ग्रेटर नोएडा: प्राधिकरण के बाहर धरना दे रहे किसानों को पुलिस ने हटा दिया। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच नोंकझोक भी देखने को मिली। किसानों पर काबू पाने के लिए पुलिस को हल्के बल का भी इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस ने मौके से 33 किसानों को हिरासत में भी लिया। जिन्हें पुलिस लाइन में लाया गया।

धरने को जबरन करवाया ख़त्म
किसान पिछले 43 दिन से अपनी कई मांगों को लेकर प्राधिकरण दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे थे। मंगलवार को किसानों ने प्राधिकरण के दूसरे गेट को भी बंद कर दिया था। किसानों ने प्राधिकरण पर डेरा डालो, घेरा डालो का आह्वन किया था। जिसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसान शामिल हुए थे।

ग्रेटर नोएडा: गिरफ्तार 33 किसानों की रिहाई की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर से गिरफ्तार किसानों को छोड़ने की मांग की। साथ ही उन पर दर्ज फ़र्जी मुकदमें को हटाने की भी मांग की। प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव सुखवीर गठिना, विधायक राजपाल बालियान, छपरौली विधायक अजय कुमार, खतौली विधायक मदन भैया मौजदूर रहे।
ग्रेटर नोएडा: किसान सभा की घंगोला और मायेचा कमेटी ने अपने-अपने गांव से जेल गए साथियों का सम्मान किया। साथ ही आंदोलन की आगे की रणनीति के बारे में चर्चा की गई। किसानों के बैठक में 10% आबादी प्लाट, रोजगार, भूमिहीन किसानों के लिए 10 वर्ग मीटर के प्लाट, 120 मीटर न्यूनतम प्लाट और साढ़े 17% आवासीय स्कीम में कोटा की नीति को बहाल करने के मुद्दे पर बात हुई।

इन मांगों पर भी किसान बैठक में चर्चा
इसके अलावा नई खरीदों में सर्कल रेट का 4 गुना मुआवजा देने और नई खरीद से प्रभावित किसानों को नए कानून के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लाभ देने पर भी बात हुई। आपको बता दें किसानों के प्लाटों पर पेनल्टी खत्म करने, आबादियों की लीज बैक तुरंत तेज गति से शुरू करने, आबादी के शेष प्रकरणों का निस्तारण करने सहित अन्य मांगों को लेकर 7 फरवरी से किसान सभा ने आंदोलन शुरू किया था।

क्या है पूरा घटनाक्रम
दरअसल, किसान सभा ने 7 मार्च, 14 मार्च और 23 मार्च को हजारों की संख्या में एक-एक दिन का धरना प्रदर्शन किया था। 25 अप्रैल से किसान सभा ने प्राधिकरण पर रात दिन का महापड़ाव डाल दिया था। जिसमें लगातार आंदोलन करते हुए 6 जून को किसानों ने प्राधिकरण के दोनों गेटों को बंद कर दिया। इस दौरान चले आंदोलन में अभूतपूर्व रूप से किसानों ने हजारों की संख्या में हिस्सा लिया। संख्या के लिहाज से आंदोलन ऐतिहासिक रहा, आंदोलन में महिलाओं युवाओं और भूमिहीन किसानो की हजारों की संख्या ऐतिहासिक तौर पर बेमिसाल रही।
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