बिहार में लोकसभा चुनावों के लेकर एनडीए में सीटों का बंटवारा हो गया है। जिसका बीजेपी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने एनडीए नेताओं के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एनडीए गठबंधन की सभी सीटों का ऐलान करते हुए कहा "कि फॉर्मूले पर चर्चा हुई और एनडीए गठबंधन में शामिल सभी दलों ने इसे स्वीकार कर लिया हैं।" वहीं बिहार में बीजेपी 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि जेडीयू 16 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं चिराग पासवान की पार्टी को 5, मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को 1 सीट और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 1 सीट मिली है। गौर करने वाली बात ये है कि इसमें पशुपति पारस की लोकजन शक्ति पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली है।
बीजेपी इन सीटों पर चुनाव लड़ेगी
पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, औरंगाबाद, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, महाराजगंज, सारण, उजियारपुर, बेगुसराय, नवादा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सूर, सासाराम और अररिया से बीजेपी चुनाव लड़ेगी।
जदयू इन सीटों पर चुनाव लड़ेगी
बाल्मिकी नगर, सीतामढी, झंझारपुर, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा, गोपालगंज, सीवान, भागलपुर, बांका, मुंगेर, नालन्दा, जहानबाद और शिवहर से जदयू चुनाव लड़ेगी ।
चिराग पासवान पांच सीटों पर मैदान में उतरेंगे
वैशाली, हाजीपुर, समस्तीपुर, खगड़िया और जमुई गया सीट पर जीतन राम मांझी की पार्टी चुनाव लड़ेगी. इसी तरह उपेंद्र कुशावाहा की पार्टी करकट लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी।
बिहार में सात चरणों में होंगी वोटिंग
बिहार में भी सात चरणों 19 अप्रैल, 26 अप्रैल, 7 मई, 13 मई, 20 मई, 25 मई और 1 जून को चुनाव होने हैं। पहले चरण में बिहार की 4 सीट पर वोटिंग होगी। दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें चरण में 5-5 सीटों पर वोटिंग होगी। इसके अलावा छठवें और सातवें चरण में 8-8 सीट पर वोटिंग होनी है।
साल 2019 में NDA के खाते में आईं थीं 39 सीटें
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में में एनडीए (भाजपा,जदयू और एलजेपी) ने शानदार जीत हासिल की थी। एनडीए ने बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 39 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि महागठबंधन के खाते में केवल एक किशनगंज सीट थी। जिस पर कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत ने जीत हासिल की थी।
लोकसभा चुनाव 2024 के 5वें चरण की वोटिंग 20 मई को होनी है। इस चरण में कई दिग्गजों की किस्मत का फैसला होना है। साथ ही कई कद्दावर नेताओं के सामने अपने गढ़ को बचाए रखने की भी चुनौती है। जिसको लेकर सभी दल जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटे हैं। पांचवें चरण में देश के 8 राज्यों की 49 सीटों पर चुनाव है, जिसमें उत्तर प्रदेश की 14 लोकसभा सीट शामिल हैं। इस चरण में 695 उम्मीदवार मैदान में है, जिसमें 82 महिलाएं और 613 पुरुष कैंडिटेट शामिल हैं। इस चरण में राहुल गांधी से लेकर स्मृति ईरानी, राजनाथ सिंह, पीयूष गोयल, रोहिणी आचार्य और चिराग पासवान जैसे दिग्गज नेताओं की अग्निपरीक्षा होने के साथ-साथ बीजेपी, कांग्रेस और टीएमसी जैसे राजनीतिक दलों का कड़ा इम्तिहान भी है। बता दें कि पांचवें फेज की जिन सीटों पर चुनाव है, उन सीटों पर 2014 और 2019 में बीजेपी ने अपना एकछत्र राज कायम रखा है।
पांचवां फेज बीजेपी के लिए भी अहम
