथ
रुपेश ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर किसानों के साथ समझौता करने आए थे और उनके किए समझौते का सरकार ने पालन भी नहीं किया है। अभी भी किसान सभा लगातार इस इंतजार में है कि वह किसानों से किए अपने वादे को पूरा करेंगे। इस संबंध में उनको शामिल कर प्राधिकरण के अधिकारियों केसाथ बातचीत होनी है परंतु सांसद के समय नहीं देने के कारण वह वार्ता भी लटकी हुई है। इसलिए किसान सभा ने अपने आंदोलन को तेज करने के लिए 22 तारीख को नौजवानों के रोजगार के मुद्दे पर बड़ा आंदोलन करने का निर्णय लिया है। जिसके लिए किसान सभा की नौजवान कमेटी गांव में सघन प्रचार अभियान कर रही है।
किसानों के मुद्दे हल होने के बाद ही खत्म होगा आंदोलन
किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि किसान सभा ने धरना प्रदर्शन जिन मुद्दों को लेकर शुरू किया है, उन्हें हल करके ही दम लिया जाएगा । किसान सभा के नेता रणवीर मास्टर जी ने ऐलान करते हुए कहा कि 10% प्लाट, भूमिहीनों के 40 वर्ग मीटर के प्लाट, रोजगार की नीति और नए कानून को लागू करा कर ही आंदोलन खत्म होगा। नौजवान कमेटी के अध्यक्ष सुशांत भाटी ने कहा, क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी की समस्या है। प्राधिकरण ने हजारों हेक्टेयर जमीन ली है, जिससे ढाई लाख से ज्यादा किसान प्रभावित हैं और हजारों किसान जमीन जाने के कारण विस्थापित हुए हैं। आज तक भी प्राधिकरण की ओर से अधिग्रहण से प्रभावित किसान परिवारों के लिए रोजगार की कोई नीति नहीं है। एक भी नौजवान को प्राधिकरण के माध्यम से प्राधिकरण अथवा किसी फैक्ट्री में रोजगार नहीं मिला है। नौजवान आक्रोशित हैं और 22 तारीख को बड़ी संख्या में रोजगार के मुद्दे पर प्राधिकरण पर धरना प्रदर्शन करेंगे।
किसानों की जमीन कौड़ियों के दाम बेचे गए
गुर्जर भवन परी चौक पर सुनील फौजी के संयोजन में किसान सभा ने एनसीआर के सभी किसान संगठनों की बैठक बुलाई। बैठक में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर वर्तमान में चल रहे आंदोलन को मजबूत करने का निर्णय लिया गया और मिलकर लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया गया। सुनील फौजी ने मीटिंग को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों में व्यापक एकता बनाने के मकसद से सभी संगठनों को आज यहां आमंत्रित किया गया है। नए कानून को लागू ने करके और किसानों की जमीनों को कौड़ियों के भाव हड़प कर किसानों का भयंकर शोषण किया गया है। आंदोलन का मकसद है की भूमि अधिग्रहण में नए कानून को पूरी तरह लागू कराया जाए और इसके लिए आंदोलन को व्यापक बनाते हुए मजबूत किया जाएगा। धरने को जनवादी महिला समिति की दिल्ली कमेटी की नेता आशा शर्मा आशा यादव चंदा बेगम गुड़िया रेखा चौहान ने संबोधित किया।
Farmer Protest: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी को लेकर कानून बनाने समेत अपनी कई मांगों को लेकर पंजाब-हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों ने राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शन किया है। ये प्रदर्शन अब उग्रता की बढ़ रहा है। कई जगहों पर तो प्रदर्शनकारियों की जवानों के बीच झड़प भी देखने को मिल रही है। जिसमें कई जवानों और किसानों के घायल होने की भी सूचना सामने आ रही है। सड़कों पर किसानों के आंदोलन के चलते आम लोगों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन के दूसरे दिन आज फिर जवान सीमाओं पर कड़े पहरों के साथ पूरी मुस्तैदी के साथ खड़े हैं। वहीं किसानों ने भी दिल्ली कूच करने की पूरी तैयारी कर ली है।
किसानों को बॉर्डर पर रोकने की तैयारी
पंजाब-हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान संगठनों के आंदोलन की वजह से सीमाओं पर अच्छा-खासा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सीमाओं पर बैरिकेडिंग की गई। आंदोलन के दूसरे दिन भी सीमाओं पर जवानों का कड़ा पहरा है। बीते दिन किसानों की जवानों के साथ झड़प भी हुई। जिसमें कई जवान और किसान घायल हुए। किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी को लेकर कानून बनाने समेत अपनी और कई मांगों को स्वीकार कराने के लिए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।
आंदोलन का इन चीजों पर पड़ रहा असर
चंडीगढ़ से दिल्ली और अन्य शहरों की ओर जाने वाली बस सर्विस भी प्रभावित हो रही हैं। चंडीगढ़ से दिल्ली का हवाई किराया चार गुना तक बढ़ गया है। वहीं ट्रेन में भी सीट के लिए लंबी वेटिंग है। किसानों के कूच के कारण शहर में पेट्रोल के टैंकर भी कम आए हैं। प्रशासन पंजाब की तर्ज पर पेट्रोल-डीजल की बिक्री का कोटा तय करने पर विचार कर रहा है। किसानों के प्रोटेस्ट के चलते बुधवार को सब्जी-फल के अलावा खाद्य पदार्थ की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। मंडी में हर दिन अस्सी सब्जी-फल की गाड़ियां, नासिक, दिल्ली और उतरप्रदेश के कई शहरों से आती है।
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