Noida: सावन के महीने में कांवड़ यात्रा जारी है। लगातार श्रद्धालु हरिद्वार से गंगा जल लेने जा रहे हैं। कांवड़ियों की सुविधा के लिए कांवड़ मार्ग पर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। पुलिस प्रशासन भी कांवड़ियों की सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हुए हैं। इसी कड़ी में कमिश्नर गौतमबुद्धनगर लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर डीसीपी नोएडा राम बदन सिंह, एडीसीपी मनीष कुमार मिश्र द्वारा कांवड़ शोभा यात्रा को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए नोएडा जोन के विभिन्न क्षेत्रों में कॉवड शिविरों एवं कांवड़ मार्ग का निरीक्षण किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने लिया जायजा
पुलिस अधिकारियों ने शिविर में पानी/बिजली की उचित व्यवस्था के लिए निर्देश दिए गए। इसके साथ ही कांवड़ शिविरों में विश्राम कर रहे एवं आ रहे शिव भक्तों से बातचीत कर उनका कुशलक्षेम पूछा। अधिकारियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों की ब्रीफिंग कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये एवं सम्बन्धित थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया कि कांवड़ यात्रा को लेकर पीसीआर, पीआरवी वाहनों द्वारा लगातार पैट्रोलिंग की जाये व यातायात व्यवस्था को दुरूस्त रखा जाये।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों द्वारा कांवड़ मार्ग पर स्थित दुकानदारों को नामपट्टिका लगाने के आदेश पर अंतरिम रोक जारी रखी है। कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों के मालिकों के नाम पट्टिका लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने 22 जुलाई के आदेश को जारी रखा है। 22 जुलाई को कोर्ट ने कहा था कि दुकानदारों को अपना नाम बताने की जरूरत नहीं है। वे सिर्फ यह बताएं कि उनके पास कौन-से और किस प्रकार के खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश को जारी रखा
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान रेस्टोरेंट के मालिकों और कर्मचारियों की नेम प्लेट लगाने का आदेश जारी किया गया था। इसके बाद विपक्ष ने तीनों राज्यों की सरकारों के आदेश पर आपत्ति जताई थी। विपक्ष ने इस फैसले को समाज को विभाजित करने वाला और मुस्लिमों से पक्षपात करने वाला आदेश करार दिया था। इसके बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने इसे लेकर आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों की सरकारों द्वारा जारी आदेश पर रोक लगाई थी। शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ समय के अभाव के कारण मामले की सुनवाई नहीं कर पाई लेकिन, अंतरिम आदेश को जारी रखा।
19 अगस्त तक चलेगा सावन
बता दें कि श्रावण के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी कांवड़ में पवित्र गंगाजल लाते हैं और इससे शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान श्रद्धालु मांस से परहेज करते हैं और कई श्रद्धालु प्याज और लहसुन का भी सेवन नहीं करते। अदालत में एक पक्ष ने याचिका दायर करते हुए मामले की जल्द सुनवाई की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि अभी कांवड़ यात्रा चल रही है और 19 अगस्त को इसका समापन हो जाएगा। इसके जवाब में शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। हालांकि, अदालत ने यह नहीं बताया कि मामले की सुनवाई किस दिन होगी
सावन माह में 22 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले यूपी पुलिस ने एक ऐसा फरमान जारी कर दिया है, जिससे मुसलिम समाज में आक्रोश फैल गया है। इसके साथ ही विपक्ष भी विरोध पर उतर आया है। दरअसल, मुज्जफरनगर के एसपी ने कांवड़ मार्ग की सभी दुकानों पर मालिकों का नाम लिखने का आदेश जारी किया है। एसपी ने सभी दुकानदारों को निर्देश दिया था कि वो अपनी-अपनी दुकानों पर प्रोपराइटर या फिर काम करने वालों का नाम जरूर लिखें, जिससे कांवड़ियों में किसी प्रकार का कोई कंफ्यूजन न हो।
मुजफ्फरनगर में 240 किमी कांवड़ मार्ग
गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा का करीब 240 किलोमीटर का रूट पड़ता है। कावड़ मेले के दौरान शिव भक्त कावड़िए हरिद्वार हर की पौड़ी से गंगाजल उठाकर मुजफ्फरनगर से होते हुए अपने-अपने गंतव्य की ओर जाते हैं। इसी जिले से होते हुए कांवड़िए हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और यूपी के अलग-अलग जिलों में जाते हैं। इसी को लेकर एसएसपी ने निर्देश दिया था। पुलिस के निर्देश के बाद दुकानदारों ने अपने-अपने नाम के साथ किस चीज की दुकान है, उसका नाम लिखकर पोस्टर लगाने शुरू कर दिए हैं। किसी ने ठेले पर आरिफ आम वाला तो किसी ने निसार फल वाला की पर्ची लिखकर टांग ली है।
मुजफ्फरनगर के एसएसपी का आदेश
मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बुधवार को कहा था कि जिले में 240 किलोमीटर का कांवड़ मार्ग है तो इसमें जितनी भी खाने-पीने की दुकानें हैं। होटल, ढाबे या ठेले से कांवड़ियां अपनी खाद्य सामग्री खरीद सकते हैं। उन सबको निर्देश दिए गए हैं कि अपने प्रोपराइटर या काम करने वालों के नाम जरूर लिखें। ताकि किसी प्रकार का कोई कंफ्यूजन किसी भी कावड़िया के अंदर ना रहे और ऐसी स्थिति न बने, जिससे कहीं कोई आरोप-प्रत्यारोप हो और बाद में कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो।
औवैसी ने फरमान को बताया हिटलरशाही
एसएसपी के इस निर्देश को लेकर AIMIM चीफ और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी भड़क उठे हैं. उन्होंने 'X' पर लिखा, " उत्तर प्रदेश पुलिस के आदेश के अनुसार अब हर खाने वाली दुकान या ठेले के मालिक को अपना नाम बोर्ड पर लगाना होगा ताकि कोई कांवड़िया गलती से मुसलमान की दुकान से कुछ न खरीद ले. इसे दक्षिण अफ्रीका में अपारथाइड कहा जाता था और हिटलर की जर्मनी में इसका नाम 'Judenboycott' था."
ऐसे आदेश सामाजिक अपराधः अखिलेश
वहीं, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विरोध जताते हुए एक्स पर लिखा है कि … और जिसका नाम गुड्डू, मुन्ना, छोटू या फत्ते है, उसके नाम से क्या पता चलेगा? माननीय न्यायालय स्वत: संज्ञान ले और ऐसे प्रशासन के पीछे के शासन तक की मंशा की जाँच करवाकर, उचित दंडात्मक कार्रवाई करे। ऐसे आदेश सामाजिक अपराध हैं, जो सौहार्द के शांतिपूर्ण वातावरण को बिगाड़ना चाहते हैं।
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