7 मई तो तीसरे फेज की वोटिंग होनी है। लोकसभा चुनाव के दो चरण की 190 सीटों पर उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है। अब लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण की 95 सीटों पर कुल 1352 उम्मीदवार चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे है। इस फेज में बीजेपी के 82 प्रत्याशी मैदान में हैं तो कांग्रेस के 68 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं। इसके अलावा बसपा के 79 और सपा के 9 उम्मीदवार हैं। 650 निर्दलीय प्रत्याशी हैं तो 440 अन्य दलों के कैंडिडेट हैं। जहां तीसरे चरण में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। तो वहीं बीजेपी को देश में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए अपनी जीती हुई सीटों को बचाए रखने की चुनौती सामने है। इस फेज की वोटिंग के बाद आधे से ज्यादा लोकसभा सीटों पर चुनाव पूरा हो जाएगा। आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में पहले 94 सीटों पर चुनाव होने थे, लेकिन दूसरे चरण में बैतुल सीट पर बसपा उम्मीदवार के निधन से चुनाव रिक्त हो गया था। जिसके कारण अब उस सीट पर तीसरे चरण में चुनाव होना है, जिसके चलते 95 सीट पर चुनाव हो रहे हैं।
तीसरे चरण में किन-किन राज्यों में होगी वोट की चोट
तीसरे चरण में जिन 95 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उसमें असम की 4, बिहार की 5, छत्तीसगढ़ की 7, मध्य प्रदेश की 9, महाराष्ट्र की 11, दादर-नगर हवेली और दमन-दीव में एक-एक सीटें, गोवा की 2 सीटें, कर्नाटक की 14, जम्मू-कश्मीर की 1 सीट, पश्चिम बंगाल की 4, गुजरात की 25 और उत्तर प्रदेश की 10 सीटें शामिल हैं। इस तरह एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच हो रहे सियासी मुकाबले से कहीं ज्यादा मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है। पिछले तीन लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर बीजेपी का सियासी ग्राफ बढ़ा है तो कांग्रेस धीरे-धीरे नीचे गिरती जा रही है।
चुनाव दर चुनाव कांग्रेस का गिर रहा ग्राफ
बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में इन 95 सीटों पर होने वाले चुनावी नतीजे को देखें तो बीजेपी 72 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। कांग्रेस सिर्फ 4 सीटें ही पा सकी थी। इसके अलावा 9 सीटें अन्य दलों को मिली थी। 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद से बीजेपी का ग्राफ बढ़ा है तो कांग्रेस की सीटें घटी हैं। 2009 में बीजेपी ने 47 सीटें जीती थी और 2014 में यह बढ़कर 67 सीटों पर पहुंच गया था। 2019 में भी बीजेपी को उससे भी पांच सीटें ज्यादा मिली। कांग्रेस की सीटें देखें तो 2009 में 27 सीटें जीती थी और 2014 में 9 सीटों पर सिमट गई। 2019 में उसे 4 सीटों से संतोष करना पड़ा था। इस तरह बीजेपी चुनाव दर चुनाव बढ़ी है तो कांग्रेस घटती जा रही।
तीसरे चरण का रण बीजेपी का मजबूत दुर्ग
तीसरे चरण में गुजरात की 25 सीटों पर चुनाव है, बीजेपी 2014 और 2019 में सभी सीटें जीतने में कामयाब रही थी। इस तरह एमपी की जिन 9 सीटों पर चुनाव है, उस पर भी बीजेपी ने पिछले चुनाव से क्लीन स्वीप किया है। बीजेपी छत्तीसगढ़ की 7 में से 6 सीटें जीती थी और कर्नाटक की सभी 14 सीटों पर उसने कब्जा जमाया था। इसके अलावा यूपी की 10 में से 8 सीटें बीजेपी ने जीती थी। बिहार की 5 सीट बीजेपी के पास है। महाराष्ट्र की सभी 11 सीटों पर बीजेपी के सामने इस बार चुनाव में कड़ी चुनौती है। इसके अलावा असम की जिन चार सीटों पर चुनाव है, उसमें एक सीट पर बदरुद्दीन अजमल का कब्जा है और बाकी तीन सीटें एनडीए के पास है।
मुलायम परिवार के तीन सदस्यों की परीक्षा
लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में मुलायम परिवार के तीन सदस्यों की परीक्षा है। जिसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव मैनपुरी सीट से हैं। रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव फिरोजाबाद सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं तो शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव बदायूं सीट से चुनावी मैदान में है। इस तरह से अखिलेश से लेकर शिवपाल और रामगोपाल तक की परीक्षा इस फेज में होनी है। वहीं, यूपी की जिन 10 सीट पर तीसरे फेज में चुनाव है, उसमें 9 सीट पर सपा चुनाव लड़ रही है। सपा 2019 में संभल और मैनपुरी सीट जीतने में कामयाब रही थी, जिसके चलते इस बार उसे बचाए रखते हुए अपनी सीटों को बढ़ाने की चुनौती अहम है।
कांग्रेस के सामने अपना वजूद कायम रखने की चुनौती
कांग्रेस 10 सालों में 27 सीटों से घटकर 4 सीट पर पहुंच गई है। मोदी लहर में कांग्रेस दहाई के अंक में नहीं पहुंच पा रही है, लेकिन उसको इस बार के चुनाव में काफी उम्मीदें हैं। कांग्रेस को कर्नाटक से लेकर महाराष्ट्र और गुजरात तक में अपनी सीटें बढ़ने की उम्मीदें हैं। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ गठबंधन का कांग्रेस को चुनाव लड़ने का लाभ मिलने की संभावना है, तो गुजरात में क्षत्रिय समाज की नाराजगी से अपना फायदा देख रही है। बीजेपी के पुरुषोत्तम रुपाला के बयान से क्षत्रिय समाज नाराज है। गांव-गांव में इसका असर दिख रहा है, जिसके चलते माना जा रहा है कि गुजरात में बीजेपी की सीटें इस पर कम हो सकती हैं। ऐसे में यह देखना काफी अहम होगा कि इस बार कांग्रेस अपनी सीटें बढ़ा पाने में कामयाब होती है या फिर एक बार फिर जीत का ग्राफ गिर जाएगा।
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