ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 6 से 10 फरवरी तक 57 वां आईएचजीएफ दिल्ली मेला - स्प्रिंग 2024 आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई, निवेश प्रोत्साहन, नंद गोपाल गुप्ता भी शामिल रहे. पांच दिन तक चलने वाले इस एक्सपो में देश-विदेश से कई खरीददार भारत के बनाए हुए शिल्प कला और अन्य उत्पाद जैसे की कपड़े, फर्नीचर और आम जीवन में उपयोग में आने वाले सामानों की खरीदी का एक प्लेटफॉर्म है.
Greater Noida के एक्सपो मार्ट में टेक्सटाइल, फर्नीचर, और हस्तशिल्प के उत्पादों के अलावा और भी कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जैसे कि डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सुरक्षा, कॉर्पोरेट संचार, डेटा सुरक्षा के कानून और पालन कि प्रक्रियाओं के साथ-साथ उपयोग की जानकारी साझा करते हुए एक्सपो में लोगों के मनोरंजन और प्रोत्साहन के लिए रैम्प शो का भी आयोजन किया गया है.
बिजनेस में आपार संभावनाएं
एक्सपो की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राकेश कुमार ने व्यवसायिक गतिविधि के बारे में बताते हुए कहा, “पहले तीन दिनों के दौरान अच्छी संख्या में खरीददारों ने मेले का दौरा किया और मेले में अपने नियमित और नए आपूर्तिकर्ताओं के साथ ऑर्डर देने में अपनी रुचि साझा की। कई पुराने और नए खरीदार हमारे आयोजन का हिस्सा बने हैं। यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि हमारे विक्रेताओं और संरक्षकों की अगली पीढ़ी आईएचजीएफ दिल्ली मेले के साथ अपनी सोर्सिंग यात्रा शुरू कर रही है। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट हमारे हस्तशिल्प उद्योग के दूसरी और तीसरी पीढ़ी के निर्यातकों के साथ इन युवा खरीददारों के बीच नए व्यापारिक संबंधों की शुरुआत का गवाह है। इस तरह हमारा वैश्विक परिवार बढ़ रहा है."

अनुभव साझा करते लोग
आईएचजीएफ दिल्ली मेले के पहले संस्करण से ही कई विदेशी खरीददार जुडते आएं हैं, उन्होंने अपने अुनभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उन लोगों ने भारत के तैयार उत्पादों को अपने और अंतर्राष्ट्रीय मापदंडों पर खरा पाया. यू.के. (United Kingdom) से आने वाले डेज़ी स्नो और स्कॉट हिरोन ने कहा कि इस मेले में आना 'घर' आने जैसा है और इससे वो लोग बहुत खुश हैं, “मैंने अपने पिता के साथ खुद को भारत के होम वेयर और फ़र्नीचर उद्योग में डुबो दिया है, जिसकी जड़ें मेरी अंग्रेजी विरासत में हैं। कारीगरों के साथ काम करते हुए, मैंने उन्हें रीसाइकल्ड कच्चे माल का उपयोग को प्रोत्साहित किया। ऐसा करके मैंने पारंपरिक शिल्प को स्थायी रूप से संरक्षित किया है। विश्व स्तर पर काम करते हुए, मैंने सचेत उपभोग की वकालत करते हुए भारतीय शिल्प कौशल की सुंदरता को साझा किया है।"
अमेरिका से आए खरीदारों का कहना है कि उनके ग्राहकों को केवल उच्च स्तर के शिल्प कला उत्पाद जैसे की प्रिमियम टेबल लिनेन और अन्य लग्जरी आइटम के तलाश में रहते हैं, जिसकी आपूर्ति हम भारतीय एक्सपो में आकर करते हैं.

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद का बयान
आर.के वर्मा (कार्यकारी निदेशक) प्रेस से बात करते हुए कहा की ईपीसीएच दुनिया भर के विभिन्न देशों में भारतीय हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने के उपलक्ष्य और उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पादों और सेवाओं के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में विदेशों में भारत की छवि और होम जीवनशैली, कपड़ा, फर्नीचर और फैशन आभूषण और सहायक उपकरण के उत्पादन में लगे क्राफ्ट क्लस्टर के लाखों कारीगरों और शिल्पकारों के प्रतिभा की ब्रांड इमेज बनाने के लिए कार्यरत हैं.
इस एक्सपो से जुडी और जानकारी देते हुए आर.के वर्मा ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में हस्तशिल्प निर्यात 30 हजार 19.24 करोड़ रुपये (3,728.47 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का रहा.
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