जम्मू-कश्मीर इस वक्त बड़े ही नाजुक हालातों से गुजर रहा है. ऐसे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लेफ्टीनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा और भारत की सरकार किसी भी प्रकार के खतरे को पनपने नहीं दे सक्ती है. आज शब-ए-मेराज के मौके पर जब ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज मौलवी उमर फारूक को भाषण देने जाना था, लेकिन उन्हे घर में ही नजरबंद कर के आदेश दिए गए हैं.
Jammu & Kashmir: श्रीनगर की जामा मस्जिद के प्रबंधन इकाई ने जानकारी साझा करते हुए बताया है कि ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक को उनके घर में नजरबंद किया गया है. आज जुम्मे की नमाज के बाद मीरवाइज उमर फारूक कश्मीर की आवाम से बात कर अपने विचारों को सबके सामने रखने वाले थे, लेकिन उनका इस दौरे से पहले ही सरकार ने उन्हे नजरबंद कर दिया.
अंजुमम औकाफा जामा मस्जिद ने बयान जारी करते हुए कहा कि मीरवाइज उमर फारूक के भाषण को सुनने के लिए लोगों की बहुत बड़ी भीड़ इकट्ठा होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही अधिकारियों ने मौलवी उमर फारूक के घर के बाहर पुलिस वाहन तैनात करते हुए नगीन में उनको घर में ही नजरबंद कर दिया. प्रबंधन कमेटी ने उप-राज्यपाल पर आरोप लगाते हुए इस फैसले को गलत ठहराया है. जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों ने इस खबर की अब तक किसी भी प्रकार से पुष्टी नहीं की है.
चार साल से नजरबंद थे मीरवाइज
ध्यान देने वाली बात ये है कि सरकार के आदेश पर पिछले 4 साल से ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक को उनके घर में नजरबंद कर रखा था. पिछले साल सितंबर में मीरवाइज को रिहा किया गया था और ये हिदायत दी थी कि वे सिर्फ तीन शुक्रवार मस्जिद जा सकेंगे. अक्टूबर में इजराइल-फिलिस्तीन का युद्ध जब से शुरु हुआ है तभी से सरकार ने जम्मू-कश्मीर में मीरवाइज की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा रखा है.
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