सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ के पुल अगर बीजेपी बांधे तो आम बात है। वहीं अगर जनता सीएम योगी की तारीफ करें तो समाझा जाएगा कि सरकार के कामों से जनता खुश हैं। वहीं अगर विपक्ष का कोई सांसद, वो भी मुस्लिम सांसद सीएम की तारीफों के पुल बांधना शुरू कर दे तो आपको भी लगेगा कि दाल में कुछ काला है। दरअसल उत्तर प्रदेश के इंडिया गठबंधन के दो मुस्लिम चेहरे इमरान मसूद और अफजाल अंसारी इन दिनों सीएम योगी की जमकर तारीफ करने में जुटे हुए हैं। जहां इमरान मसूद बिजली व्यवस्था को लेकर सीएम योगी की तारीफ करते नजर आए, वहीं अफजाल अंसारी ने यूपी में बीजेपी की सीटों का श्रेय सीएम योगी को दिया। हालांकि दोनों ही सांसदों का कहना है कि इस तारीफ को राजनीतिक दृष्टिकोण से ना देखा जाए। मगर जनाब ये तो होने से रहा। आइये जान लेते हैं कि दोनों सांसदों ने सीएम योगी की तारीफ में क्या कहा और क्या हो सकते हैं इस बेमौसम तारीफों की बरसात के मायने-
अच्छे कार्यों की सराहना भी की जानी चाहिए- इमरान
पश्चिम यूपी की सियासत के मुस्लिम चेहरे और सहारनपुर लोकसभा से पहली बार सांसद चुने गए इमरान मसूद ने सूबे की बिजली व्यवस्था को लेकर योगी सरकार की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘मेरे यहां बहुत-बहुत दिन तक लाइट नहीं आती थी। गर्मियों में हर साल ऐसा ही हाल रहता था, लेकिन इस बार इतनी भीषण गर्मी में भी यूपी में बिजली सही तरीके से आई है और बिजली विभाग के कर्मियों ने लगातार काम किया है। इस वजह से सूबे में बहुत ही बेहतर तरीके से बिजली आ रही है। भीषण गर्मी में ट्रांसफार्मर का फूंकना और फाल्ट आना तकनीकी दिक्कत है, लेकिन योगी सरकार ने बिजली की दिशा में अहम कार्य करने के चलते इस बार कोई परेशानी नहीं हुई। इसके कारण लोगों को अपेक्षित बिजली मिल रही है। साथ ही कहा कि विपक्ष में होने का मतलब यह नहीं है कि हर बात या कार्य की आलोचना की जाए। अच्छे कार्यों की सराहना भी की जानी चाहिए। अगर लाइट जल रही है और मैं कहू कि लाइट बंद है तो मेरी बात कोई नहीं मानेगा। अगर सकारात्मक काम हुआ है तो उसकी तारीफ भी करनी है।
अफजाल अंसारी ने बांधे तारीफों के पुल
वहीं सहारनपुर सांसद से पहले गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शान में कसीदे पढ़ चुके हैं। 2024 लोकसभा चुनाव नतीजे के बाद अफजाल ने कहा था कि अगर योगी आदित्यनाथ वाराणसी में प्रचार नहीं करते तो पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव हार जाते। योगी आदित्यनाथ की वजह से ही बीजेपी यूपी में 33 सीटें जीत पाई। उन्होंने कहा था कि अगर योगी प्रचार नहीं करते तो बीजेपी तीन सीटें ही जीत पाती। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्मा खत्म हो चुका है। यही कारण है कि बीजेपी वाराणसी के आसपास की सभी सीटें हार गई जबकि योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के साथ-साथ पड़ोस की सभी लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रहे। इसके अलावा अफजाल ने कहा कि उन्होंने जो कहा है वह पूरी तरह से सच है।
क्या ये सीएम योगी के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश है?
उत्तर प्रदेश में सत्ता की कमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों में है। अंसारी परिवार के साथ सीएम योगी के रिश्ते छत्तीस के रहे हैं। मुख्तार अंसारी का निधन हो चुका है और यूपी में भले ही बीजेपी की लोकसभा सीटें कम हो गई हों, लेकिन ढाई साल तक बीजेपी सरकार रहने वाली है। सूबे में बीजेपी सरकार की बागडोर योगी आदित्यनाथ के हाथ में रहने वाली हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सीएम योगी की तारीफ के पीछे उनके साथ अपना संबंध ठीक करने की रणनीति है। सूबे में 2017 से सत्ता की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथ में है। उन्होंने जिस तरह से सख्त रुख अख्तियार कर रखा है और कानूनी शिकंजा आजम खान परिवार पर कसा है, उसके चलते अभी तक उनकी मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। अतीक अहमद से लेकर मुख्तार अंसारी परिवार तक सियासी हश्र सबके सामने हैं। अफजाल अंसारी और इमरान मसूद की सियासत जिस तरह से रही है, उसके चलते उन पर कई मामले दर्ज हैं। अफजाल अंसारी अभी गैंगस्टर एक्ट में फंसे हुए हैं और मामला अदालत में है। इसके चलते अफजाल अंसारी लोकसभा सदस्यता की शपथ नहीं ले सके हैं। इमरान मसूद जिस तरह के भड़काऊ भाषण देते रहे हैं और मुस्लिम सियासत करते रहे हैं, उसके चलते भी उन पर कई मामले हैं। ऐसे में इमरान मसूद और अफजाल अंसारी दोनों ही सीएम योगी की तारीफ करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बेहतर तालमेल बैठाने की रणनीति मानी जा रही है।
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