होली में गुजिया खाना तो सबको पसंद है, लेकिन क्या आप जानते है पहली बार कहां बनाई गई थी गुजिया,अगर नहीं तो आज हम आपको बताने जा रहे है। दरअसल हर साल होली से पहले देशभर में गुजिया बनाई जाती है लोग रंगों में सराबोर होने के साथ गुजिया का भी खूब लोग लुत्फ़ उठाते हैं। गुजिया और होली का नाता भी काफी पुराना है। गुजिया भारत के अतीत की परछाई है, बिल्कुल समोसे की तरह जैसे समोसा वेस्ट एशिया से सफर करते हुए, मध्य भारत तक पहुंच गया। उसी तरह गुजिया का भी इतिहास है।
गुजिया की शुरुआत काफी पुरानी है
गुजिया एक मध्यकालीन व्यंजन है जो मुगल काल से पनपा और कालांतर में त्योहारों की स्पेशल मिठाई बन गई। इसका सबसे पहला जिक्र 13वीं शताब्दी में एक ऐसे व्यंजन के रूप में सामने आता है जिसे गुड़ और आटे से तैयार किया गया था। ऐसा माना जाता है कि पहली बार गुजिया को गुड़ और शहद को आटे के पतले खोल में भरकर धूप में सुखाकर बनाया गया था और ये प्राचीन काल की एक स्वादिष्ट मिठाई थी। गुजिया के इतिहास में ये बात भी सामने आती है कि इसे सबसे पहली बार उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बनाया गया था और वहीं से ये राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार और अन्य प्रदेशों में प्रचलित हो गई।
कृष्ण भगवान को इस मिठाई का भोग लगाया जाता
ऐसा माना जाता है कि होली में सबसे पहले ब्रज में ठाकुर जी यानी कृष्ण भगवान को इस मिठाई का भोग लगाया जाता है। होली के त्योहार में इसे विशेष रूप से तैयार किया जाता है क्योंकि इसका चलन ब्रज से ही आया और ब्रज में ही होली के दिन पहली बार गुजिया का भोग लगाया गया था। तभी से ये होली की मुख्य मिठाई के रूप में सामने आयी। हालांकि अब ये मिठाई होली के अलावा भी कई त्योहारों जैसे दिवाली और बिहार में छठ पूजा में भी बनाई जाती है। इस प्रकार गुजिया का इतिहास काफी पुराना है और अपनी खूबियों और बेहतरीन स्वाद की वजह से ये हमारे त्योहारों का मुख्य हिस्सा बन गयी। इसलिए आप भी गुजिया खाइए और होली की खूब मस्ती करिए।
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