कोविड से बचने के लिए कोरोना वैक्सीन लगवाने वाले भी सुरक्षित नहीं हैं। एक स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि अध्ययन के लिए चुने गए 926 प्रतिभागियों में से लगभग एक-तिहाई लोगों में ऊपरी सांस की नली में वायरल संक्रमण सबसे आम और बड़ी शिकायत है।
भारत बायोटेक ने सुरक्षित वैक्सनी का किया था दावा
बता दें कि एस्ट्रा जेनेका-ऑक्सफोर्ड की कोविड-19 वैक्सीन कोविशील्ड के संभावित दुष्प्रभावों की रिपोर्ट के बीच कोवैक्सिन बनाने वाली भारत बायोटेक ने पिछले दिनों एक बयान जारी कर कहा था कि उसके वैक्सीन के सुरक्षा रिकॉर्ड शानदार रहे हैं। कंपनी ने कहा था कि उसकी वैक्सीन से खून के थक्के, प्लेटलेट की कमी जैसे दुष्प्रभाव सामने नहीं आए हैं। लेकिन बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कोवैक्सीन लेने वाले 30 फीसदी लोगों को कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।
926 लोगों पर किया गया रिसर्च
बीएचयू के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में भारत बायोटेक की कोवैक्सिन टीके के दीर्घकालिक प्रभावों की जांच में यह खुलासा हुआ है कि लगभग एक-तिहाई लोगों पर 'Adverse events of special interest प्रभाव देखने को मिला है। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि अध्ययन के लिए चुने गए 926 प्रतिभागियों में से लगभग एक-तिहाई लोगों में ऊपरी सांस की नली में वायरल संक्रमण सबसे आम शिकायत है। इसके अलावा लोगों में ब्लड क्लॉटिंग और एलर्जी के भी प्रभाव देखने को मिले हैं।
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