पांचवें चरण में देश के 8 राज्यों की 49 सीटों पर चुनाव है। जिसमें उत्तर प्रदेश की 14 लोकसभा सीट शामिल हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र की 13 सीट, पश्चिम बंगाल की 7 सीट, बिहार की पांच सीट, ओडिशा की पांच सीट, झारखंड की 3 सीट, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की 1-1 सीट शामिल हैं। इस चरण में राजनीतिक दलों के साथ-साथ गांधी परिवार के सियासी वारिस माने जाने वाले राहुल गांधी की भी परीक्षा होनी है। इसके अलावा लालू परिवार से पासवान और शिंदे परिवार सहित कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। 2019 के चुनाव की बात करें तो इन 49 सीटों में से बीजेपी 40 सीटों पर लड़कर 32 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। जबकि कांग्रेस सिर्फ एक सीट ही जीत सकी थी। इसके अलावा जेडीयू के एक, एलजेपी एक, शिवसेना 7, बीजेडी एक, नेशनल कॉफ्रेंस एक और टीएमसी चार सीटें जीतने में सफल रही थी। बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए 41 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। जबकि यूपीए सिर्फ दो सीटें ही जीत सकी थी और अन्य को पांच सीटें मिली थी।
बीजेपी को चुनौती देना आसान नहीं
लोकसभा के तीन चुनाव से बीजेपी की सीटें जिस तरह बढ़ी है, उससे साफ जाहिर है कि कैसे इन सीटों पर उसे चुनौती देना आसान नहीं है। 2019 के चुनाव में बीजेपी ने जिन 40 सीट पर चुनाव लड़ी थी, उसमें से 30 सीट पर उसे 40 फीसदी से भी ज्यादा वोट मिले थे और 9 सीटों पर उसे 30 से 40 फीसदी के बीच वोट शेयर था। कांग्रेस को सिर्फ 3 सीट पर ही 40 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे, जिनमें से एक सीट ही जीत सकी थी। कांग्रेस को 17 सीटों पर 10 फीसदी से कम वोट मिला था। कांग्रेस 36 सीट पर चुनाव लड़ी थी जबकि बीजेपी 40 सीट पर चुनावी मैदान में थी।
5वें चरण का रण बीजेपी और कांग्रेस के लिए काफी रोचक
पांचवें चरण में 12 सीटें ऐसी हैं, जिस पर पिछले तीन चुनाव से एक ही पार्टी को जीत मिल रही है। इसके चलते इन सीटों को उस दल के मजबूत गढ़ के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी के पास 5, टीएमसपी के 3, बीजेडी के पास 2, शिवसेना-कांग्रेस के पास एक-एक सीट है। ओडिशा में बीजेपी के सामने अस्का और कंधमाल को बचाए रखने की चुनौती है। महाराष्ट्र में गढ़ माने जाने बीजेपी धुले और डिंडोरी और शिवसेना का गढ़ कल्याण शामिल हैं। बीजेपी के मिशन में झारखंड की हज़ारीबाग सीट शामिल है। पश्चिम बंगाल के हावड़ा, श्रीरामपुर और उलुबेरिया क्षेत्र टीएमसी के मजबूत गढ़ के तौर पर जाने जाते हैं। उत्तर प्रदेश में लखनऊ बीजेपी और रायबरेली सीट कांग्रेस के दुर्ग के तौर पर जानी जाती है। बिहार की मधुबनी सीट बीजेपी लगातार अपने नाम कर रखी है। इस तरह बीजेपी पांचवें चरण में मजबूत स्थिति में थी, लेकिन इस बार की चुनावी लड़ाई अलग तरीके की है। बीजेपी के लिए अपनी सीटें बचाए रखनी की चुनौती है जबकि कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। इस तरह कांग्रेस और बीजेपी के पांचवें चरण का चुनाव काफी रोचक माना जा रहा है।
क्या इंडी गठबंधन कर पाएगा बीजेपी के किले में सेंधमारी?
उत्तर प्रदेश की 14 लोकसभा सीट तो बिहार की पांच सीटों पर 20 मई को मतदान है। यूपी की 14 में से 13 सीटें बीजेपी जीतने में कामयाब रही थी जबकि कांग्रेस 1 सीट ही जीत सकी थी। बिहार की जिन पांच सीट पर चुनाव है, उन सभी को एनडीए ने जीती थी। जेडीयू और एलजेपी एक-एक सीट और बीजेपी तीन सीटें जीतने में सफल रही। पांचवें चरण में झारखंड की जिन तीन सीट पर चुनाव हो रहे हैं, उन सभी पर बीजेपी का कब्जा है। इसी तरह महाराष्ट्र की जिन 13 सीटों पर चुनाव हैं, उनमें से सात सीटें शिवसेना जीतने में कामयाब रही थी और बीजेपी 6 सीटें जीतने में सफल रही। एनडीए ने पूरी तरह से विपक्ष का सफाया कर दिया था। वहीं पश्चिम बंगाल की जिन सात सीटों पर चुनाव है, उनमें से चार सीटें टीएमसी जीतने में कामयाब रही थी जबकि बीजेपी 3 सीटें ही जीत सकी थी। पिछली बार की तरह इस बार भी कांटे की फाइट मानी जा रही है। इसके अलावा ओडिशा के पांच लोकसभा सीटों पर पांचवे चरण में चुनाव है। इन पांच से तीन सीटें बीजेपी जीतने में सफल रही थी जबकि दो सीट बीजेडी ही जीत सकी थी। इस बार बिहार से लेकर महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में विपक्ष एकजुट होकर चुनावी मैदान में है। इस बार ये देखना दिलचस्प होगा कि जैसे तीन चुनावों से बीजेपी को बढ़त मिल रही है, वो इस बार भी कायम रहती है या फिर इंडी गठबंधन बीजेपी को नुकसान पहुंचाने में कामयाब हो पाता है।
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